पटना 16 फरवरी, पटना उच्च न्यायालय ने कृषि समन्वयक के लगभग चार हजार पदों पर बहाली के लिये बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) के प्रकाशित किये गये परीक्षा परिणाम के आधार पर नियुक्ति किये जाने पर आज रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति रविरंजन ने यहां इस मामले में राजीव नयन एवं अन्य की ओर से दायर किये गये याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया है । याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि कृषि समन्वयक की चयन प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन और आरक्षण के प्रावधान का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है । कई ऐसे अम्यर्थियों को भी चयनित किया गया है जिनकी उम्र तय सीमा से काफी अधिक है । इसके साथ ही कई तरह की अनियमितताएं भी हुयी हैं ।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना था लेकिन इसके बावजूद उन्हें यह लाभ दिया गया । पूर्व से जो कृषि समन्वयक के पद पर कार्य कर रहे थे उन्हें अनुभव के आधार पर अतिरिक्त अंक देना था लेकिन दूसरे पदों पर कार्य करने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अंक दिये गये जो निमय के विरूद्ध है । याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को सूचित किया कि छह दिसम्बर 2016 को जब परिणाम घोषित किया गया था उस समय बीएसएससी के सचिव परमेश्वर राम थे । श्री राम के कार्यकलाप से कृषि समन्वयक की चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की आशंका प्रबल हो गयी है इसलिये इस परीक्षा के परिणाम को रद्द कर नये सिरे से चयन प्रक्रिया शुरू की जाये । न्यायमूर्ति रविरंजन ने याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद घोषित परिणाम के आधार पर नियुक्ति किये जाने पर रोक लगा दी ।इस मामले में अगली सुनवाई के लिये 23 फरवरी की तिथि तय की गयी है । उल्लेखनीय है कि बीएसएससी के तत्कालीन सचिव परमेश्वर राम को हाल ही में इंटर स्तर के पदों पर बहाली के लिये हुयी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक कांड के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है । श्री राम के साथ उनके कई नजदीकी भी इस मामले में जेल में हैं ।

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