दुमका : यज्ञ मैदान में छात्र चेतना संगठन का 20 वाँ स्थापना दिवस धूमधाम के साथ संपन्न हुआ - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

दुमका : यज्ञ मैदान में छात्र चेतना संगठन का 20 वाँ स्थापना दिवस धूमधाम के साथ संपन्न हुआ

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) यज्ञ मैदान दुमका में गैर राजनीतिक संगठन छात्र चेतना संगठन का 20 स्थापना दिवस समारोह धूमधाम से संपन्न हो गया। संताल परगना प्रमण्डल के विभिन्न जिलों बड़ी संख्या में यज्ञ मैदान दुमका पहुँचे छात्र चेतना मजदूर व किसान चेतना संगठन के कार्यकर्ताओं व सदस्यों से पटे यज्ञ मैदान में बतौर मुख्य अतिथि स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय संयोजक अरुण ओझा ने कहा किसी संस्था के लिये दो दशक का समय कम नहीं होता। जिस जज्बे के साथ इस संगठन ने राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत छात्रों को एकजुट करने का प्रयास किया सराहनीय है। उन्होंने कहा चेतना बुद्धि व विवेक से संबद्ध है। मजदूरों, किसानों व छात्रों में राष्ट्रीयता की भावना भरना आम बात नहीं। संगठन पिछले 20 वर्षों से पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपने उद्देश्यों का अमलीजामा पहना रहा है। उन्होंने कहा आज से सौ वर्ष पूर्व सोवियत रुस में मजदूरों के बीच चेतना जगाने का काम किया गया था। रुस की बोल्सेविक क्रांति उसकी ही उपज थी। चीन में मजदूरों/ किसानों के बीच चेतना जगाने का काम किया गया था। कालान्तर मंे भटकाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी। आज स्थिति यह है कि वहाँ के मजदूरों को वेतन तक सही नहीं मिल पा रहा है। भारत मंे भी आपातकाल के बाद संपूर्ण क्रांति का शंखनाद हुआ था। सत्ता के विरुद्ध पूरे देश में क्रांति ने विशाल रुप अख्तियार कर लिया। सत्ता परिवर्तन हुआ। बाद के वर्षों में नेताओं ने उस क्रांति की आड़ में धनोपार्जन को अपना धंधा बना लिया। धीरे-धीरे क्रांति की उपज नेताओं की नीतियाँ, सिद्धान्त व वसूलों में भारी कमी देखने को आयी। आज स्थिति यह है कि संपूर्ण क्रांति की उपज आज कई नेता जेल की कोठरी में बंद हैं। संगठन के केन्द्रीय अध्यक्ष हिमांशु मिश्रा ने कहा कि संगठन का उद्देश्य पूरी भारतीयता तथा राष्ट्रवाद है। राष्ट्रवादी सोंच विकसित हो तथा देश का एक-एक व्यक्ति राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत हो संगठन का उद्देश्य है। उन्होंने कहा जिस छोटे से कालखण्ड में छात्र चेतना संगठन ने मजदूर, किसान व छात्रों का एक विशाल समूह का निर्माण किया है वह अविस्मरणीय है। पूरे भारतवर्ष में संगठन के उद्देश्यों से छात्रों/ युवाओं को जोड़कर राष्ट्रीय फलक पर संगठन को पहुँचाने का काम किया जाएगा। संगठन के संगठन के केंन्द्रीय सलाहकार डा0 आर के नीरद ने कहा कि 27 फरवरी 1997 को 20 व्यक्तियों से शुरु हुआ यह संगठन आज भव्य हो चला है। 27 फरवरी 1931 को राष्ट्रीय अखंडता व अंग्रेजों की दासता से देश को आजाद करने की प्रतिज्ञा के साथ जिस फौलादी साहस के बलबूते शहीद चन्द्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों का छक्के छुड़ाए और अंत-अंत तक उनकी पकड़ से दूर रहे भारत माँ के उस सपूत ने खुद को गोली मारकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। उनका एक ही संकल्प था अंग्रेजों के हाथ वे नहीं आऐंगे। शहीद चन्द्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि को ही इस संगठन की नंीव डाली गई थी इससे ज्ञात होता है कि संगठन उन वीर सपूतों के प्रति कितना कृतज्ञ है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मो. (डाॅ) हनीफ ने कहा कि जो ईंट तपता नहीं, पकता नहीं वह ईंट बिकता भी नहीं है। हिम्मत, मेहनत व परिश्रम से किया गया कार्य हमेशा ही सफल होता है। यह संगठन छात्रों में छिपी उर्जा को संग्रहित कर उसे आगे बढ़ाने का काम कर रहा है। संताल परगना प्रमण्डल के प्रभारी राजीव मिश्रा, श्रीमती श्यामा देवी, उदयकांत पाण्डेय, राजन ंिसह, व अन्य ने अपने-अपने विचार इस अवसर पर प्रकट किये। 
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