प्रद्योत कुमार,बेगूसराय। वर्ष 2014 में मौसम विभाग ने ये घोषणा की थी कि इस वर्ष बारिश की संभावना कम है क्योंकि अलमिनो तूफान का तासीर मानसून को प्रभावित करेगा और कमोबेस हुआ भी लेकिन ये बात 2014 की है,और मोदी के सरकार में आते ही दाल की क़ीमत में एकाएक उछाल आया जो अभी तक बरकरार है,लेकिन मोदी समर्थकों का कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण क़ीमत में उछाल आया,अब यहां ग़ौर करने की बात ये है कि बारिश 2013 में हुई तो 2014 में दाल के मूल्य में वृद्धि नहीं होना था क्योंकि बारिश 2014 में नहीं होने पर उसका असर 2015 के बाज़ार पर पड़ता लेकिन मोदी के सरकार में आते ही जमाख़ोर निर्भीकता के साथ बाज़ार को अपने कब्ज़े में ले लिया और अपने हिसाब से बाज़ार के मूल्य को नियंत्रित करने लगा जिसका परिणाम है दाल की क़ीमत में 100% की वृद्धि,अरहर दाल 70 से 170,चना दाल 42 से 83.75,मसूर दाल 55 से 80 रु प्रति केजीहै।ये महँगाई नहीं तो और क्या है मित्रों और मोदी जी मन की बात अच्छे दिन में करते है।
आलू 6 से 18,टमाटर 12 से 60 रु प्रति केजी,चीनी 29 से 39 रु केजी।बाज़ार के भाव को सरकार ने जमाखोरों को सौंप दिया है।एक अहम बात और बताना चाहूँगा कि जब यू पी ए 2 की सरकार थी तो पेट्रोल की क़ीमत 81 रु लीटर के आसपास गया था तो लोंगो ने कहा सरकार लुटेरी है,उस वक़्त कच्चा तेल 100 से 110 रु डॉलर प्रति बैरल था,अभी कच्चा तेल 45 से 50 रु डॉलर प्रति बैरल है,फिर भी पेट्रोल की क़ीमत 67 रु लीटर है तो तय आपने करना है कि लुटेरी सरकार कौन और किसकी थी।ये सरकार ज़मीनी कार्य से को छोड़ कर अंतरिक्ष में कार्य कर रही है ,जनता करे हाय हाय,सरकार लगाये वाई फाई,अब आप ही सोचिये ऑन लाइन परीक्षा सर्वर डाउन हो गया,जिस लड़के को 90% बनाना था उसने बनाया 67% हो गया फेल,रह गए बेरोज़गार।संतोष के लिए क्या करेंगे तकनीकी बात है,पर सवाल उठता है कि अभी हम उस लायक नहीं हुए हैं,साहब यहाँ 2जी और 3जी ढ़ंग से काम नहीं करता है और हम अपनाते है ऑन लाइन पैटर्न।सबसे पहले अपने तंत्र को ठीक कर लें,मन को ठीक कर लें तब जाकर होगा विकास,तब घटेगी महँगाई।नहीं तो अंजाम वही होगा जो वाजपेयी सरकार की हुई थी।

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