स्कूली छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति बंद कर शिक्षक को वेतन का विरोध - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

स्कूली छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति बंद कर शिक्षक को वेतन का विरोध

bkmu-oppose-biharपटना, 06 फरवरी। भारतीय खेत मजदूर यूनियन की बिहार राज्य इकाई के अध्यक्ष रामनरेष पाण्डेय, पूर्व विधायक एवं महासचिव जानकी पासवान ने एक बयान जारी कर राज्य सरकार द्वारा स्कूली छात्र-छात्राओं की दी जानेवाली छात्रवृत्ति बंद कर उसकी राषि षिक्षकों के वेतन पर खरचने के निर्णय की तीव्र निन्दा करते हुए कहा कि इससे गरीब परिवार, खासकर अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्चे-बच्चियों पर सर्वाधिक बुरा प्रभाव पड़ेगा। सरकार का यह दावा कि चूंकि 12वीं के बाद पढ़ाई जारी रखने वास्ते सभी छात्रों को स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत चार लाख रूपये का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इसलिए छात्रवृत्ति जारी रखना गैर जरूरी है, सरासर जिम्मेवारी से भागने वाला है क्योंकि जब गरीब, दलित पिछड़े व अति पिछडे़ समूहों के बच्चें छात्रवृत्ति के अभाव में स्कूली षिक्षा-प्राथमिक से बारहवीं तक ही पूरी करने में असमर्थ हो जाएंगे तो स्टुडंेट क्रेडिटकार्ड उनके लिए सपना ही रह जाएगा। फिर छात्रवृत्ति को षिक्षा ऋण के साथ जोड़ना कहाँ की समझदारी है?


स्मरणीय है कि वर्ष 2013 में कक्षा एक से दस तक की छात्राओं और एस.सी, एस-टी-पिछड़े-अतिपिछडे़ छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू की गयी जिसकी घोषणा स्वयं मुख्यमंत्री नीतीष कुमार ने स्वाधीनता दिवस के मौके पर 15 अगस्त, 2013 को की थी। 2014 में सामान्य कोटि के डेढ़ लाख रू॰ से कम आमदनी वाले परिवारों के छात्रों के लिए भी इस योजना को विस्तारित कर दिया गया जिसके तहत कक्षा एक से चार तक के छात्रों को प्रतिमाह 50 रू॰, कक्षा 5-6 के बच्चों के लिए 100 रू॰ प्रतिमाह, कक्षा 7 से 10  तक बच्चों को 150 रू॰ प्रतिमाह छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गयी थी। अब इसे स्थगित करते हुए उस मद की राषि षिक्षा विभाग को लौटाने का निर्देष अनुसूचित जाति/ जनजाति विभाग और पिछड़ा - अति पिछड़ा कल्याण विभाग को मुख्य सचिव की ओर से दिया गया है। भारतीय खेत मजदूर यूनियन के नेताद्वय ने कहा कि यह कितना हास्यास्पद है कि छात्रवृत्ति और षिक्षा ऋण का घालमेल कर गरीबों के बच्चों से षिक्षा के अवसर छिने जा रहे हैं जो दसवीं तक पहुंचने के बीच में ही ड्राप-आउट हो जाएगा, वह तो षिक्षा ऋण का दावेदार भी नहीं हो सकेगा। दलितों को इससे सर्वाधिक नुकसान होगा क्योंकि उच्च षिक्षा के लिए उन्हें दी जानेवाली छात्रवृत्ति पहले ही समाप्त की जा चुकी है जिसका बड़े पैमाने पर प्रतिरोध भी हुआ, परंतु सरकार ने कान में तेल डालकर उनकी अनसुनी कर दी और एवज में षिक्षा ऋण का ‘नायाब तोहफा’ थम्हा दिया।  सर्व श्री पांडेय और पासवान ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वे स्कूली षिक्षा से दलित, पिछड़े, अति पिछडे़, के साथ-साथ कमजोर पृष्ठ भूमि के सामान्य कोटि के बच्चे-बच्चियों को वंचित करनेे वाले इस आदेष को वापस कराएं और नौनिहालों के भविष्य को सुरक्षित करें, षिक्षा की रोषनी और उससे जुड़े रोजगार एवं जीवन के अवसरों को उनके लिए सिमटने से रोकें। 

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