विशेष : कालाधन पर सबसे पहले ‘चाणक्य‘ ने किया था हमला - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

विशेष : कालाधन पर सबसे पहले ‘चाणक्य‘ ने किया था हमला

शिक्षा की बगिया बनारस हिन्दू विश्व विद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय सांस्कृतिक समारोह में ‘चाणक्य नाटक‘ का मंचन करने पहुंचे प्रख्यात अभिनेता एवं टीवी धारावाहिक मनोज जोशी ने महिरभूता की सधी हुई पटकथा और समकालीन समृद्ध हिंदी के संवादों से दर्शकों को बार-बार तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। नाटक में निर्देशक व प्रसिद्ध रंगकर्मी मनोज जोशी ने शानदार अभिनय किया। नाटक में व्यंग्यात्मक तरीके से किए गए व्यंग्य ने भी दर्शकों को खूब गुदगुदाया 




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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समक्ष ‘चाणक्य नाटक‘ का मंचन कर रहे विश्व विख्यात कलाकार मनोज जोशी के नाटक में जहां सत्ता लोभी राज सत्ता के खिलाफ चाणक्य के नेतृत्व में आम आदमी का विद्रोह देखने को मिला वहीं राज प्रासादों के अंदर के सत्ता षड्यंत्रों का भी बखूबी मंचन किया गया। चाटुकारों से घिरे चंद्रगुप्त मौर्य के बड़े भाई व मगध नरेश हिरण्य गुप्त (धनानंद) की खलनायक वाली भूमिका को भी दर्शकों के खूब तुत्फ उठाया। तो राज सत्ता में राजाओं को षड्यंत्रों में उलझाने वाले विदूषक का अभिनय के जरिए कलाकारों ने अपना लोहा मनवाया। संवादों में जहां चाणक्य के सूक्ति वाक्यों का बखूबी प्रयोग कर दर्शकों को राजनीति, कूटनीति व धर्म नीति की सीख दी गई, वहीं युद्ध नीति के गुण दोषों पर भी पटकथा लेखक ने बखूबी प्रकाश डाला। मगध नरेश की राजसभा में अपमानित चाणक्य की शिखा फैलाकर भारत को एकात्म अखंड बनाकर मगध के सिंहासन पर चंद्रगुप्त को बैठाने की प्रतिज्ञा के दृश्य में मनोज जोशी की सशक्त संवाद अदायगी ने पूरे परिसर को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया। इस दौरान कलाकार मनोज जोशी ने नाटक के जरिए बताया कि चाणक्य ने आज से 2400 साल पहले ही कालाधन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नक्सलवाद पर प्रहार किया था और इसके कूटनीतिक रास्ते भी बताये थे। 

ढ़ाई घंटे के शो में संदेश दिया गया कि कैसे प्राचीन तक्षशिला जो शिक्षा के प्रचार और प्रसार का एक अभिन्न हिस्सा था, उसी तक्षशिला से अब भारत ही क्या पूरी दुनिया में आतंक फैलाया जा रहा है। तब के वाइस चांसलर चाणक्य ने चंद्रगुप्त का कैसे इस्तेमाल किया, पूरे भारत को एकजुट करने के लिए। ‘चाणक्य के मंचन‘ के बाद सीनियर रिपोर्टर सुरेश गांधी से बातचीत के दौरान मनोज जोशी ने कहा, चाणक्य नाटक का मंचन उनके जीवन के लिए एक मिशन है ताकि इस नीति को देशवासी अपनाएं और हर क्षेत्र में उनकी बुलंदियों का परचम फहराएं। चाणक्य ने जिस दूरदर्शिता के साथ नीति की रचना की है, उसकी उनके युग में भी जरूरत थी और आज भी है। श्री जोशी ने हमें वर्षो से चली आ रही आदत बदलनी होगी। जीएसटी से टैक्स में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि चाणक्य ने कभी जातिवादी व्यवस्था को नहीं माना और दास पुत्र को राजा बना दिया। सामान्य घर के व्यक्ति में भी अगर पराक्रम, बुद्धि, विवेक है तो उसे राजा बनना चाहिए। शायद यही वजह है कि आज देश के पीएम सामान्य घर के हैं। सिकंदर-पोरस के बीच युद्ध में रात को हमला करने के सुझाव का जिक्र के दौरान चाणक्य के संवाद का हवाला दिया- ‘कहा, इस समय सर्वाधिक महत्व राष्ट्र धर्म का है। धर्म, राष्ट्र-समाज की उन्नति के लिए होता है। धर्म अगर समाज की उन्नति में बाधक है तो त्याज्य है।’ यह उक्ति आज सर्वाधिक प्रासंगिक है। कहा, राजनीति हो या अन्य कार्य, व्यक्ति यदि सुनीति पर अड़ा रहे तो उसे सफलता जरूर मिलती है। 

अभिनेता मनोज जोशी ने कहा कि रंगमंच मेरी मां है, उसे में कभी नहीं छोड़ सकता। मैं कभी अभिनय के साथ अन्याय नहीं करता, बल्कि उसके रंग में रंग जाता हूं। यही वजह है कि चाणक्य जैसा गंभीर व्यक्ति का भी किरदार निभाता हूं और फिल्मों में कॉमेडियन का भी। वैसे भी कोई रोल ऐसा नहीं जो किया न हो। अधिकांश फिल्म स्टारों के साथ कार्य कर चुके हैं। बताया कि बचपन से ही थियेटर कर रहे हैं। स्कूलों में अभिनय करने का शौक रहा और साथ ही चित्रकारी का भी शौक रहा और उस पर बहुत काम भी किया। मनोज जोशी कहते हैं कि सिकंदर भी झेलम पार कर आया था जिसे शिकस्त मिली थी और उरी में भी आतंकवादी झेलम पार कर घुसे। यानि पूरा शो राष्ट्रवाद और आतंकवाद के खिलाफ होगा। चंद्रगुप्त व धनानंद के बीच के कलह पर बोले गए संवाद, बंधुओं का परस्पर विरोध संपूर्ण वंश का ध्वंस कर देता है, संत से शत्रुता और योद्धा से मित्रता के परिणाम भयंकर होते हैं, किसी सूक्ति वाक्य से कम नहीं थे। चाणक्य नीति में वर्ण भेद है जिसे कर्मानुसार व्यवस्था के रूप में दिया गया है। जातिवाद को बढ़ावा वोट बैंक की राजनीति से मिला है। मनोज ने कहा कि हाल में संसद का पूरा सत्र खराब हुआ। सत्ता और विपक्ष को राष्ट्र के बारे में सोचना चाहिए था। कितने करोड़ रुपये यूं ही बर्बाद हो गये और सत्र का कोई लाभ नहीं मिला। उन्होंने नोटबंदी के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि यह फैसला आने समय में फायदेमंद होगा। इससे रुपया मजबूत होगा और विकास के लिए पैसे भी मिलेंगे। मनोज जोशी ने नाटकों के प्रति घट रहे रुझान पर कहा कि मै ऐसा नहीं मानता हूं। नाटक से आज भी नए लोग जुड़ रहे हैं लेकिन उन्हें बेहतर गाइडेंस नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आज तो हिन्दी पढ़ाने के लिए भी ट्यूशन लगाया जाता है। उन्होंने भाषा, कला, संस्कृति को रीढ़ की हड्डी बताया। कहा हमें अपनी भाषा के प्रति गर्व करना होगा, तभी बात बनेगी। चाणक्य नाटक का मंचन बनारस में पहली बार हुआ हैं। यह नाटक की 1001वीं प्रस्तुति है। 1990 में पहली बार गुजराती में इसका मंचन मुम्बई में हुआ था। हिन्दी में 1995-96 से लगातार मंचन चल रहा है। नाटक का मंचन संसद भवन में भी हो चुका है। मनोज जोशी इस नाटक के निर्माता-निर्देशक और अभिनेता हैं। इसे मिहिर हुता ने लिखा है। 





(सुरेश गांधी)

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