राजकीय जनजातीय हिजला मेला में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से दर्शकों की भरपूर तालियाँ बटोरी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017

राजकीय जनजातीय हिजला मेला में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं से दर्शकों की भरपूर तालियाँ बटोरी

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अमरेन्द्र सुमन (दुमका), उप राजधानी दुमका के प्रसिद्ध मयूराक्षी नदी तट पर पिछले 10 फरवरी 2017 से अपने यौवन के चरमोत्कर्ष पर पहुँच चुका राजकीय जनजातीय हिजला मेला महोत्सव के भीतरी कला मंच पर दिन गुरुवार (16 फरवरी 2017) को एस पी महाविद्यालय, दुमका के सेवानिवृत्त हिन्दी शिक्षक डा0 रामवरण चैधरी की अध्यक्षता में आहुत कवि गोष्ठि का आयोजन कई मायनों में इस क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक सरोकार व जनजीवन को एक नया आयाम देने में सफल रहा। इस अवसर पर हिन्दी, संताली, अंगिका, बंग्ला व भेाजपुरी भाषा-भाषियों ने जहाँ एक ओर अपने-अपने गीतों, गजलों व कविताओं के माध्यम से पूरे मेला परिषर में एक समा बाँध दिया वहीं दूसरी ओर आने वाले वर्षों में मेला की गरिमा के अनुकुल कवियों को संताल की धरती पर अपने हुनर दिखलाने के लिये प्रेरित व प्रोत्साहित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक व सामाजिक कार्यकर्ता कमला कान्त सिन्हा, जिला पंचायती राज पदाधिकारी शिवनारायण यादव व हिन्दी के पूर्व शिक्षक डा0 रामवरण चैधरी ने जहाँ एक ओर गीतों के माध्यम से श्रोताओं के बीच अपनी गर्म उपस्थिति दर्ज करायी वहीं दूसरी ओर युवा पत्रकार व साहित्यकार अमरेन्द्र सुमन ने गजल की इन पंक्तियों-’’बेसुंकु बेकरार बीमार आदमी, बदसलूकी का रोज-रोज शिकार आदमी’’ से श्रोताओं का मन मोह लिया। ’’माँ’’ शीर्षक से लिखी गई कविता का पाठ कर पत्रकार व साहित्यकार अमरेन्द्र सुमन ने दर्शकों व कवियों की भरपूर तालियाँ बटोरी। माँ के संपूर्ण व्यक्तित्व व समाज में उनकी भूमिका पर लिखी गई यह कविता खासा चर्चित रही। शांति निकेतन के पूर्व शिक्षक डा0 रामचन्द्र राय, संताली भाषा में साहित्य सृजन के लिये एक पहचान बन चुके चुण्डा सोरेन सिपाही, व्याख्याता मो0 हनीफ, अजय शुक्ल, अंजुला मुर्मू, शिक्षिका वंदना, श्रीवास्तव, युवा साहित्यकार अंजनी शरण व सौरभ सिन्हा ने विभिन्न विषयक कविताओं का पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन अशोक सिंह ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जनजातीय हिजला मेला कला संस्कृति समिति के उप संयोजक गौर कान्त झा, मदन कुमार, मेरीनिला मरांडी, एमानुएल सोरेन, सुरेन्द्र नारायण यादव, अधिवक्ता विद्यापति झा, अंकित कुमार पाण्डेय आदि की भूमिका सराहणीय रही। अंगिका भाषा के महाकवि स्व0 सुमन सुरो की अंगिका रचना का पाठ कर विद्यापति झा ने उनकी उपस्थिति से लोगों को परिचित कराया। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि विजय कुमार सिंह, किरण हांसदा, पीटर हेम्ब्रम, बादलमय झा के अलावा एन एस एस के स्वयं सेवक सुनिता मरांडी, शिखा दास, पायल साहा, शांति ग्लेडियस मुर्मू, सीमा कुमारी आदि उपस्थित थे।

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