पटना 23 फरवरी, बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी की अविरलता बचाने, पश्चिम बंगाल में निर्मित फरक्का बांध के कारण गंगा नदी में जमा हो रहे गाद एवं सिल्ट और उससे राज्य में उत्पन्न पर्यावरणीय संकट के प्रति जागरुकता फैलाने के लिए 25 फरवरी से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन होगा। जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि बिहार के लिए बाढ़ एक गंभीर समस्या है। नदियां अपने साथ सिल्ट लाती हैं। किसी भी नदी के लिए सिल्ट के साथ प्राप्त प्रवाह को ले जाने में एक न्यूनतम वेग की जरूरत होती है। यह वेग नहीं मिलने की स्थिति में प्रवाह धीमी होने पर नदी के तल में सिल्ट जमा हो जता है। इससे नदियां मजबूत किनारे को छोड़कर कमजोर किनारों की ओर बहने लग जाती है, जो बाढ़ का कारण बनता है। उन्होंने कहा कि फरक्का बांध के बनने के बाद गंगा नदी का स्लोप परिवर्तित हुआ है और बाढ़ के समय में जल के उच्च स्तर के घटने की दर में कमी आई है। इस सम्मेलन में विशेष रूप से इस समस्या का समाधान ढूंढने का प्रयास किया जाएगा। श्री सिंह ने बताया कि ‘गंगा की अविरलता’ विषय पर आधारित इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे और इसमें जानेमाने पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट, जलपुरुष राजेंद्र सिंह, संत बलबीर सिखेवाल, वंदना शिवा, जयंत बंदोपाध्याय और अर्थशास्त्री डॉ. भरत झुनझुनवाला समेत बंगलादेश, जर्मनी, नीदरलैंड और नेपाल के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017
गंगा की अविरलता बचाने को लेकर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 25 फरवरी से
Tags
# देश
# बिहार
Share This
About आर्यावर्त डेस्क
बिहार
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
संपादकीय (खबर/विज्ञप्ति ईमेल : editor@liveaaryaavart या वॉट्सएप : 9899730304 पर भेजें)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें