- भाजपा/संघ की मनुवादी नीति समर्थक जनप्रतिनिधियों का हो विरोध!
मोहाली के एडवोकेट हरबिंदरसिंह वैदवान ने बाकायदा याचिका दायर करके पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से आरएसएस पर प्रतिबन्ध लगाने की साहसिक मांग की है। इसके लिये देशभर में सेवारत हक रक्षक दल सामाजिक संगठन के लाखों सदस्यों एवं समर्थकों की ओर से समर्थन, साधुवाद और हर प्रकार के सहयोग का खुला आश्वासन। कानून के जानकार और एक जिम्मेदार नागरिक एडवोकेट श्री वैदवान ने अपनी याचिका में कहा है कि लिब्राहन आयोग ने अयोध्या मामले में दी अपनी रिपोर्ट में आरएसएस को गैर संवैधानिक संगठन करार दिया था। लेकिन केन्द्र सरकार ने लगातार इस रिपोर्ट की अनदेखी की है। याचिका में कहा गया है कि सभी लोगों को अपने-अपने धर्म को प्रचारित करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन किसी और धर्म के मर्दन की भावना रखने को संविधान अनुमति नहींं देता है। जबकि आरएसएस हिन्दू धर्म के अलावा अन्य सभी धर्मों का मर्दन करना चाहता है। मूल रूप से आरएसएस मनुस्मृति का अनुसरण करता है और मनुस्मृति वर्ण व्यवस्था का समर्थन करती है। ऐसे में इस संगठन को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर इसे और इससे संबंधित सभी संगठनों को बैन किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने याचिका का अध्ययन करने के बहाने इसकी सुनवाई अगले साल 17 जनवरी तक के लिये टाल दी है। इन हालतों में आज 25 दिसम्बर, 2016 को "मनुस्मृति दहन दिवस" के अवसर पर हम भारत के 90 फीसदी वंचित वर्गीय लोग क्या—
1. हमारे विधायकों और सांसदों से यह सवाल नहीं पूछ सकते कि मनुस्मृति की आड़ में मानव—मानव में अमानवीय और असंवैधानिक विभेद को बढावा देने को दृढप्रतिज्ञ आरएसएस के रिमोट कण्ट्रोल से संचालित भाजपा की किस नीति के कारण उनको भाजपा और भाजपा का मनुवादी चरित्र प्रिय है?
2. संघ की शाखाओं में जाने वाले वंचित वर्ग के लोगों से क्या हमें यह सवाल पूछने का हक नहीं कि वे मानवता विरोधी मनुस्मृति समर्थक संघ को क्यों मजबूती प्रदान कर रहे हैं।
3. संघ के आरक्षण विरोधी ऐजेंडे को समर्थन प्रदान करके आर्थिक आधार पर आरक्षण प्रदान करने का मसर्थन करने वाले वंचित वर्गीय नेताओं से क्या हमे यह जानने का हक नहीं कि संविधान की शपथ लेकर संविधान विरोधी मांग करने का उनको किसने अधिकार दिया?
वर्तमान दौर में भाजपा के टिकिट पर निर्वाचित वंचित वर्ग के वर्तमान सांसद और विधायक यदि भाजपा और संघ की सामाजिक न्याय विनाशक मनुवादी नीति के विरुद्ध चुप्पी साधे रहते हैं तो हम वंचित वर्ग के आम लोगों को सार्वजनिक रूप से इनका बहिष्कार करने की हिम्मत जुटानी होगी और हर आम-ओ-खाश तथा विशेष रूप से युवा वर्ग को साथ लेकर—
1. इनका सार्वजनिक रूप से विरोध करना होगा।
2. इनके प्रति खुला आक्रोश व्यक्त करना होगा।
3. इनको इनकी गलती का अहसास करवाना होगा।
अन्यथा 25 दिसम्बर को मनुस्मृति दहन दिवस मनाने की औपचारिकता पूरी करने और बाबा भीम की जय बोलने का हमें कोई नैतिक हक नहीं है।
(लेखक : डॉ. पुरुषोत्त्म मीणा 'निरंकुश')

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