नयी दिल्ली, चार अप्रैल, विदेश नीति विशेषज्ञों ने आज कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने के लिए ट्रंप प्रशासन के संभावित हस्तक्षेप के बारे में संयुक्त राष्ट्र में नियुक्त अमेरिकी दूत निक्की हेली की टिप्पणियों के आधार पर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसके साथ - साथ विशेषज्ञों को यह भी लगता है कि भारत को अमेरिका को एक सख्त संदेश भेजना चाहिए कि इस मुद्दे में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता भारत को स्वीकार्य नहीं होगी। वर्ष 2009 से 2011 तक अमेरिका में भारत की राजदूत रही मीरा शंकर ने कहा, ‘‘सबसे पहले, ये टिप्पणियां एक सवाल के जवाब में थी। हम नहीं जानते कि क्या यह अमेरिका का कोई नीतिगत फैसला है या बगैर किसी योजना के की गई टिप्पणी है। टिप्पणियांे के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।’’ ट्रंप प्रशासन की भारतीय मूल की वरिष्ठ सदस्य हेली ने न्यूयार्क में कहा कि भारत..पाक तनावों को दूर करने की कोशिशों को लेकर अमेरिका अपनी जगह बनाने की कोशिश करेगा और कुछ हो जाने का इंतजार नहीं करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ऐसी स्थिति में एक भूमिका निभा सकते हैं। मीरा ने कहा कि अमेरिकी नीति भारत और पाक के बीच तनाव कम करने को सुनिश्चित करने की रही है लेकिन अमेरिका ने दोनों देशों के बीच मुद्दों को सुलझाने में अपने लिए कभी कोई भूमिका नहीं देखी। उन्होंने कहा कि फिर भी हमें अमेरिका के समक्ष अपना रूख बहुत स्पष्ट करना चाहिए कि हम किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप :पाकिस्तान के साथ मुद्दे सुलझाने में: के लिए तैयार नहीं हैं। मीरा के विचार से सहमति जताते हुए पूर्व राजनियक जी पार्थसारथी ने भी हेली की टिप्पणी को तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की महज प्रतिनिधि हैं और उन्होंने इस बात का जिक्र कभी नहीं किया कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचिए। अमेरिका ने भारत और पाक के बीच हमेशा ही तनाव कम करने का समर्थन किया है।’’ पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त रह चुके पार्थसारथी ने कहा कि दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच करगिल युद्ध के दौरान सहित तनाव खत्म करने के लिए अमेरिकी हस्तक्षेप के अन्य दृष्टांत रहे हैं।
मंगलवार, 4 अप्रैल 2017
‘हेली की टिप्पणी पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी’
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