एसडीओ राकेश कुमार के रुप में एक दूसरा काॅस्टेयर्स मिला दुमका को - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

एसडीओ राकेश कुमार के रुप में एक दूसरा काॅस्टेयर्स मिला दुमका को

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) प्रतिवर्ष फरवरी महीनें के शुक्लपक्ष को मयूराक्षी नदी तट पर लगने वाला हिजला मेला खत्म हो गया. संतालों के साथ सीधा संवाद स्थापित हो तथा वे गोरी सरकार से भयमुक्त वातावरण में बात कर सकें इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर तत्कालीन ब्रिटिश उपायुक्त जाॅन राबर्टस काॅस्टेयर्स ने 3 फरवरी 1890 को हिज-लाॅ के रुप में इस मेला की नींव रखी थी. हिज-लाॅ अर्थात उसका कानून. जिला मुख्यालय दुमका से तीन किमी की दूरी पर मयूराक्षी नदी तट पर स्थित ग्राम हिजला में आयोजित यह मेला इस वर्ष 16 से 23 फरवरी तक सौहार्दपूर्ण वातावरण व आपसी भाईचारा के साथ संपन्न हो गया. जनजातीय संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज खान-पान, वेशभूषा, आचार-विचार मेला की खास विशेषता थी. जहाँ एक ओर इस वर्ष एसडीओ के अभिनव प्रयोंगों के तहत मेला परिसर को आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित रखा गया, वहीं दूसरी ओर चाक-चैबंद विधि व्यवस्था मेला की दूसरी खास विशेषता रही. एसडीओ राकेश कुमार के नेतृत्व में जिला व पुलिस प्रशासन की टीम लगातार कर्तव्यों का पालन करती दिखी. एसडीओ, दुमका व राजकीय जनजातीय हिजला मेला समिति के सचिव राकेश कुमार का मानना है जीवन में ऐसा कुछ होना चाहिए जो दूसरों से हटकर हो. घिसी-पिटी व्यवस्था का बोझ कब तक लोग यूँ ही ढोते रहेंगे. नयी-नयी चीजों का प्रयोग, अनुसंधान/ आविष्कार ही सृजन को आगे बढ़ाता है. एसडीओ राकेश कुमार के अनुसार अलग हटकर कुछ ऐसा कर जाएँ  जिसका अनुपालन सुनिश्चित हो. उनके अभिनव प्रयोंगों का ही प्रतिफल रहा कि शांति व अमन का पैगाम बांटता यह मेला खत्म हो गया. हिजला मेला की नींव रखने वाले काॅस्टेयर्स की सोंच रखने वाले तथा आदिवासी संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने की प्रतिबद्धता के साथ काम करने वाले एसडीओ राकेश कुमार कहते हैं. हिजला मेला के विषय में विशेष जानकारी नहीं थी. डीसी ने मेला की संपूर्ण जिम्मेवारी सौंपते हुए उनपर भरोसा किया.  मेला की शुरुआत से महीना भर पूर्व ग्रामीण, ग्राम प्रधान, मुखिया, स्वयंसेवकों व अन्य के साथ नियमित मीटिंग कर लोगों में नशापान के पति जागरुकता फैलाई गई. शराब के सेवन से आम नागरिकांे के बीच होने वाली हानि से लोगों को अवगत कराया गया. अपनी पदस्थापना अवधि से लेकर लगातार एसडीओ  अलग प्रयोग करते रहे. युवाओं में जज्बा भरते रहे. मेला में अनुठी पहल करते हुए पहली दफा उन्होंने इसे एक नया आयाम प्रदान किया. हिजला मेला से संबंधित फेसबुक पेज व वेबसाइट पहली दफा लाॅंच किया गया. ड्रोन कैमरा व सीसीटीवी कैमरे से संपूर्ण मेला क्षेत्र की निगरानी एसडीओ राकेश कुमार की सोंच थी.  ड्रोन व सीसीटीवी कैमरा की आँखों से चैबीसों घंटे मेला क्षेत्र की निगरानी रखी जाती रही. मेला के दौरान  महिलाओं का शोषण, उत्पीड़न, अत्याचार बलात्कार व हत्या जैसे अपरााध पर पूर्ण अंकुश लगा दिया गया.  दूर-दूर से मेला भ्रमण के लिये हिजला पहुँचने वालों को भयमुक्त वातावरण में मेला के आनंद का विश्वास भरा गया. कैमरे की आँखें लगातार सात दिनों तक तलाशती रहीं अपराधियों को. एसडीओ श्री कुमार के अनुसार मेला भ्रमण पर नेटवर्क की समस्या उत्पन्न न हो इसके लिये संपूर्ण मेला क्षेत्र को फ्री वाई-फाई जोन में बाँट दिया गया. दुकानों का आवंटन सुव्यवस्थित तरीके से किया गया. पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग ट्राईबल फैशन शो आयोजित किये गए. विलुप्त हो रही जनजातीय नृत्य शैली की प्रतियोगिता को पुर्नजीवित किया गया. जनजातीय संग्रहालय के माध्यम से ट्राईबल कल्चर को आगे बढ़ाने का काम किया गया. पुरुषों के लिए पहली दफा गुलेल निशानेबाजी प्रतियोगिता आयोजित की गई. मेला में कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले तमाम कलाकारों को प्रमाण पत्र दिया गया ताकि भविष्य में नौकरियों सहित अन्य क्षेत्रों में वे प्रमाणपत्रों का लाभ ले सकंे. बाल कलाकारों को स्मृति चिन्ह व उपहार से सम्मानित किया गया. सीमा सुरक्षा बल द्वारा पहली बार मेला परिक्षेत्र में न सिर्फ स्टॉल लगाया गया बल्कि युवाओं को एसएसबी में सेवा की महत्ता व सेवा के गुर सिखलाए/ बतलाए गए. मेला क्षेत्र के चप्पे-चप्पे की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल के उपर छोड़ दिया गया. पहली बार निजी संस्थाओं द्वारा कार्यक्रमों को प्रायोजित करवाने का कार्य किया गया. विश्वास राय व सिंजलिंग रेनेशा ऑर्केस्ट्रा ग्रुप का प्रायोजन व्यापार मंडल बाजार समिति दुमका द्वारा किया गया जो अपने आप में एक उपलब्धि है. अपने धून के पक्के एसडीओ सह सचिव जनजातीय हिजला मेला, दुमका राकेश कुमार ने जीतोड़ मेहनत कर मेला को एक नया फलक प्रदान किया जो आने वालेे दिनों में माईलस्टोन से कम नहीं है. मेला आयोजन समिति के सदस्यों व विभिन्न कलाकारों द्वारा मूक बधिर विद्यालय से मेला स्थल तक उल्लास रैली निकाली गई. यह बिल्कुल नया प्रयोग था.  अतिथियों को पगड़ी व पौधा देकर सम्मानित किया गया. एसपीएम, दुमका ,कस्तूरबा गांधी बालिका उच्च विद्यालय जामा, मध्य विद्यालय हिजला, एकलव्य विद्यालय काठीजोरिया, कस्तूरबा गांधी बालिका उच्च विद्यालय गोपीकांदर ,अनुसूचित जनजाति आवासीय बालिका उच्च विद्यालय दुमका ,कस्तूरबा गांधी उच्च विद्यालय शिकारीपाड़ा व संत टेरेसा बालिका उच्च विद्यालय, दुमका के कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए. मद्य निषेध, पॉलीथिन विरोध, लोक संगीत व साहित्य तथा दमकता दुमका पर परिचर्चा आयोजित करवायी गई. कवि गोष्ठी व स्कूली बच्चों के लिए क्विज प्रतियोगिता आयोजित किये गए.  बाहरी कला मंच पर प्रत्येक दिन शाम 6 बजे से रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रायोजित था.  16 फरवरी को हिजला ग्राम कला दल, मधुपुर संथाली दल व देवघर के परिहस्त कलाद द्वारा प्रस्तुति दी गई. 17 फरवरी को उड़ीसा की सांस्कृतिक टीम व बाउल तथा पश्चिम बंगाल की मेलोडी कलादलों ने अपना जौहर दिखलाया. ,18 फरवरी को असम, उड़ीसा व एक्सवास कलादलों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए.  19 फरवरी को असम कला दल व रथिन किस्कू के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लोग झूम उठे.. 20 फरवरी को छऊ नृत्य की राँची टीम, दुमका के मेलोडी म्यूजिक ग्रुप व  चेतन जोशी का बांसुरी वादन कार्यक्रम की खास विशेषता थी. 21 फरवरी को झारखंड कला केंद्र दुमका, सुरेंद्र नारायण यादव व कावेरी ग्रुप (पश्चिम बंगाल) द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गए. सिल्ली का छऊ नृत्य से लोग भाव विह्वल हो गए.   22 फरवरी को विश्वास राय व रेनेसा ग्रुप का रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ. 23 फरवरी को मेला के राजू टूडू हिजला ग्राम ग्रुप द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की गई. पहली दफा पुरुष व महिलाओं के लिए अलग अलग जनजातीय फैशन शो ने सुर्खियाँ बटोरी. प्रतिभागियों ने पारंपरिक परिधानों में अपना जलवा बिखेरा। मेला परिक्षेत्र में 1 काउ टावर 9 स्मॉल सेल व 6 वाईफाई डिवाइस लगवाए गए. स्वच्छ भारत मिशन की प्रदर्शनी पंडाल आकर्षण का प्रमुख केन्द्र रहा. इनोवेशन फार सोसायटी संस्था द्वारा कम खर्च पर ईंट व बालू से बने पर्यावरण के अनुकूल फ्रीज बनाया गया. शानदार आतिशबाजी व  रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ राजकीय जनजातीय हिजला मेला अगले वर्ष के स्वप्न के साथ समाप्त हो गया.  अंतिम दिन घड़ा उतारने की प्रतियोगिता हुई. इस प्रतियोगिता में 17 टीमों ने अपना-अपना भाग्य आजमाया. बैजबिनहा दुमका की टीम ने घड़ा उतारकर 3, 000 रुपये का पुरस्कार प्राप्त किया. घड़ा उतारने की प्रतियोगिता में शामिल प्रत्येक टीम को पांच 500-500 सौ रुपये बतौर नकद व अन्य सामग्रियाँ दी गई.  पद्मश्री गायक मुकुंद नायक की टीम ने गीत व संगीत से हजारों दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जनजातीय नृत्य प्रतियोगिता के विजेता टीमों को भी पुरस्कृत किया गया। महिला व पुरुष संयुक्त वर्ग में गोविंदपुर चिरुडीह टोला के बाबूराम सोरेन ग्रुप ने पहला स्थान प्राप्त किया जबकि कुकुरतोपा जामा के मंगल मुर्मू ग्रुप ने दूसरा व गिदनीपहाड़ी दुमका की मुन्नी सोरेन ग्रुप ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। पुरुष वर्ग की प्रतियोगिता में पुनसिया रामगढ़ के मान किशोर हांसदा,  जगदीशपुर (रानेश्वर) के देवेश चंद्र हाँसदा व  झूमरबाद जामा के नाजिर मुर्मू ग्रुप को क्रमशः पहला दूसरा व तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। महिला व पुरुष दोनों ही वर्ग के विजेता टीमों को क्रमशः 50, 000 रुपये 40, 000 हजार रुपनये व 30, 000 रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया. आयोजन को सफल बनाने में खेलकूद आयोजन समिति के सह संयोजक उमाशंकर चैबे, कला समिति के सह संयोजक गौरकांत झा, कुणाल दास, गोविंद प्रसाद, शैलेंद्र सिन्हा, वरुण कुमार, मदन कुमार, सुमिता सिंह, छवि बागची, विद्यापति झा, निमाय कांत झा, अरविंद कुमार, मनोज कुमार घोष, जीवानंद यादव, दीपक झा, रंजन कुमार पांडे, बैद्यनाथ टुडु, जयराम शर्मा, वंशीधर पंडित ,अनिल टुडू, सुनेन्दु सरकार, मुकेश की भूमिका सराहनीय रही. एसडीओ सह जनजातीय हिजला मेला समिति के सचिव राकेश कुमार ने वर्ष 2018 के हिजला मेला को एतिहासिक बतलाया. डीसी दुमका मुकेश कुमार, डीडीसी शशिरंजन, प्रशिक्षु आई.ए.एस. विशाल सागर ,पुलिस अधीक्षक किशोर कौशल, ,नगर परिषद अध्यक्ष अमिता रक्षित, डीईओ धर्मदेव राय डीपीआरओ  शिवनारायण यादव, निदेशक डीआरडीए दिलेश्वर महतो, एनईपी डायरेक्टर विनय कुमार सिंकू, जिला योजना पदाधिकारी डीपीआरओ (जनसंपर्क) सैयद राशिद अख्तर ,बीडियो व ,सीओ दुमका लागरी बराल, डीटीपी अमरदीप, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग अनिल टूडू, मुफस्सिल थाना के इंस्पेक्टर सह थाना प्रभारी कामेश्वर कुमार कामेश ,जेई रमेश श्रीवास्तव, जिला परिषद सदस्य चिंता देवी ,डॉ सी एन मिश्रा, छाया गुहा ,वाणी सेनगुप्ता, अंजुला मुर्मू, सरुआ पंचायत की मुखिया मंजूलता सोरेन, हिजला ग्राम प्रधान सुनीराम हांसदा इत्यादि का भी सहयोग मेला को दुरुस्त बनाने में रहा. 
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