प्रद्योत कुमार,बेगूसराय।युग विभाजन के हिसाब द्वापर युग में यमुना नदी का विशेष धार्मिक महत्व रहा है।भगवान श्रीकृष्ण से इस नदी का सीधा संबंध रहा है,कृष्ण से जुड़ी हुई कई धार्मिक कहानियां और हिन्दू धर्म का सीधा संबंध यमुना से रहा है, लेकिन तब से लेकर आज तक इस नदी का राजनीतिकरण नहीं हो पाया जिस वजह से ये उपेक्षित रहा है और कृष्ण की यमुना मैली हो गई है।उत्तराखंड में उत्तराक्षी से 30 किलोमीटर उत्तर में यमुनोत्तरी से यमुना का उद्गम है और पांच राज्यों के भूमि को पवित्र करती हुई इलाहबाद के संगम में गंगा से मिल जाती है।आगरे का ताजमहल भी इसी नदी के किनारे बसा हुआ है।इस नदी से भगवान श्री कृष्ण का बहुत ही गहरा सम्बन्ध रहा है,कृष्ण यमुना नदी के किनारे अपनी बांसुरी बजा कर गोपियों के साथ कितनी ही रासलीलाएं की थीं लेकिन आज वो यमुना नदी राजनीतिक अकर्मण्यता के कारण मैली और ज़हरीली हो गई है और अपना अस्तित्व खोती जा रही है।उत्तराखंड,हरियाणा,दिल्ली,हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश से बहने की सज़ा इसे मिल रही है,सच जानिये तो इन राज्यों में स्थित उद्योगों की ज़हरीली गंदगी को ढ़ोते-ढ़ोते यमुना बीमार हो गई है और यमुना काली,मैली हो गई है जो पर्यावरण के लिए बहुत ही बड़ा ख़तरा है।इस नदी को गंदगी से बचाने का कोई राजनीतिक कवायद नहीं हो रहा है,हालांकि गंगा नदी का पूर्ण रूपेण राजनीतिकारण हो तो चुका है लेकिन सिर्फ गंगा को बचाने का कवायद ही होता रहा है बचाया नहीं जा रहा है।तमाम राजनीतिक पार्टी गंगा की पवित्र धारा को अपने झूठे वक्तव्य से अपवित्र कर दिया है और यमुना को अपने नापाक़ इरादे से अपवित्र और मैली कर दिया है।अगर अपने इरादे में ईमानदारी नहीं लाये ये नेता तो वो दिन दूर नहीं कि भारत वर्ष से गंगा और यमुना का अस्तित्व भी मिट सकता है जो मानव जीवन के लिए ख़तरनाक भी साबित हो सकता है।
शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017
विशेष : कृष्ण तेरी यमुना मैली हो गई
Tags
# आलेख
# देश
Share This
About आर्यावर्त डेस्क
देश
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
संपादकीय (खबर/विज्ञप्ति ईमेल : editor@liveaaryaavart या वॉट्सएप : 9899730304 पर भेजें)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें