पर्रिकर बयान देते समय सावधानी बरतें: चुनाव आयोग - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2017

पर्रिकर बयान देते समय सावधानी बरतें: चुनाव आयोग

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नयी दिल्ली,16 फरवरी, चुनाव आयोग ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर द्वारा गोवा में दिये गये बयान को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना है और उन्हें भविष्य में बयान देते समय सावधानी बरतने की हिदायत दी है। आयोग ने आज श्री पर्रिकर को लिखे गये पत्र में यह हिदायत दी। गौरतलब है कि आयोग ने श्री पर्रिकर को इस संबंध में नोटिस जारी किया था और श्री पर्रिकर ने अपने वकील जय अनन्त देहदराय के माध्यम से तीन फरवरी को इसका जवाब दिया था। श्री देहदराय ने आयोग को लिखे जवाब में कहा था कि श्री पर्रिकर के बयान की सीडी कोंकणी भाषा में है और उसकी ट्रांस्क्रिप्ट,जो श्री पर्रिकर को भेजी गयी है, वह गलत है और ऐसा जान पड़ता है कि उसमें जानबूझकर छेड़छाड़ की गयी है और उसका गलत अनुवाद किया गया है। आयोग ने वकील के जवाब को देखते हुए मामले की छानबीन की और ट्रांस्क्रिप्ट की सत्यता का पता लगाया। उत्तरी गोवा के जिला चुनाव अधिकारी से प्राप्त सूचना के अनुसार सीडी में किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की गयी है। सीडी में श्री पर्रिकर के भाषण को फिर ट्रांसक्राइब किया गया और तीन सदस्यीय समिति द्वारा उस भाषण का अनुवाद भी किया गया एवं इसकी जानकारी आयोग ने सात फरवरी को अपने पत्र के माध्यम से श्री पर्रिकर को दी थी। श्री पर्रिकर ने आयोग से अनुरोध किया था कि आयोग उनकी उपस्थिति और तीन सदस्यीय समिति की उपस्थिति में इस सीडी को फिर से सुने और उस बैठक में अच्छी तरह कोंकणी भाषा समझनेवाला एक व्यक्ति भी मौजूद रहे, जो यह समझाये कि श्री पर्रिकर ने जो बयान दिया था, उसका सही अर्थ क्या था। आयोग ने श्री पर्रिकर के अनुरोध को देखते हुए उनके पूरे भाषण को एक ऐसे व्यक्ति द्वारा ट्रांस्क्रिप्ट कराया,जो कोंकणी भाषा का विशेषज्ञ था। आयोग ने इस मामले का अध्ययन किया और पाया कि श्री पर्रिकर ने यह कहा था-आप दो हजार रुपये किसी से लेकर वोट कीजिए। यह सामान्य बात है। कोई रैली भी निकालेगा,इसमें भी कोई आपत्ति नहीं लेकिन अगर कोई पांच सौ रुपया लेकर वहां आता है तो आपको इस बात का खयाल रखना चाहिए कि वोट केवल कमल छाप को ही मिले।” आयोग तीन सदस्यीय समिति और कोंकणी के विशेषज्ञ द्वारा किये गये अनुवाद का अध्ययन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इस तरह की कोई गलती नहीं है। आयोग ने यह पाया कि श्री पर्रिकर का बयान आदर्श आचार संहिता उल्लंघन है। आयोग ने कहा है कि ऊंचे संवैधानिक पदों पर कार्यरत सभी नेताओं से यह अपेक्षा की जाती है कि वे चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को बनाये रखें। ऐसे व्यक्तियों द्वारा जनता में दिये गये बयान से अगर यह संकेत मिलता है कि वे मतदाताओं द्वारा रिश्वत देने की बात कह रहे हैं तो इसे भ्रष्ट आचरण माना जाएगा। यह देखते हुए आयोग श्री पर्रिकर को हिदायत देता है कि वे भविष्य में बयान देते समय अपनी सीमा में रहें और सावधानी बरतें।

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