बिहार में शराबबंदी के नये सख्त कानून को विधानसभा ने किया बहुमत से पारित - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 2 अगस्त 2016

बिहार में शराबबंदी के नये सख्त कानून को विधानसभा ने किया बहुमत से पारित

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पटना 01 अगस्त, बिहार में पूर्ण शराबबंदी के चार माह के अनुभवों के आधार पर बनाये गये सख्त नये उत्पाद अधिनियम को आज विधानसभा से बहुमत से पारित होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ :आरएसएस: प्रमुख मोहन भागवत को इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती दी । विधानसभा में विपक्ष के संशोधन प्रस्ताव के औंधे मुंह गिरने और भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों के सदन से बहिर्गमन के बाद बिहार मद्य निषेध और उत्पाद विधेयक 2016 को बहुमत से पारित कर दिया गया । इस विधेयक के पारित होने के बाद अब किसी घर से शराब बरामद होने पर उस घर के 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को जिम्मेवार माना जायेगा। इसके साथ ही इस नये कानून में पुलिस को असीमित अधिकार दिये गये हैं । अब पुलिस अधिकारी बिना सर्च वारंट के किसी के घर की तलाशी ले सकते हैं और बिना वारंट किसी को गिरफ्तार भी कर सकते हैं । मुख्यमंत्री श्री कुमार ने इस विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि वह बर्बाद हो जायेंगे, नष्ट हो जायेंगे लेकिन किसी कीमत पर शराबबंदी के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे । उन्होंने कहा कि शराबबंदी को यदि सफल बनाना है तो इसके लिए कानून भी सख्त बनाना जरूरी था । पिछले चार माह में यह अनुभव किया गया कि इससे संबंधित कानून में कुछ खामियां थी जिसका लाभ कानून तोड़ने वाले उठा रहे थे । श्री कुमार ने भाजपा के साथ आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी और श्री मोहन भागवत को शराबबंदी पर अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुजरात में शराबबंदी तो लागू है लेकिन पूरे देश में पूर्ण शराबबंदी पर केंद्र सरकार का क्या रवैया है यह उन्हें स्पष्ट करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने नए कानून में पुलिस और उत्पाद विभाग के अधिकारियों को असीमित अधिकार देने पर आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा कि यह सही नहीं है, जो लोग भी कानून का उल्लंघन करेंगे उनके लिए सख्त सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि न केवल पीने-पिलाने वाले बल्कि पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारियों के लिए भी कड़ा कानून बनाया गया है। श्री कुमार ने कहा कि यदि यह साबित हो गया कि इस कानून का इस्तेमाल कोई लोगों को परेशान करने के लिए कर रहा है तो उसे भी तीन साल या तीन साल से अधिक की सजा होगी। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बारे में दुष्प्रचार कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है लेकिन वे इसके लिए प्रतिबद्ध हैं। नशाबंदी कराना सरकार का दायित्व है और वह इस दायित्व से पीछे नहीं हटेंगे। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि ताड़ी पर प्रतिबंध को लेकर भी कई तरह की बातें आई हैं । यह सही है कि ताड़ी नशे का माध्यम है। कोई नहीं कहेगा कि ताड़ी में नशा नहीं है। जो कहता है कि ताड़ी नशे का साधन नहीं है वह गलत कहता है। उन्होंने कहा कि ताड़ का उपयोग व्यावसायिक रूप में किया जाएगा। न केवल नीरा बल्कि चटाई, पंखा समेत अन्य कई उपयोगी चीजों का निर्माण होगा। इसकी पूरी योजना बन रही है। श्री कुमार ने कहा कि पूरे राज्य में लगे ताड़ पेड़ों की गिनती करायी जायेगी और उसके बाद तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय कोयम्बटूर के विशेषज्ञों से नीरा उत्पादन की तकनीक सीखाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश होगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सदन से बहिर्गमन और नये कानून के विरोध की चर्चा करते हुए कहा कि विपक्ष के लोगों ने भी प्रदेश में शराबबंदी को लेकर जागरूकता और सहयोग का संकल्प लिया था, अब इस मुद्दे पर पीछे हटने का क्या मतलब है । उन्होंने भाजपा शासित झारखंड में सीमा के बिल्कुल पास शराब बिकने को कानून का उल्लंघन बताया और कहा कि इस बारे में पर्याप्त कानून हैं जिसका पालन भाजपा सरकार नहीं कर रही है। इससे पूर्व उत्पाद एवं मद्यनिषेध मंत्री अब्दुल जलील मस्तान ने विधानसभा में ..बिहार मद्य निषेध और उत्पाद विधेयक 2016.. पेश किया तथा सदस्यों से इसे सर्वसम्मति से पारित करने का अनुरोध किया । बाद में विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि उनकी पार्टी शराबबंदी के पक्ष में है । डंडे के जोर पर नशे को दूर नहीं किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि इस कानून में ऐसे नियम बनाये गये हैं जो स्वीकार नहीं किये जा सकते हैं । श्री यादव ने नये कानून पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यह कैसा कानून है कि जिसमें घर में शराब मिलने पर पूरे परिवार को जेल में जाना होगा । उन्होंने कहा कि शराब मिलने पर यदि घर का मुखिया जिम्मेदार होगा तो सूबे में शराब मिलने पर जिम्मेदार कौन होगा । भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री श्री कुमार शराबबंदी को राजनीतिक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं । एक तरफ सरकार बिहार में शराब बनवा रही है और दूसरी ओर लोगों को पीने से मना कर रही है। विधेयक पर चर्चा में विपक्ष के नेता डा0 प्रेम कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही कह रही थी कि सरकार शराबबंदी को ठीक से लागू नहीं कर पा रही है । अब चार माह में ही सरकार को नया कानून लाना पड़ा । दरअसल सरकार कानून के जरिये डंडे के जोर से इसपर रोक लगाना चाहती है लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि इसपर रोक डंडे से नहीं बल्कि जागरूकता पैदा कर ही लगायी जा सकती है । विधेयक पर विपक्ष की ओर से दिये गये संशोधन प्रस्ताव पर दो बार मत विभाजन कराया गया जिसके पक्ष में मात्र 46 वोट पड़े वहीं दूसरी ओर सरकार के पक्ष में 150 वोट पड़े । बाद में विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया । इसके बाद विपक्ष की गैर मौजूदगी में सदन ने ध्वनि मत से बिहार मद्य निषेध और उत्पाद विधेयक 2016 को पारित कर दिया । गौरतलब है कि राज्य में एक अप्रैल से देसी शराब और पांच अप्रैल से अंग्रेजी शराब के सेवन, कारोबार और भंडारण पर पूर्णत: रोक है । 

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