बिहार : भाजपा के सत्ता के आने के बाद सामंतों का मनोबल सातवें आसमान पर : माले - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 18 जनवरी 2018

बिहार : भाजपा के सत्ता के आने के बाद सामंतों का मनोबल सातवें आसमान पर : माले

  • भोजपुर के कारनामेपुर में हाॅकर योगेन्द्र यादव की हत्या के पीछे सामंती-अपराधियों व पुलिस का नापाक गठजोड़.

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पटना 18 फरवरी, भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने कहा है कि बिहार में जब से भाजपा ने सत्ता का अपहरण किया है, सांप्रदायिक-सामंती ताकतों का मनोबल सातवें आसमान पर है. दलित-गरीबों की लगातार हत्यायें हो रही हैं और अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. हालिया प्रकरण में भोजपुर जिले के शाहपुर में दिनांक 17 जनवरी की सुबह आठ बजे योगेन्द्र प्रसाद (हाॅकर) की सामंती ताकतों द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गई, जब वो पेपर बांटने जा रहे थे. उन्होंने कहा कि एक तरफ सामंती-अपराधियों का मनोबल बढ़ा है, तो दूसरी ओर बक्सर के नंदनगांव में जिस प्रकार से जिला प्रशासन लगातार गरीबों पर दमन ढा रहा है, वह बेहद निंदनीय है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह से एक तानाशाह की भाषा बोल रहे हैं. समीक्षा यात्रा की नौटंकी करते है, लेकिन दलित-गरीब जब अपना दुख-दर्द उन्हें सुनाना चाहते हैं, तो उनके पास वक्त नहीं होता. वहां अब तक 8 महिलाओं समेत 21 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. मुख्यमंत्री समीक्षा यात्रा नहीं बल्कि दमन यात्रा कर रहे हैं. कारनामेपुर की घटना की जांच हेतु भाकपा-माले की एक जांच टीम ने आज घटना स्थल का दौरा किया. इस जांच टीम में तरारी से पार्टी के विधायक सुदामा प्रसाद, युवा नेता राजू यादव, कयामुद्दीन अंसारी, उतम प्रसाद, हरेन्द्र सिंह तथा अन्य साथी शामिल थे. जांच टीम ने कहा है कि इस हत्या में ब्रजेश राय, शिवसागर राय, रितेश राय (तीनों सहोदर भाई) तथा सोना राय जैसे अपराधी शामिल हैं. इन्हीं लोगों ने आज से चार महीना पहले 7 सितंबर 2017 को योगेन्द्र प्रसाद के चचेरे भाई राजेंद्र प्रसाद की हत्या भी घर पर शाम में गोली मार कर की थी. उस हत्याकांड में योगेन्द्र प्रसाद प्रमुख गवाह थे. 

विवाद का मुख्य कारण 16 डिसमिल बिहार सरकार की जमीन को लेकर है, जिसका योगेन्द्र प्रसाद के दादा के नाम से ही परचा कटता रहा है. उसी जमीन को भूमिहार जाति के ये सामंत दखल करना चाहते हैं. 25 साल पहले उच्च न्यायालय से गरीबों के पक्ष में डिग्री भी हो गया है फिर भी दबंगई के बल पर सामंती ताकतें जमीन छीनना चाहती है. राजेन्द्र प्रसाद हत्याकांड में कारनामेपुर थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी शंभू सिंह की संलिप्तता साफ दीखती है क्योंकि अभी तक एक भी अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हुई है बल्कि रिपोर्ट के अनुसार 3 लाख रुपये लेकर कुछ लोगों का नाम भी निकाल दिया है. अभी वर्तमान में वह तियर थाना का प्रभारी है. वर्तमान थाना प्रभारी धनंजय सिंह भी उसी मानसिकता का व्यक्ति है क्योंकि इसने भी उन अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया. लगातार मुकदमा उठाने तथा जमीन छोड़ने के लिए पीडित परिवार को अपराधियों द्वारा धमकी दी जा रही थी, जिसकी लिखित शिकायत भोजपुर एसपी, तथा डीआइ जी को भी दी गई थी. लेकिन किसी ने भी कुछ नहीं किया. फलस्वरूप अपराधियों का मनोबल बढता गया. योगेन्द्र प्रसाद की हत्या के तीन दिन पहले उनक पत्नी ने थाने पर जाकर धमकी देने वाले लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की थी, फिर भी थाना प्रभारी ने कुछ नहीं किया. हद तो तब हो गई जब 17 जनवरी को हत्या के बाद भी योगेन्द्र प्रसाद की पत्नी थाने पर सूचना देने गई तो थाना प्रभारी बोला कि जाओ हम नहाकर आ रहे हैं. इसी बात पर जनता का गुस्सा भड़क गया और थाने की गाडी समेत बज्र वाहन को भी लोगों ने आग के हवाले कर दिया. जनता को शांत करने के लिए एसपी तथा डीआईजी को भी जाना पड़ा और तत्काल शंभू सिंह को सस्पेंड तथा धनंजय सिंह को लाइन हाजिर करना पडा. कुल मिलाकर ये दोनों हत्या पुलिस अपराधी गठ जोड़ का परिणाम है. इसके खिलाफ 24 जनवरी 18 को जिलाधिकारी के समक्ष धरना का कार्यक्रम लिया गया है.
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