पटना, 16 फरवरी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रदेश के प्रत्येक गांव को सड़कों के महाजाल से जोड़ने का संकल्प दुहराते हुए आज कहा कि उनकी सरकार ने 250 से 499 की आबादी वाले बसवाटों तक गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण को लेकर ऋण के लिए न्यू ब्रिक्स बैंक में आवेदन किया है। श्री कुमार ने आज यहां ग्रामीण कार्य विभाग के 1571.65 करोड़ के 947 पथों एवं 38 पुलों का शिलान्यास, 895.72 करोड़ रूपये के 554 पथों एवं 42 पुलियों का कार्यारंभ एवं 2305.73 करोड़ रूपये के 2325 पथों एवं 36 पुलों का रिमोट से उद्घाटन करने के बाद आयोजित समारोह को संबोधित करते हुये कहा , “ 250 से 499 की आबादी वाले बसवाटों तक मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना के तहत सड़क निर्माण के लिए ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक में आवेदन दिया गया है। अभी ब्रिक्स बैंक द्वारा उसपर निर्णय नहीं हुआ है लेकिन हमलोगों ने अपनी ओर से सारी औपचारिकतायें पूरी कर ली है । ग्रामीण कार्य विभाग योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए सक्षम है तो हमने 2007-08 के करीब ग्रामीण कार्य विभाग के द्वारा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का कार्य प्रारंभ किया।” मुख्यमंत्री ने राज्य में कृषि की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साल 2011 के जनगणना रिपोर्ट के मुताबिक करीब 89 प्रतिशत लोग गांव में निवास करते हैं और जो गांव में निवास करते हैं उनका मुख्य कार्य खेती से जुड़ा हुआ है। राज्य में अभी भी 76 प्रतिशत लोग आजीविका के लिये कृषि पर आधारित हैं। सड़क सम्पर्कता प्रदान करने का सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि अब गांव के अन्दर विभिन्न जगहों पर अलग-अलग फसलों का उत्पादन लोग कर रहे हैं। उन्हें सम्पर्कता मिल गयी है और वे अपने फसल की बाजार कीमत प्राप्त कर सकते हैं।
श्री कुमार ने राज्य की मिट्टी को उपजाऊ बताया और कहा कि कुछ पहाड़ी इलाकों को यदि छोड़ दिया जाये तो बाकी जितने इलाके हैं उन सभी इलाकों की उर्वरा शक्ति बहुत है और किसी भी चीज की खेती कर सकते हैं। चाहे वो अन्न की खेती हो, दलहन हो, तेलहन हो, सब्जी हो या फल हो। इन सब चीजों को उपजा सकते हैं। लेकिन इसका लाभ लोग नहीं उठा पाते थे। क्योंकि अगर कोई खेती करें और उसकी जो भी उपज हुयी उसकों ले जाने के लिये आवागमन का साधन नहीं हो तो वैसी स्थिति में जो आवागमन का खर्च था वही इतना ज्यादा था कि फिर उन्हें उसकी कीमत नहीं मिल पाती थी। मुख्यमंत्री ने कहा , “ हमारी सरकार ने सड़कों के निर्माण पर प्रारंभ से ही जोर दिया है। जो बड़ी सड़कें हैं वे पथ निर्माण विभाग के अधीन हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें ग्रामीण कार्य विभाग के अधीन हैं। प्रारंभ से ही हमलोगों ने यह कोशिश की है कि हर गांव को पक्की सड़क से सम्पर्कता प्रदान कर दें ताकि लोगों को आवागमन की सुविधा मिल जाये” श्री कुमार ने कहा कि साल 2007-08 के करीब ग्रामीण कार्य विभाग के द्वारा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना का कार्य प्रारंभ किया। तत्कालीन सरकार ने उसी समय निर्णय लिया कि जो 500 आबादी तक के गांव है उनको भी जोड़ा जाना चाहिए। राज्य सरकार ने एक अपनी योजना बनायी ‘मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना’ और उसमें तय किया कि जो 500 से 999 आबादी वाले बसावट है उनको इस योजना के अंतर्गत सड़क सम्पर्कता प्रदान की जायेगी ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई तकनीक के उपयोग से सड़क निर्माण में सरकार की लागत करीब 30 प्रतिशत तक घट गयी है। यदि एक किलो मीटर सड़क बनाने में सीमेंट, कंक्रीट का अनावश्यक इस्तेमाल कर रहे हैं और टेक्नोलाॅजी के जरिये उसकी मात्रा घट जाये और उसकी मजबूती उसी प्रकार बनी रहे तो इस तरह की टेक्नोलाॅजी को अपनाने की जरूरत है। श्री कुमार ने कहा कि प्रदेश की सरकार 100 तक की आबादी वाले हर बसावट को पक्की सड़क से जोड़ना चाहती हैं। सात निश्चय के अन्तर्गत हर घर तक पक्की गली और नाली का निर्माण करना चाहते हैं। जब गाॅव में पक्की गली बनने लगती है और ड्रेनेज और नाली का निर्माण होता है तो गांव के लोगों की खुशी देखने लायक होती है और उनको यदि नल का पानी मिल जाय पीने के लिये, बिजली मिल जाये तो वे शहर की तरफ क्यों देखेंगे। गांव के अंदर योजनाओं के क्रियान्वयन का सकारात्मक प्रभाव है।
इस मौके पर राज्य के ग्रामीण कार्य मंत्री शैलेश कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता अनिल कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारी एवं ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंतागण उपस्थित थे।

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