राजद का विधानसभा में हंगामा, नहीं चला प्रश्नकाल - Live Aaryaavart

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मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

राजद का विधानसभा में हंगामा, नहीं चला प्रश्नकाल

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पटना 27 फरवरी, बिहार विधानसभा में आज मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने मुजफ्फरपुर में 24 फरवरी को वाहन से बच्चों को कुचलने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता मनोज बैठा की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा किया, जिसके कारण भोजनावकाश से पूर्व कोई कार्य नहीं हो सका और सभा की कार्यवाही दो बजे दिन तक के लिए स्थगित कर दी गयी । विधानसभा में कार्यवाही शुरू होने के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि मुजफ्फरपुर में भाजपा के महामंत्री मनोज बैठा ने नशे की स्थिति में अपने वाहन से 35 बच्चों को कुचल दिया जिसमें नौ की मौत हो गयी जबकि अन्य घायल हो गये । इस घटना के बाद उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी समेत भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने श्री बैठा को अपनी पार्टी का सदस्य मानने से इंकार कर दिया । उन्होंने कहा कि अब भाजपा के नेता श्री बैठा को बचाने में लगे हैं। श्री यादव ने कहा कि भाजपा के लोग श्री बैठा को गिरफ्तारी से बचा रहे हैं ताकि कुछ दिन बीत जाने के बाद जब उसके रक्त की जांच हो तब उसमें शराब पीने का प्रमाण नहीं मिले। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जवाब देना चाहिए कि राज्य में जब पूर्ण शराबबंदी लागू है तब भाजपा नेता कैसे शराब पी रहे हैं और गाड़ी चला रहे हैं। राज्य में शराब की बिक्री कहां से हो रही है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस विषय पर सदन में तुरंत चर्चा होनी चाहिए । इसलिए इससे संबंधित कार्यस्थगन प्रस्ताव को मंजूर किया जाये । उन्होंने भाजपा और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेताओं पर सत्ता तथा शराब के नशे में चूर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र लोक-लाज से चलता है लेकिन लगता है कि भाजपा-जदयू के नेताओं में लोक-लाज मिट चुकी है। सरकार की तरफ से एक भी मंत्री पीड़ितों के परिवार से मिलने नहीं गया है। इस तरह जब देश के दुश्मनों से मुकाबला करते हुए जवान शहीद हुए तब भी कोई मंत्री उनके परिवार से मिलने नहीं गया था ।



राजद सदस्य कार्यस्थगन प्रस्ताव को मंजूर करने की मांग को लेकर अपनी सीट से ही शोरगुल करने लगे । इसपर सभाध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने ठीक कहा है। लोकतंत्र नियम-कायदे से चलता है। कार्यस्थगन के लिए कार्य संचालन नियमावली में प्रावधान बने हुए हैं। उसी के तहत उसे लाया जाना चाहिए। नियम के तहत यदि इसे लाया जाता है तो सरकार उसपर जवाब देने के लिए बाध्य होगी । उन्होंने राजद सदस्यों से शांत रहने और प्रश्नकाल चलने देने का आग्रह किया । राजद के सदस्य सभाध्यक्ष के आग्रह को नहीं मानें और अपनी सीट से ही शोरगुल करते रहे। शोरगुल के बीच हीं संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि मुजफ्फरपुर की दुर्घटना के बाद जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश शर्मा पीड़ित परिवार से मिले थे । इसी तरह शहीद जवानों के परिवारों से भी मंत्री मिलने जाते हैं । उन्होंने कहा कि इस दुर्घटना पर राजनीति ठीक नहीं है । नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने भी कहा कि वह पीड़ित परिवार से मिले थे और प्रत्येक मृतक के आश्रितों को सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये को चेक भी भेंट किया था । इस दुर्घटना में घायलों का इलाज कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक महिला को ठोकर लगने के बाद भागने के क्रम में यह दुर्घटना हुई है । वाहन का चालक शराब पीये हुए था या नहीं यह जांच के बाद ही पता चलेगा। राजद के सदस्य शोरगुल और नारेबाजी करते हुए सदन के बीच में आ गये । राजद के सदस्य कुछ देर तक नारेबाजी करते रहे, बाद में सभाध्यक्ष ने एक बार फिर उनसे शांत होकर अपनी सीट पर जाने का आग्रह करते हुए कहा कि यदि वे नियमानुसार इस विषय को सदन में उठाते हैं तो सरकार को जवाब देने के लिए बाध्य होना पड़ेगा । इस तरह सदन के बीच में आकर हंगामा करने से कोई लाभ नहीं होगा । इसपर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि श्री सुशील मोदी ने दुर्घटना के बाद कहा था कि मनोज बैठा उनकी पार्टी का सदस्य नहीं है। श्री मोदी को अपने इस गलत बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए । उन्होंने हरियाणा में एक निजी विद्यालय के छात्र प्रद्युम्न की हत्या की जांच जब केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कर सकती है तब मुजफ्फरपुर में नौ बच्चों की हत्या के मामले की जांच सीबीआई से क्यों नहीं करायी जा सकती ।




श्री यादव ने कहा कि क्या सरकार इस मामले की सिर्फ इसलिए सीबीआई जांच नहीं कराना चाहती है कि मुजफ्फरपुर में जिन नौ बच्चों की मौत हुई है वे सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले गरीब, दलित और पिछड़े हैं। उन्होंने कहा कि कार्यस्थगन प्रस्ताव को मंजूर कर सदन में इस मामले पर चर्चा जरूरी है।  सभाध्यक्ष श्री चौधरी की तमाम कोशिशों के बाद भी जब सदन व्यवस्थित नहीं हो सका तब उन्होंने सभा की कार्यवाही करीब पन्द्रह मिनट बाद दो बजे दिन तक के लिए स्थगित कर दी । हंगामे के कारण भोजनावकाश से पूर्व निर्धारित कार्य प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण नहीं हो सका ।

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