फिल्म फेयर अवार्ड नोमिनेशन में शामिल हुई ‘तुरूप चाल’, - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

फिल्म फेयर अवार्ड नोमिनेशन में शामिल हुई ‘तुरूप चाल’,

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फिल्म बनाना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन जैसे ही उसकी लागत की बात आती है, लोगों के पसीने छूटने लगते हैं। लेकिन, एक फिल्म ऐसी भी है जो सिर्फ पांच हजार रुपए में बनकर तैयार हुई है। हम बात कर रहे हैं शॉर्ट फिल्म ‘तुरूप चाल’ के बारे में। यह फिल्म कैसी है इसका पता तो देखने के बाद चलेगा, लेकिन अपनी खासियत के कारण इस फिल्म ने जियो फिल्मफेयर शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल के फाइनल में शामिल 44 फिल्मों में जगह बना लिया है। जियो फिल्मफेयर शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में ‘तुरूप चाल’ के अलावा मनोज बाजपेई, टिस्का चोपड़ा, आलोक नाथ, दीपक डोबरियाल, स्वानंद किरकिरे, आदिल हुसैन और राधिका आप्टे जैसे प्रतिष्ठित अभिनेताओं की भी फिल्में शामिल हैं। ‘तुरूप चाल’ इस लिए भी खास हो जाती हैं, क्योंकि इसे मात्र 5 हजार रूपए के बजट में साधारण से कैमरे से शूट किया गया है। इस फिल्म को अब तक एक लाख 72 हजार व्यूज मिल चुके हैं। व्यूज के मामले में पहले नंबर पर सनी लियोनी, आलोक नाथ और दीपक डोबरियाल की फिल्म ‘11 मिनिट’ चल रही है।

‘तुरूप चाल’ को लेकर इस फिल्म के निर्देशक सुमित कुमार कहते हैं कि हमारी फिल्म सीमित बजट में तैयार हुई है। वो बताते हैं कि ‘इसे उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बनाया है। महज 15 दिन में पूरी फिल्म बनकर तैयार हुई है। इस फिल्म में केवल 5 किरदार हैं।   फिल्म का निर्देशन सुमित कुमार ने किया है और फिल्म न्यू प्रोपेगेंडा मोशन पिक्चर के बैनर तले बनी है और व्यूज के मामले में दूसरी पोजीशन पर पहुंच चुकी है। फिल्म के मुख्य किरदार में अनूप गोसांई,विजय श्रीवास्तव,जसपाल शर्मा,सुशील हैं। फिल्म के एसोसिएट निदेशक - सुमित गुलाटी, और फोटाग्राफी किशोर रावत है। 

क्या है इस फिल्म की कहानी
तुरूप चाल की कहानी एक कॉमन मैन लक्ष्य, एक फायनेंसर श्याम और पुलिसवाले यादव के इर्द-गिर्द घूमती है। एक आदमी जो ईमानदारी से जीना चाहता है, लेकिन परिस्थितियां उसके खिलाफ हैं। लक्ष्य घर से अपने लोन की रकम चुकाने निकलता है और जब फायनेंसर श्याम के पास पंहुचता है तब तक उसके पैसे चोरी हो जाते हैं। इसके बाद इस कहानी में एक पुलिसवाले यादव की एंट्री होती है। फायनेंसर और पुलिसवाला उसे जलील करते हैं। एक सीन में नकली रसीद लेने के सवाल पर कॉमन मैन लक्ष्य कहता है- ‘पक्की लेता तो दस फीसदी देना पड़ता और ...क्या सारे देशभक्ति की जिम्मेदारी मेरी ही है?’ ऐसे सवाल आम आदमी के जेहन में अक्सर आ ही जाते हैं? फिल्म एक अनएक्सपेक्टेड क्लाइमैक्स के साथ खत्म होती है। 

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