अमरेन्द्र सुमन (दुमका), सिदो कान्हू मुर्मू विवि, दुमका के कांफ्रेंस हॉल में दिन गुरुवार (16 फरवरी 2017) को चांसलर लेक्चर सिरीज के उदघाटन के अवसर पर सामथ्र्य नाम से एक रिपोर्ट का विमोचन किया गया। सिदो कान्हू बिरसा विवि व सिदो कान्हू मुर्मू विवि के कुलपति ने संयुक्त रूप से उपरोक्त लेक्चर सिरीज के रिपोर्ट का किया विमोचन। वर्ष 2016 में रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में पॉपुलर लेक्चर का आयोजन किया गया था, जिसमे देश-विदेश से कई शिक्षाविद सहित पद्मश्री जे के सिंह, धूनी सोरेन, शुभेंदु शेखर जैसे लोगो ने विवि में व्याख्यान दिया था। रिपोर्ट में 13 व्याख्यान के सार प्रस्तुत किये गए है। इस रिपोर्ट का संपादन डॉ अजय सिन्हा व अच्युत चेतन ने किया है। सिदो कान्हू बिरसा विवि व सिदो कान्हू मुर्मू विवि, दुमका के बीच एक समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर भी इस अवसर पर कुलपति कक्ष में किया गया। इस एम्ओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग व उन्नयन की बातों पर अमल शामिल है। इसके अंतर्गत शैक्षिक आदान-प्रदान, क्षेत्रिय भाषा, संस्कृति, एवम शोध में सहयोग पर सहमति बनी। इस अवसर पर एस के बी विवि के कुलपति प्रो दीपक रंजन मंडल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों विवि अपने लक्ष्य के प्रति साथ मिल कर काम करेंगे। सिदो कान्हू मुर्मू विवि के कुलपति प्रो कमर अहसन ने कहा हम सब लोगो के लिए यह हर्ष का विषय है कि साझा नाम एवम साझा विरासत वाले दो विवि मिलकर इस इलाके को नई पहचान दिलाएंगे। मौसौदे पर हस्ताक्षर डॉ गौरव कुमार गंगोपाद्यय व बिरसा विवि के रजिस्ट्रार गुरुदास मंडल ने किया। इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रो एस एन मुंडा, डी एस डब्लू डॉ ए एन पाठक, डॉ एस एन मिश्र, मगध वि वि के प्रो बिमल प्रसाद सिंह एच एन मिश्रा, डॉ शंशादुल्लाह, डॉ सुजीत सोरेन, डॉ अजय सिन्हा, डॉ शर्मीला सोरेन, डॉ शम्भू प्रसाद सिंह, डॉ बिजय कुमार, अनमोल अमर बाबा उपस्थित थे। चांसलर व्याख्यानमाला के प्रथम कार्यक्रम के तहत 16 फरवरी 2017 को सिदो कांहू बिरसा विश्वविद्यालय, पुरुलिया के कुलपति प्रो दीपक रंजन मंडल ने मूल्य आधारित शिक्षा पाठ्यक्रम के आगे विषय पर अपना व्याख्यान दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो कमर अहसन ने की. अपने व्याख्यान ने प्रो मंडल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य तथ्यों का संकलन नहीं बल्कि मूल्यों का विस्तार है. मूल्यों के विस्तार के लिए उन्होने शैक्षणिक संस्थानों में चार बिंदुओं पर ध्यान देने की बात कही. 1. शिक्षकों और छात्रों को सकारात्मक व्यवहार और गतिविधियों में संलग्न होना चाहिए. 2. क्लासरूम का माहौल सहयोग पूर्ण और लचीला होना चाहिए. छात्रों की जिज्ञासा को अभिव्यक्ति मिलनी चाहिए. 3. पाठ्यक्रम निर्माण और विकास में छात्रों को रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए. 4. भेदभाव रहित शिक्षा के द्वारा सांस्कृतिक परिवेश निर्माण करना चाहिए. ऐसी शिक्षा भारतीय संस्कृति की भी धरोहर है. अपने अध्यक्षीय भाषण में कुलपति प्रो अहसन ने इन्ही मूल्यों को एस के एम यूनिवर्सिटी का आदर्श माना है. दोनों विश्वविद्यालय एक साथ इस दर्शन को साझा कर रहे हैं. कार्यक्रम में प्रो ए एन पाठक, प्रो शर्मिला सोरेन, प्रो सुजीत सोरेन आदि ने अपनी बातें रखीं. मंच संचालन अंजुला मुर्मू ने किया.
गुरुवार, 16 फ़रवरी 2017
एसकेएमयू विवि, दुमका में पॉपुलर लेक्चर सिरीज के रिपोर्ट का हुआ विमोचन
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