सोनपुर 22 नंवम्बर, वर्तमान दौर में साम्प्रदायिक ताकतें जहां हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच विभाजन की लकीर खींचने में लगी है वहीं हिन्दू-मुस्लिम एकता और समन्वय की शक्तियां भी काम कर रही है शायद यही वजह है कि भारत की गंगा-जमनी तहजीब में पले-बढ़े शमीम अहमद जैसे लोग भी हैं जो समाज को बांटने वाली ताकतों को सफल होने नहीं देना चाहते हैं। बिहार के सारण जिले के सोनपुर में हिंदुओं के प्रसिद्ध हरिहर नाथ मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने में आम हिन्दू भक्तों को भले ही परेशानियों का सामना करना पड़े लेकिन मुस्लिम पेंटर शमीम अहमद और उनके शागिर्द मोहम्मद शमीम की पहुंच गर्भगृह तक है। शमीम यहां के मंदिर गुंबज, धर्मशाला और कमरे की पेंटिंग श्रद्धा भाव के साथ करते हैं।
सारण जिले के सोनपुर थाना के आदम गांव निवासी 45 वर्षीय शमीम अहमद ने बताया कि उनके पिता नूर मोहम्मद सोनपुर में ही उत्तर-पूर्व रेलवे में पेंटर का काम करते थें और उन्ही की शागिर्दी में उन्होंने भी पेटिंग का काम सीखा है। उन्होंने बताया कि वह 14 साल की उम्र से पेटिंग का काम कर रहे हैं। हरिहर नाथ मंदिर में वह बीस से अधिक साल से श्रद्धा पूवर्क पेंटिंग का काम कर रहे हैं। एक सवाल के जवाब में श्री शमीम ने बताया कि इसके लिये उन्हें आज तक किसी तरह के विरोध का सामना नही करना पड़ा है। वह एक कारीगर हैं और कारीगर का कोई धर्म या मजहब नही होता है। वह पेशे के तौर पर मंदिर की पेटिंग करते हैं।
श्री शमीम ने बताया कि पेटिंग के काम में उनके शागिर्द मोहम्मद शमीम और मुकेश मदद करते हैं। काम के बदले उन्हें प्रतिदिन 400 रुपये मजदूरी दी जाती है। उन्होंने बताया कि मंदिर प्रशासन के आग्रह पर वह साल में दो बार सावन और कार्तिक महीने में मंदिर में 15-15 दिन तक पेंटिंग करते हैं। पेटिंग के काम में उनके साथ अतहर हुसैन और फख़रुद्दीन भी जुड़े हुये हैं। बक्सर जिला निवासी और वर्ष 2006 से हरिहर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी के तौर पर काम कर रहे सुशील चंद्र शास्त्री ने बताया कि शमीम श्रद्धा पूर्वक मंदिर के गर्भगृह, गुंबजों तथा धर्मशाला एवं कमरे की पेंटिंग के काम में लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि शमीम करीब दो दशक से मंदिर का पेंटिंग का काम कर रहे हैं। हिन्दू मंदिर में मुसलमान पेंटर की सेवा लिए जाने की बात पर श्री शास्त्री ने बताया कि कर्म का कोई मजहब नही होता है। यदि एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के प्रति आस्था रखते हैं तो यह बहुत अच्छी बात है। भारतीय समाज में यह कोई नई बात नहीं है।
लुधियाना के कारखाने में मजदूरी करने वाले शमीम अहमद के चचेरे भाई मुर्तुजा अली ने बताया कि कारीगर का कोई धर्म नही होता है। शमीम केवल अपना काम करता है जिसके लिये उसे पैसे दिये जाते हैं। मंदिर हो या फिर मस्जिद या दोनों जगह सभी धर्म के लोग काम करते हैं। शमीम मंदिर में भक्ति भाव से पेंटिग करता है यह अच्छी बात है। गौरतलब है कि सोनपुर के हरिहर नाथ मंदिर में हरि (विष्णु) और हर (महादेव) की मूर्तियों की पेंटिंग के बाद ही इनकी पूजा अर्चना शुरू होती है। सोनपुर की इस धरती पर हरिहरनाथ मन्दिर दुनिया के अकेला ऐसा मन्दिर है जहां हरि (विष्णु ) तथा हर (शिव) की एकीकृत मूर्ति है।

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