अखिलेश को निकालने का ‘मुलायम’ ने लिया ‘कठोर’ फैसला - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 30 दिसंबर 2016

अखिलेश को निकालने का ‘मुलायम’ ने लिया ‘कठोर’ फैसला

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लखनऊ 30 दिसम्बर, समाजवादी पार्टी (सपा) से मुख्यमंत्री और अपने पुत्र अखिलेश यादव को छह वर्ष के लिए निष्कासित कर ‘मुलायम सिंह यादव’ ने आज भारी मन से ‘कठोर’ निर्णय ले लिया। सपा अध्यक्ष ने महासचिव राम गोपाल यादव को भी छह वर्ष के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। मुख्यमंत्री के सपा से निष्कासन के बाद राज्य में संवैधानिक संकट जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि अखिलेश यादव जिस पार्टी के विधानमण्डल दल के नेता हैं, उसी से निकाल दिये गये हैं। उधर, राज्यपाल राम नाईक ने ‘यूनीवार्ता’ से फोन पर कहा, “मैं स्थिति पर पूरी नजर रख रहा हूं। सपा का अन्दरुनी मामला है। अभी संवैधानिक संकट जैसी स्थिति नहीं पैदा हुई है।” मुख्यमंत्री के सपा से निष्कासन के बाद उनसे मिलने जाने वाले विधायकों और मंत्रियों की संख्या देखते हुए यह कहा जाने लगा है कि पार्टी का अब दो फाड़ होना तय है। दूसरी आेर विधि विशेषज्ञों के अनुसार पार्टी जब तक अखिलेश यादव को विधानमण्डल दल के नेता पद से नहीं हटाती तब तक किसी तरह के संवैधानिक संकट की गुंजाइश नहीं है। राज्य विधानसभा में सपा के विधायकों की संख्या 229 है। बहुमत के लिए सदन के कुल 404 सदस्यों में से 203 का समर्थन जरुरी है। अब सवाल यह भी उठता है कि क्या किसी पार्टी से निष्कासित मुख्यमंत्री उसी पार्टी के विधानमण्डल दल का नेता बने रह सकता है। अखिलेश यादव के कुछ निर्णयों से क्षुब्ध चल रहे सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव की मुख्यमंत्री द्वारा उम्मीदवारों की अपनी सूची जारी कर देने से विवाद और बढ गया। पार्टी अध्यक्ष ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र में दखल माना और अनुशासनहीनता के आरोप में अखिलेश यादव को छह वर्ष के लिए पार्टी से निकालने का फैसला कर लिया। 

दूसरी ओर, स्थिति पर विचार विमर्श करने के लिए दोनो खेमों ने कल अलग-अलग बैठक बुला ली है। मुलायम सिंह यादव ने घोषित सभी 393 उम्मीदवारों को कल यहां साढे दस बजे बुलाया है जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने सरकारी आवास पर सुबह साढे नौ बजे विधायकों से मिलेंगे। इससे पहले पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव द्वारा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा महासचिव को अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके तत्काल बाद अखिलेश यादव के खेमे ने एक जनवरी को पूर्वाह्न 11 बजे पार्टी की राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाया लिया। सपा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को नोटिस देकर यह पूछा था कि विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवारों की सूची उन्होंने किस अधिकार से जारी की है क्योंकि यह अधिकार पार्टी अध्यक्ष का होता है जबकि प्रो0 राम गोपाल यादव को मीडिया में बयान देने की वजह से कारण बताओ नोटिस थमायी गयी है। टिकट बंटवारे को लेकर यादव परिवार में बढी रार के हल के लिए मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच कई दौर की बैठकेें हुईं। मुलायम सिंह यादव ने प्रो0 राम गोपाल यादव द्वारा बुलाये गये राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन को असंवैधानिक करार देते हुए कार्यकर्ताओं और नेताओं से उसमें नहीं आने की अपील की। 

अपनी स्थापना के बाद से सर्वाधिक संक्रमण काल से गुजर रही सपा के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव प्रो0 राम गोपाल यादव पर काफी नाराज दिखे। उन्होंने राम गोपाल यादव पर अखिलेश यादव के भविष्य को खत्म करने का आरोप तक लगा डाला। उनका कहना था कि राष्ट्रीय प्रतिनिधि सम्मेलन अध्यक्ष ही बुला सकता है। भारी मन से अपने बेटे को पार्टी से निष्कासित करने के बाद उन्होंने कहा, “मैंने अखिलेश को सीएम बनाया। दूसरे को सीएम कौन बनाता है। मैंने अपनी कुर्सी दे दी लेकिन राम गोपाल के साथ इसने अपना भविष्य खत्म कर दिया। वह कुछ समझ ही नहीं पा रहा।” उधर, प्रो0 राम गोपाल यादव ने अपने और मुख्यमंत्री के पार्टी से निष्कासन को गलत करार दिया और कहा कि सही तथ्यों के आधार पर कार्रवाई नहीं हुई है। उनका कहना था कि शीर्ष स्तर पर बैठे नेता जब अपना काम सही ढंग से न करें तो आपात स्थिति में प्रतिनिधि सम्मेलन बुलाना ही पड़ता है। मुख्यमंत्री के पार्टी से निष्कासन के बाद अखिलेश यादव के सरकारी आवास पर उनके समर्थकों की भीड़ इकट्ठा हो गयी। निष्कासन के खिलाफ दो समर्थकों ने आत्मदाह करने की भी कोशिश की। सैकड़ों की संख्या में जुटे अखिलेश समर्थकों ने सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कुछ ने मुलायम सिंह यादव को भी नहीं बख्शा। मुलायम सिंह यादव के खिलाफ भी खूब हो हल्ला मचाया। दूसरी ओर, शिवपाल समर्थकों ने कहा कि पार्टी में नेताजी सर्वोपरि हैं उनका निर्णय सभी को मानना ही पड़ेगा। मुलायम सिंह यादव ने कड़े संघर्ष के बाद पार्टी खडी की है। अनुशासनहीनता करने वालों के कार्रवाई होनी ही चाहिए। शिवपाल समर्थक अखिलेश यादव के बजाय राम गोपाल यादव पर ज्यादा नाराज दिखे। उनका कहना था कि प्रो़ राम गोपाल जब-जब लखनऊ आते हैं इस तरह का बखेड़ा खड़ा ही हो जाता है। इस राजनीतिक गहमगहमी को देखते हुए पूरे सूबे में हाई अलर्ट कर दिया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) दलजीत चौधरी ने कहा कि राजनीतिक हालात को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सतर्क रहने के निर्देश दिये गये हैं। किसी भी घटना के आशंका के मद्देनजर राजभवन, मुख्यमंत्री आवास, मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव के आवास के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात कर दिये गये। इनमें से कुछ स्थानों पर कमाण्डों भी तैनात देखे गये। 

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