सिय़ासत से ज़्यादा अब मुझे आम आदमी से डर लगने लगा है । पता नहीं ये आम आदमी कब भीड़ बन जाए और हमला करके मुझपर टूट पड़े । मैं डरने लगा हूँ... हर एक आम आदमी के आँखों में ग़ौर से देखता हूँ कि कल को कहीं ये भीड़ तो नहीं बन जाएगी??बड़ा ही सहमा सहमा रहता हूँ इन भीड़ की प्रकृति को देखकर ।मन के अंदर खौफ़ सा होगया है भीड़ कि मानसिकता को देखकर ।कभी कभी यह सोचकर थर्राने लगता हूँ कि सोचिए की किसी के घर उसके मां बहन अकेले रहे और यह भीड़ उसपर अटैक कर दे..सिर्फ इसलिए कि उसका बेटा उसके जाति धर्म ता सम्प्रदाय पर कुछ बोल या लिख दिया है..जरा सोचिए एक बार कि कैसा पैटर्न बन गया है..कोई गलत है भी अगर तो एक भीड़ उसे आकर सजा देने का हक कैसे अपने हाथ में ले लेती है..आप अगर आज नहीं सोचिएगा तो कल ये आपके साथ भी हो सकता है..फिर संविधान के संस्थापक ने जो हमारा अधिकार दिया था वो आज भीड़ सिर्फ हमें डराकर छिन ले रही है । दशहत में रहने लगा हूँ सोशल मीडिया पर हर एक शख्स को गहरी निगाहों से देखता हूँ कि ये कहीं उस भीड़ के फैसले पर कल को ट्राॅल तो नहीं करेगा..आज वो उसको ट्राॅल करेगा तो लिख के ले लिजीए अगर कल को ये भीड़ आप पर हमला करेगी तो ये आपको भी ट्राॅल करेगा...बताइये कि ये भीड़ को आपने कभी भी स्वच्छता के लिए इस तरह अचानक से कभी जुटते देखा है क्या ? कुपोषण से बच्चे मर रहे हैं लेकिन क्या उस बच्चों के लिए कहीं किसी भी जगह भीड़ को जुटते देखा है? रोज रोज भ्रष्टाचार और घोटाले हो रहे है क्या ये भीड़ वहां जाती है क्या? नहीं जाती है... यह भीड़ आपको हमले के वक्त धर्म और मजहब के नाम पर हिस्सा बनाती है । हो सकता है आप कल को इससे(धर्म और सम्प्रदाय के नाम पर जुटने वाली भीड़ से) दूर हो जाएँ तो कल को यह भीड़ आप पर भी वार कर सकती है । हो यह भी सकता है कि भीड़ कोई बनाता होगा नहीं तो सोचिए कि ये सीधे टार्गेट बनाकर ही कैसे लोगों पर टूट पड़ ती है । बचपन में पढ़े थे कि भीड़ कि कोई प्रवृत्ति नहीं होती है ना ही कोई सत्ता और मानसिकता होती है वो कहीं भी किसी पर भी टूट पड़ती है...यह चिंतनीय विषय है कि आज गणतंत्र के 69 साल बाद भी भारत में लोग खौफ में जीने को मजबूर है...अगर जो इस भीड़ से डर नहीं रहा है समझिये वो इस भीड़ को शाबाशी दे रहा है...इस भीड़ से डरने की जरूरत है ..इस भीड़ से निजात पाने की जरूरत है....इस भीड़ कि मानसिकता को खत्म करने कि जरूरत है तभी सही मायने में लोकतंत्र सुदृढ़ हो पाएगा. ..
~अविनीश मिश्रा

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