नयी दिल्ली 04 अप्रैल, उच्चतम न्यायालय ने उच्चतर न्यायपालिका में हिंदी में सुनवाई किये जाने की अनुमति संबंधी याचिका आज खारिज कर दी। न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि क्या हम संसद को यह आदेश जारी कर सकते हैं कि वह ऐसा या वैसा कानून पास करे।
न्यायालय ने याचिकाकर्ता शिवसागर तिवारी को फटकार लगाते हुए कहा, “आप संविधान में ही बदलाव की मांग क्यों नहीं करते। पहले ही अदालतों पर मुकदमों का बोझ है और आप ऐसी याचिका लगाते हैं।”
पीठ ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, लेकिन याचिकाकर्ता ने कहा कि उनके पास एक लाख तो क्या एक हजार रुपये भी नहीं है। इस पर न्यायालय ने इस हिदायत के साथ जुर्माना वापस ले लिया कि वह भविष्य में ऐसी जनहित याचिका दाखिल नहीं करेंगे। याचिकाकर्ता की दलील थी कि संविधान के अनुच्छेद 348 में संशोधन करके उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों में हिन्दी को आधिकारिक भाषा बनाई जानी चाहिए।

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