’’राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन का समापन ’’ - Live Aaryaavart

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गुरुवार, 29 मार्च 2018

’’राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन का समापन ’’

’हमारी गंगा हमारा भविष्य’ : भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा संचालित जैव विविधता संरक्षण एवं गंगा जीर्णोद्धार कार्यक्रम का शुभारम्भ ’गंगा रिवर इंस्टीटयूट’ की विधिवत घोषणा स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी द्वारा राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान समिट के दूसरे दिन का शुभारम्भ शहरी विकास मंत्री उत्तराखण्ड राज्य श्री मदन कौशिक जी, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया गंगा के किनारे बसे तटीय पांच राज्यों के प्रतिनिधि, 80 से अधिक शहरों के प्रतिभागी, 150 से अधिक मेयर, प्रशासक, नगरपालिकाओं के अध्यक्ष, 70 से अधिक वक्ता, नवीन आविष्कारक, 30 पीÛ एचÛ ईÛ डीÛ वाटर इंजीनियर, 250 गंगा प्रहरी, नमामि गंगे के अधिकारी,  वाइल्ड लाइफ आॅफ इण्डिया के 150 प्रतिनिधियों, फिक्की के अधिकारी, उच्च प्रशासनिक अधिकारी, तकनीकी प्रशासक, गंगा मंत्रालय के अधिकारी एवं प्रतिनिधियों ने किया सहभाग

’’सरकार के ग्रैण्ड प्लान के साथ जनसमुदाय अपना ग्राउंड प्लान’ जोडे़ ’’, ’गंगा किताबों में नहीं हमारे हृदय में बहती रहे’-पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती, 

राज्य के माॅडल के आधार पर तकनीकी प्रयोग जरूरी- श्री मदन कौशिक

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ऋषिकेश, 11 मार्च। परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय नदी गंगा समाधान शिखर सम्मेलन का समापन और भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा संचालित जैव विविधता संरक्षण एवं गंगा जीर्णोद्धार कार्यक्रम का शुभारम्भ शहरी विकास मंत्र उत्तराखण्ड सरकार श्री मदन कौशिक जी, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री मदन कौशिक जी रहे, उन्होने सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित गंगा प्रेमियों एवं गंगा प्रहरियों को सम्बोधित किया। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने माननीय मंत्री श्री मदन कौशिक जी को रूद्राक्ष की माला, अंगवस्त्र तथा हरित भेंट सेव फल का पौधा भेंट कर स्वागत किया। यह एक ऐतिहासिक अवसर है जब गंगा के तट पर पहली बार गंगा के तटीय पांच राज्यों के प्रतिनिधि, 80 से अधिक शहरों के प्रतिभागी, 150 से अधिक मेयर, प्रशासक, नगरपालिकाओं के अध्यक्ष, 70 से अधिक वक्ता, नवीन आविष्कारक, 30 पी. एच. ई.डी.(वाटर इंजीनियर, 250 गंगा प्रहरी, वाइल्ड लाइफ आॅफ इण्डिया के 150 प्रतिनिधियों, फिक्की के अधिकारी, उच्च प्रशासनिक अधिकारी एवं तकनीकी विशेषज्ञ, परमार्थ निकेतन में राष्ट्रीय नदी गंगा की समस्याओं का जिक्र करने नहीं बल्कि समाधान निकालने के लिये एकत्र हुये है। आज केे प्रातःकालीन सत्र में भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा संचालित जैव विविधता संरक्षण एवं गंगा जीर्णोद्धार कार्यक्रम के अन्तर्गत अपने-अपने क्षेत्र में गंगा की जैव विविधता के संरक्षण हेतु जागरूकता लाने हेतु सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया गया। यह कार्यशाला गंगा प्रहरियों एवं सभी प्रतिभागियों को कार्यक्रम के उद्देश्य के साथ गतिविधियों के प्रति अभिमुखीकरण करने का मंच प्रदान करेगी। तत्पश्चात सभी प्रतिभागियों ने गंगा के लिये बनायी जा रही भावी योजनाओं पर खुली चर्चा की और एक दूसरे के राज्यों में गंगा की वर्तमान स्थिति एवं गंगा संरक्षण हेतु चलाये जा रहे कार्यक्रम; उनके प्रभावों एवं भविष्य की रणनीति पर विचार मंथन हुआ। आज के कार्यक्रम के समन्वयक डाॅ एस. ए.हुसैन ने कार्यक्रम के विषय में विस्तृत जानकारी दी। डाॅ रूचि बडोला जी ने गंगा प्रहरी की संकल्पना, उनके कार्यो एवं जिम्मेदारियों के विषय जानकारी प्रदान की।

  तरल अपशिष्ट प्रबंधन का समाधान विषय पर विशेषज्ञोें ने अपने विचार व्यक्त किये। सभी प्रतिभागियों ने एक-एक कर स्थानीय समस्याओं को साझा किया, इस पर विशेषज्ञों ने समाधान दिये और फिर मिलकर भावी योजनायें बनायी गयी। मुस्कान ज्योति संस्था से आये प्रतिनिधियों ने ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन एवं झारखण्ड से आये श्री अरविंद मिश्रा द्वारा जैव विविधता एवं सामुदायिक संरक्षण के संबंध में चर्चा की। आज के विशेष सत्र में हरित शवदाह ग्रह पर भी विचार मंथन किया गया। दोपहर के सत्र में समुदाय और काॅर्पोरेट सहभागिता और सौंदर्यीकरण विषय पर भारत के वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यू आई आई) के साथ संयुक्त विचार मंथन हुआ। तत्पश्चात साॅलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर विस्तृत चर्चा और समाधान सत्र का आयोजन किया गया। चर्चा के पश्चात सभी ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियां प्रस्तुत की। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा, इस समागम का लक्ष्य है, ’’आप सभी अपने टाइम, टैलेंट, टेक्नोलाॅजी एवं टेनासिटी के साथ माँ गंगा के लिये कार्य करे। आज समय है जब हम गंगा के लिये कुछ कर सकते है नहीं तो भविष्य में हमें सरस्वती नदी थी की तरह गंगा नदी थी कहना और पुस्तकों में पढ़ना पड़ सकता है। उन्होने कहा कि ’गंगा किताबों में नहीं हमारे हृदय में बहती रहे’। भगीरथ को याद करते हुये कहा, भगीरथ की तपस्या अत्यंत कठोर थी उसकी तरह नहीं पर थोड़ा प्रयास तो जरूरी है। भगीरथ ने कभी सेल्फी नहीं ली बल्कि सेल्फ (खुद) को लगा दिया और कठोर तपस्या की। हम भी ’सेल्फी तक सीमित न रहे अपने सेल्फ को भी जोड़े’।पूज्य स्वामी जी ने कहा कि ’सरकार के ग्रैण्ड प्लान के साथ जनसमुदाय अपना ग्राउंड प्लान’ जोडे तो बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।’

शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक जी, सभी गंगा पहरी और गंगा प्रेमियों का गंगा प्रति समर्पण, प्रेम, आस्था और मन के भावों को देखकर प्रसन्न हो उठे उन्होने कहा कि हमने पूज्य स्वामी जी से निवेदन किया की मई माह में हम दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन देहरादून में करेंगे उसमें इस कार्यशाला के मंथन के पश्चात जो भी तकनीकी उत्तराखण्ड के लिये बेहतर सिद्ध होती है उसे लागु किया जायेगा। मंत्री जी ने राज्य के माॅडल के आधार पर तकनीकी के प्रयोग पर जोर दिया। उन्होने कहा कि प्रत्येक स्थान की अलग-अलग समस्यायें होती है तो तकनीकी समाधान भी उस परिस्थिति के अनुसार होने चाहियें। उन्होने कहा कि गंगा के लिये कार्य तो वर्षो से चल रहे है परन्तु विगत चार-पांच वर्षो में विलक्षण परिणाम देखने को मिले है। माननीय मंत्री जी गंगा स्वच्छता में युुवाओं की भागीदारी को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुये और कहा कि सरकारी कार्यो से गंगा निर्मल और अविरल नही हो सकती उसके लिये जनभागीदारी नितांत अवश्यक है। श्री कौशिक जी ने साॅलिड वेस्ट मेनेजमेंट हेतुु भी राज्य व स्थान के अनुसार समाधान निकालने पर जोर दिया उन्होने कहा कि एक जैसी तकनीकी को हर जगह लागु करने पर बेहतर परिणाम नहीं प्राप्त किये जा सकेते। उन्होने कहा कि हरिद्वार शहर में 87 प्रतिशत सीवेज सुचारू रूप से कार्य कर रहे है और शीघ्र ही हम बाकी बचे 13 प्रतिशत सीवेज को शुरूकर सौ प्रतिशत सीवेज सुचारू रूप से कार्य करने वाला शहर बना देंगे। माननीय मंत्री जी ने इस कार्यशाला के आयोजन हेतु पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज को धन्यवाद देते हुये कहा की आप पूरे विश्व के लिये कार्य करते है मेरा निवेदन है कि आप तीन से चार महिने केवल उत्तराखण्ड के लिये कार्य करे, हमारा मार्गदर्शन करे तो हम उत्तराखण्ड को एक माॅडल राज्य के रूप में स्थापित कर सकते है।

वाइल्ड लाइफ आॅफ इण्डिया के डाॅ राजीव चैहान जी ने जैव विविधता संरक्षण एवं गंगा के जीर्णोंद्धार के लिये चलाये जा रहे अभियान के विषय में जानकारी देते हुये कहा कि ’यह परियोजना विज्ञान आधारित जलीय जीवों के बहाली की योजना है। गंगा और अन्य नदियों में रहने वाले जीव यथा डाल्फिन, कछुये और घडियाल नदी के जल को स्वच्छ रखने मंे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है लेकिन नदियों में बढ़ता प्रदूषण जलीय जीवों के जीवन को संकटग्रस्त बनाता जा रहा है। अतः वाइल्ड लाइफ आॅफ इण्डिया द्वारा छः घटकों में परियोजनायें चलायी जा रही है जिसके अन्तर्गत समुदाय को जोड़कर उन्हे जलीय जीवों के संरक्षण की प्रेरणा दी जाती है। वक्ताओं ने गंगा की स्वच्छता, संरक्षण एवं जैवविविधता के संरक्षण के विषय में जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर पांच राज्यों से 500 से अधिक संख्या में आये प्रतिभागियों ने गंगा नदी की वर्तमान स्थिति, विभिन्न राज्यों में गंगा संरक्षण हेतु चलाये जा रहे कार्यक्रमांे की जानकारी और भविष्य की रणनीति पर विचार मंथन किया गया। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक जी के साथ सभी विशिष्ट अतिथियों ने नदियों की स्वच्छता एवं स्वच्छ जल की आपूति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी की। स्वामी जी महाराज ने नदियों को स्वच्छ रखने और तटों पर वृक्षारोपण का संकल्प कराया। पांच राज्यों से आयें प्रतिभागियों ने कहा कि पहली बार चरणबद्ध तरीके  से हमारी समस्याओं को सुना गया और समस्या के अनुसार हमें समाधान दिया। वे सभी यहा की गंगा जी, स्वच्छ जल एवं तटों की स्वच्छता देखकर आश्चर्य चकित थे उन्होने कहा कि गंगा के सभी तटों को इस  प्रकार स्वच्छ रखने का प्रयास करेंगे। प्रतिभागी सायंकालीन परमार्थ गंगा से भी अत्यंत प्रभावित हुये और कहा कि वास्तव में परमार्थ गंगा तट की आरती हमें दैवीय स्नान का आनन्द देती है हम दो दिनों से अनुभव कर रहे मानों हम स्वर्ग में है। उन्होने कहा कि ऐसी निर्मल गंगा सभी तक पहुंचे।
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