कोलकाता, 28 जुलाई, अपनी लेखनी से पिछड़ों और वंचित लोगों के लिए लड़ाई लड़ने वाली प्रख्यात साहित्यकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का आज निधन हो गया, वह 90 वर्ष की थीं और पिछले दो महीने से बीमार थीं। उनका स्थानीय बेलेव्यू अस्पताल में इलाज चल रहा था और हालत गंभीर होने पर उन्हें कुछ दिनों से वेंटीलेटर पर रखा गया था। उन्हें 23 जुलाई को दिल का दौरा पड़ा था। चिकित्सकों ने बताया कि उन्होंने आज अपराह्न तीन बजकर 16 मिनट पर अस्पताल में अंतिम सांस ली। सुश्री महाश्वेता देवी को साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्म विभूषण, ज्ञानपीठ और रमन मैग्सेसे पुरस्कार से नवाजा गया। उनकी मशहूर कृतियों में हजार चौराशीर मां, अग्निगर्भ, झांसी की रानी और तिन कोरिर साध शामिल है। सुश्री महाश्वेता देवी ने अविभाजित बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के कल्याण के लिए काफी काम किया। उन्होंने पश्चिम बंगाल की औद्योगिक नीतियों के खिलाफ भी आंदोलन छेड़ा था। उन्होंने शबर जनजाति के लिए उल्लेखनीय कार्य किये।
शुक्रवार, 29 जुलाई 2016
मशहूर लेखिका एवं सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का निधन
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