पटना 24 जून, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आज नीति निर्धारण और योजनाओं के क्रियान्वयन में आंकड़ों की गुणवत्ता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि गलत आंकड़े न सिर्फ बाजार में उतार-चढ़ाव ला सकते है बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी गंभीर संकट पैदा कर सकते है । श्री अंसारी ने एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीच्यूट (आद्री) के रजत जयंती समारोह के अवसर पर चार दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन करते हुए कहा कि कि खुली अर्थव्यवस्था और सिमटती दुनिया में बाजार की प्रतिक्रियात्मकता आंकड़े और जानकारी बांटने में और अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है । उन्होंने कहा कि गलत आंकड़े और उसकी गलत व्याख्या बाजार में उतार-चढ़ाव का कारण बन सकता है । इसलिए आंकड़े की गुणवत्ता को बनाये रखने के लिए सांख्यकी शिक्षा और प्रशिक्षण को बेहतर बनाये जाने की आवश्यकता है । उप राष्ट्रपति ने कहा कि सरकारी एजेंसियों की ओर से एकत्रित किये गये आंकड़े को बेहतर बनाये जाने के लिए समय सीमा के अंदर सर्वेक्षण किये जाने की आवश्यकता है । समय सीमा का पालन नहीं होने से भी संचित किये जा रहे आंकड़े की गुणवत्ता पर असर पड़ता है । उन्होंने कहा कि इस चुनौती का सामना करने के लिए हर संभव प्रयास किये जाने की जरूरत है ।
श्री अंसारी ने फ्रेंच अर्थशास्त्री थॉमस पिकेती का उद्धरण देते हुए कहा कि भारत में आयकरदाताओं के आंकड़े भी प्रमाणिक नहीं है और सरकार जातीय आधारित जनगणना के आकड़ों को सार्वजनिक करने से संकोच कर रही है। इस परिस्थिति में भारत में किस स्तर तक असामान्यता है , इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। केन्द्र सरकार की ओर से वित्त वर्ष 2012-13 के लिए जारी किये गये आयकर के आंकड़े ने भी टैक्स चोरी को लेकर एक बहस को जन्म दिया है। उच्चतम स्तर पर काफी कम टैक्स रिटर्न के आकड़े से भी यह पता चलता है कि सक्षम वर्ग भी टैक्स जमा करने में उदासीन है। उन्होंने पिकेती का हवाला देते हुए कहा, ‘‘उपलब्ध आंकड़े इतने पर्याप्त नहीं कि भारत में असमानता के स्तर की जानकारी सही-सही हो सके।” श्री अंसारी ने कहा कि हाल में फ्रेंच अर्थशास्त्री ने एक साक्षात्कार में कहा था ,‘‘ जाति, आय, धन के बीच की कड़ी को स्पष्ट करने वाली जाति जनगणना के साथ भी यही समस्या है। पिकेती ने यह भी महसूस किया कि जातीय आंकड़े से यह स्पष्ट हो पायेगा कि भारत में विभिन्न जातियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति क्या है , इससे यह भी स्पष्ट हो पायेगा कि सामाजिक -आर्थिक स्थिति का संबंध जाति से भी है क्या। ’’
इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सांख्यिकी के आंकड़ों से विकास योजनाओं में मदद मिलती है लेकिन हम जो सांख्यिकी का उपयोग करते हैं, उसके तौर तरीके और गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता है। उन्होंने कहा कि भारत में सांख्यिकी इकट्ठा करने का कार्य काफी पुराना है। स्वास्थ्य का क्षेत्र हो या कृषि उत्पादन का, 19वीं शताब्दी से ही आंकड़े इकट्ठे किये जाते रहे है लेकिन इन आंकड़ों की गुणवत्ता को लेकर हमेशा इनपर प्रश्न चिह्न लगता रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सांख्यिकी का सबसे महत्वपूर्ण कार्य जनगणना को माना जाता है। आजादी के पहले सामाजिक पहलू की भी गणना की जाती थी, जो वर्ष 1931 के बाद बंद हो गयी। उन्होंने कहा कि बहुत बाद में सामाजिक , आर्थिक जनगणना की गई लेकिन जो आंकड़े इकट्ठा हुये, वह वर्षो बीत जाने के बाद भी प्रकाशित नहीं किये गये हैं। श्री कुमार ने सामाजिक ,आर्थिक, जातिगत जनगणना के आंकड़ों के तत्काल प्रकाशन की मांग की। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के संग्रहण और उसकी गुणवत्ता बेहतर होने से बुनियाद सही बनती है और नीतियों का निर्धारण सही ढंग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गरीबी को मापने के लिए भी सिर्फ कैलोरी या आय मापदण्ड नहीं होना चाहिये बल्कि उसका मापदण्ड बहुआयामी होना चाहिये।
वहीं राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने कहा कि गरीबी उन्मूलन में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि गरीबी हटाने का कोई भी प्रयास तबतक सफल नहीं हाे सकता है जबतक कि उसके केन्द्र में शिक्षा नहीं होगी। सम्मेलन को आद्री के सदस्य सचिव शैवाल गुप्ता, यूनिसेफ के भारतीय प्रतिनिधि लुईस जार्ज अर्सनॉल्ट, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति डा. गोपा सबरवाल, इंटरनेशनल ग्रोथ सेंटर के कंट्री डायरेक्टर प्रो0 अंजन मुखर्जी ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर उप राष्ट्रपति श्री अंसारी, राज्यपाल रामनाथ कोविंद, मुख्यमंत्री श्री कुमार एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों द्वारा आद्री के कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव, शिक्षा मंत्री अशोक कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव, सहकारिता मंत्री आलोक कुमार मेहता, केरल एवं नागालैण्ड के पूर्व राज्यपाल निखिल कुमार, विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता सुशील कुमार मोदी समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। इसके पूर्व उप राष्ट्रपति श्री अंसारी के वायुसेना के विमान से पटना पहुंचने पर हवाई अड्डे पर भव्य स्वागत किया गया। राज्यपाल श्री कोविंद, मुख्यमंत्री श्री कुमार ने उप राष्ट्रपति को फूलों का गुलदस्ता भेंट किया और उनका स्वागत बिहार की पवित्र धरती पर किया।

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