फिल्म निर्माण सिर्फ व्यवसाय करना नहीं है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है: राजेश कुमार जैन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 28 जुलाई 2016

फिल्म निर्माण सिर्फ व्यवसाय करना नहीं है, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है: राजेश कुमार जैन

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ज्ूाही चावला अभिनीत राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित ओनिर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘आई एम’ से बतौर फिल्म सहनिर्माता जुडे़ राजेश कुमार जैन ने फिल्म ब्लू माउंटेन्स का निर्माण भी किया। इनके अलावा दूरदर्शन पर प्रसारित बहुचर्चित सफल टीवी शो ‘अनुदामिनी’ के बाद अब नया टीवी शो ‘बस थोडे़ से अंजाने’दूरदर्शन के मुख्य चैनल पर सोम से शुक्र दोपहर 1ः30 पर प्रसारित हो रहा है। राजेश कुमार जैन का कहना है कि ‘वह फिल्म निर्माण के क्षेत्र में  अपनी  मेहनत और ईमानदारी के बल पर हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनना चाहते है।’ हाल में उनसे बातचीत हुई पेश है,मुलाकात के चंद अंशः

आपने बतौर फिल्मकार कब सफर तय किया?
फिल्मों से मेरा रिश्ता करीबन एक दशक से है। मैंने सबसे पहले फिल्म ‘आई एम’ का निर्माण बतौर फिल्म सहनिर्माता किया। फिल्म बहुत ही खूबसूरत बनी थी इसके निर्देशक ओनिर थे,और जूही चावला और संजय सूरी ने काम किया था। 

फिल्म ब्लू माउटेन्स के बारे में बताएं ?
फिल्म ब्लू माऊॅटेन्स में बच्चे के  संघर्ष की कहानी को दर्शया गया है । जिसमे मुख्य कलाकार रणवीर शोरी, ग्रेसी सिंह और राजपाल यादव ने काम किया। फिल्म ने इंटरनेशनल चिल्ड्रन फिल्म फेस्टिवल 2015 हैदराबाद में बेस्ट फीचर फिल्म का अवार्ड मिल चुका है।

फिल्म निर्माण करते हुए आप नजरिया क्या होता है?
सबसे पहले एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हॅू,कि फिल्म बनाना सिर्फ व्यवसाय करना नहीं है बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। मेरा प्रयास रहता है कि कुछ नया किया जाएं और समाज को ध्यान में रखकर फिल्मों का निर्माण किया जाये। इसके सबके लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है कहानी।

आप शार्ट फिल्मों का निर्माण भी कर चुके है, इसके बारे में क्या कहना है ?
शार्ट फिल्में काफी पापुलर हो रही है,सो मैंने भी सोचा कि फिल्मों की अपेेक्षा कुछ नया किया जाये। मुझे खुशी है कि मेरा यह प्रयोग कामयाब भी हुआ।  मैं खुश हूं कि मेरी शार्ट फिल्म द संडे,खासी लोकप्रिय हुई। 

इन दिनों फिल्मों में उतर भारत खासा लोकप्रिय है? 
मेरा मानना है कि उत्तर भारत इस समय सिनेमा के लिए एक बेहतर सब्जेक्ट की तरह है। इस पर अनेक फिल्मों का निर्माण भी हो चुका है। यहां अपराध के नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। चारों और नफरत की हवा चल पड़ी है। एक-दूसरे से प्रतिशोध की घटनाएं भी जोर पकड़ रही हैं। सिनेकर्मी चाहें तो फिल्में बनाकर सोशल मैसेज दे सकते हैं कि समाज को कितना नुकसान हो रहा है। हर कोई एक-दूसरे से कितना डरा डरा सा रहने लगा है यानी विकास किस तरह अपने बीच से गायब हो गया है। 

यथार्थवादी फिल्में के बारे में क्या कहेंगे?
यथार्थवादी फिल्में का निर्माण आसान तो नहीं है लेकिन मैं वह जोखिम उठा रहा हूं। दूसरी बात मेरा मकसद फिल्म निर्माण के द्वारा सिर्फ खुद को चमकाना और व्यवसाय करना नहीं है बल्कि एक समाजिक जिम्मेदारी भी है। 

अपने नये प्रोजेक्ट ‘बस थोडे़ से अंजाने’ के बारे में बताये ?
यह शो इन दिनों दूरदर्शन पर प्रसारित हो रहा है,जो मानवीय रिश्तों पर आधारित है, इसमें महिलाओं की व्यथा व उनके संघर्ष की कहानी को दर्शाया है। शो के निर्देशक भरत भाटिया व लेखक धनंजय सिंह मासूम हैं मुख्य किरदार  अली हसन एनाताशा सिन्हा,इंडियन आइडल फेम दीपाली सहाय सिन्हा,श्याम मशकलकर और नीतू सिंह निभा रहे हंै। 

आप तो एक अभिनेता भी है,कैसा लगता है,पर्दे पर अभिनय करके ?
अभिनेता व निर्माता दोनांे ही अलग बात है। अभिनेता बनना भी आसान नही है, बतौर अभिनेता के रूप में शार्ट फिल्म इतवार- द संडे काफी चर्चित हो रही है, जो कोल्कता फिल्म फेस्टिवल में चयनित हुई है । इसके अलावा ‘मन में है विश्वास’ सहित कई टीवी शो में भी काम कर चुका हॅू।

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