विशेष आलेख : काम से नाम कमाती महिलाएं - Live Aaryaavart

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बुधवार, 25 अप्रैल 2018

विशेष आलेख : काम से नाम कमाती महिलाएं

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जब से पंचायतीराज चुनाव में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी आरक्षण के द्वारा सुनिश्चित हुई है तब से महिलाओं की सक्रिय राजनीति में भूमिका गांव-गांव में देखने को मिल रही है। ऐसी ही एक महिला हैं राजस्थान के झुन्झुनू ज़िले की नवलगढ़ तहसील की कोलसिया पंचायत की महिला सरपंच श्रीमती विमला देवी जो अपने अधिकारों के प्रति हमेशा सचेत रही हैं। यह अपने कर्तव्यों का बखूबी पालन करती हैं। विमला देवी ने कक्षा 10 तक की शिक्षा हासिल की है। 10 वीं कक्षा पास करने के बाद सामाजिक दबाब के आगे इनके पिता को भी झुकना पड़ा और उन्होंने विमला देवी की शादी कर घर-परिवार की जिम्मेदारियों में व्यस्त कर दिया। ससुराल की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने एवं जागरूकता की कमी के कारण विमला देवी अपनी शिक्षा को आगे नहीं बढ़ा सकीं। तीन बेटों व दो बेटियों का पालन-पोषण करते हुए वह एक सफल गृहणी बनकर रह गयीं।
      
2015 के पंचायती राज चुनाव में विमला देवी ने जागरूक महिला का परिचय देते हुए घर परिवार में सलाह कर सरपंच के लिए प्रत्याशी बनना स्वीकार किया। चुनाव में सात महिलाआ प्रत्याशियों को पीछे धकेलकर उन्होंने जीत दर्ज की। विमला देवी मृदुभाषी हैं तथा समाज के हर वर्ग के लोगों के सुख दुख में हिस्सा लेती हैं। उन्होंने अपनी पहचान पंचायत की सर्वाधिक लोकप्रिय महिला के रूप में बना रखी है जिसका फायदा उन्हें 2015 में सरपंच के चुनाव में मिला। वर्तमान में विमला देवी एक सफल प्रतिनिधि के रूप में गांव के विकास को नई दिशा देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। सरपंच पर आसीन होने के बाद उन्होंने पंचायत में विकास के अनेकों काम किए हैं जिसका फायदा पंचायत के सभी वर्गों के लोगों को हुआ है। कोलसिया ग्राम पंचायत का आस-पड़ोस की अन्य ग्राम पंचायत मुख्यालयों को जोड़ने वाली सड़कों की हालत अत्यंत दुर्गम थी जिसमें परसरामपुरा की ओर जाने वाले रास्ते की स्थिति सबसे भयावह थी। महिला सरपंच ने प्रयास कर पूरे रास्ते पर डामरीकरण सड़क बनवाकर लोगों को राहत प्रदान की। इसके अलावा महिला सरपंच ने ग्राम पंचायत गोठड़ा तथा कारी के आम रास्तों पर सड़क मंजूर करवाकर लोगों को आवागमन में सुविधा प्रदान की। वास्तव में कोलसिया ग्राम पंचायत के रास्तों की स्थिति इतनी भयावह थी कि दूसरे गांवों के लोग कोलसिया में अपनी बेटियों की शादी करना भी पसंद नहीं करते थे।
         
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आज़ादी के 70 साल बाद भी 8 हज़ार से अधिक आबादी वाले कोलसिया ग्राम में लोगों को पेयजल के लिए रस्सी-बाल्टी व मटकों पर निर्भर रहना पड़ता था। सरपंच का पदभार संभालने के बाद ही विमला देवी ने गांव में उच्च जलाशय का निर्माण करवाया व घर-घर पाईप लाइन से पेयजल पहुंचाकर राहत प्रदान की। विमला देवी ने पंचायत में चिकित्सा सुविधाओं को दुरूस्त करने के लिए भी ज़रूरी कदम उठाए। ग्राम कोलसिया में सामुदायिक चिकित्सालय स्वीकृत हो रखा था किन्तु भवन निर्माण के लिए पर्याप्त जगह न मिलने की वजह से एक पुराने मकान में इस चिकित्सालय का संचालन किया जा रहा था। विमला देवी ने ग्राम पंचायत के पास पहले से उपलब्ध भूमि के पास वाली भूमि के मालिक को भामाशाह के रूप में पोत्साहित किया तथा भूमिदान कराकर उसको स्वास्थ्य विभाग को सुपुर्द कर दिया ताकि सामुदायिक चिकित्सालय का भवन तैयार हो सके तथा पंचायत के लोगों को चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। भवन निर्माण के लिए बजट आवंटित हो चुका है तथा निर्माण कार्य भी जल्द ही आरंभ होने वाला है। मुख्यमंत्री जल स्वाबलंबन योजना के तहत गरीब व ज़रूरतमंद परिवारों का चयन कर 50 से अधिक जलकुण्डों का निर्माण करवाया जिससे परिवार अपनी आवश्यकतानुसार जल ग्रहण कर पानी की समस्या से निजात पा सकते हैं। साथ ही साथ गरीब परिवारों का चयन कर उन्हे कैटल शेड बनवाकर दिए जिसके निर्माण ग्राम पंचायत के माध्यम से राजकीय फंड से करवाया गया। इससे गरीब परिवार अपने पशुधन की सुरक्षा कर पा रहे है। 
        
ग्राम कोलसिया में उच्च जलाशय से पेयजल पहुचाने के लिए घर-घर पाईप लाइन बिछाने के लिए आम रास्तों पर बनी सड़कों को तोड़ा जिसके फलस्वरूप रास्ते काफी बेकार हो गए थे। महिला सरपंच ने प्रयास कर विधायक कोष व अन्य स्रोतों से स्वीकृतियां लेकर रास्तों को ठीक करवाया। गांव के गरीब परिवारों को सुकन्या एवं उज्जल योजना तथा बच्चों को पालनहार योजना से जोड़कर राहत प्रदान की। ग्राम कोलसिया को शहरी तर्ज पर विकसित करने के लिए ग्राम गौरव पथ स्वीकृत करवाया। जिससे मुख्य रास्ते के पक्का होने से लोगों को काफी राहत मिलेगी। गांव में गंदे पानी की निकासी के लिए पक्की नालियों का निर्माण करवा रही हैं। इसके अलावा रास्तों पर एलईडी बल्ब लगाने की योजना को स्वीकृति प्राप्त हुई है। पंचायत में लोगों को विधवा पेंशन, विकलांग जन पेंशन व वृध्दावस्था पेंशन से जोड़ने का प्रयास निरंतर जारी है। इसी तरह का एक जीता जागता उदाहरण झुन्झुनू ज़िले की नवलगढ़ तहसील के बाय पंचायत की महिला सरपंच श्रीमती तारादेवी पूनिया का है। तारादेवी को पंचायत में लोग उनके काम की बदौलत जानते हैं। स्नातक तक पढ़ी-लिखी होने के कारण महिला सरपंच अपने अधिकारों और कर्तव्यों को भलीभांति जानती हैं। इस कारण महिला सरपंच पंचायत में विकास के कार्यों को एक नया आयाम दे रही हैं। 
          
सरपंच का पद ग्रहण करने के बाद सबसे पहले महिलाओं के हितों के लिए कार्य करना शुरू किया। इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए ग्रामीण महिलाओं की स्वयं एवं उनके बच्चों को शिक्षा के प्रति चेतना जागृत करने के लिए मिशन भाव से कार्य आरंभ किया। तारादेवी का यह अभियान जनचेतना का सैलाब बनकर आगे बढ़ने लगा जिसका परिणाम पंचायत के राजकीय विद्यालयों स्कूलों में बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन व उपस्थिति के रूप में सामने आया। सरकारी स्कूलों की दिन प्रतिदिन गिरती हुई स्थिति को देखकर तारादेवी ने अपने नेतृत्व के बल पर स्कूलों की स्थिति को बदलने के कड़े प्रयास किए। इस प्रयास का परिणाम सत्र 2016-17 के  परीक्षा परिणामों में साफ दिखाई दिया। इस परीक्षा परिणाम में पूरे झुन्झुनु ज़िले में शत-प्रतिशत परिणाम के साथ-साथ वाणिज्य वर्ग में सर्वाधिक 93 प्रतिशत अंक लाने वाली विद्यार्थी गांव के राजकीय विद्यालय की थी। इस प्रकार तारादेवी ने अपनी कड़ी मेहनत और अथक प्रयासों से सरकारी स्कूलों में बच्चों के गिरते नामांकन को न सिर्फ रोका बल्कि शानदार रिजल्ट के माध्यम से नई उंचाईयों तक भी पहुंचा दिया। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य करने के बाद इनका ध्यान ग्रामीण अशिक्षित और बेरोज़गार पुरूषों पर गया जो बेकारी के कारण शराब, चिलम, गांजा जैसी नशे की प्रवृत्ति के आदी हो रहे थे। तारादेवी ने लोगों को जागरूक कर गांव में शराबबंदी करवायी व पंचायत को शराबमुक्त कर झुन्झुनू ज़िले में एक महिला प्रतिनिधि के रूप में अपनी सफलता के झंडे गाड़े। पंचायत में अपराधी तत्वों पर लगाम लगाने के लिए तारादेवी ने एक नई पहल करते हुए आम रास्तों एवं मुख्य चैक पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए ताकि अपराधियों पर शिकंजा कसा जा सके। तारादेवी की इस पहल की ज़िला प्रशासन ने खूब प्रशंसा की और अपराधों पर पूर्णतया नियंत्रण संभव हो सका। 
            
विकास की राह पर आगे बढ़ते हुए महिला सरपंच सदैव इस बात के लिए चिंतन करती रहतीं कि पंचायत में लोगों की आमदनी का स्तर कैसे बढ़ाया जाए। इसी दौरान महिला सरपंच के दिमाग में एक बात आई कि पंचायत की ज़्यादातर महिलाएं सुबह ही घर का काम करने के बाद 11 बजे से लेकर शाम 3 बजे तक बिल्कुल खाली रहती हैं। इस समय का उपयोग कर पंचायत की महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं। महिला सरपंच ने यह भी सोचा कि महिलाओं को इस तरह का ही कार्य मिलना चाहिए जिसको वह घर पर रहकर ही कर सकें। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए महिला सरपंच ने पंचायत में स्वयं सहायता समूहों का गठन कर महिलाओं को बुन्दी-बंधेज, रंगाई-छपाई, सिलाई, पशुपालन व डेयरी आदि कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया। इसी का ही नतीजा है कि आज पंचायत की ज़्यादातर महिलाएं किसी न किसी काम धंधे में लगकर अपनी आजीविका कमा रही हैं। तारादेवी ने अपनी पंचायत में नरेगा के तहत नए-नए काम करवाए जिसमें बड़ी तादाद में महिलाओं व पुरूषों को रोज़गार मिला। महिला सरपंच की कोशिशों से ही परिवार की आमदनी का स्तर बढ़ा। इस प्रकार स्वरोज़गार की जानकारी प्राप्त कर ग्रामीण महिलाएं नये-नये व्यवसायों से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक मज़बूती प्रदान करने लगीं।
         
अनिता सिंह ने भी अपनी पंचायत में अपने कामों की बदौलत एक अलग मकाम बनाया हुआ है। अनिता सिंह छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के अम्बिकापुर ब्लाक के रजपुरीखुर्द ग्राम पंचायत की सरपंच हैं। सरपंच के पद पर यह उनका दूसरा कार्यकाल है। पहली बार वह 2010 में जबकि दूसरी बार 2015 में सरपंच चुनी गईं। सरपंच के पद पर दो बार चुने जाने के कारण उन्हें अपने पंचायत के कार्योें की अच्छी जानकारी है। पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्रो का निर्माण कराया। 3 आंगनबाड़ी केंद्रो का निर्माण पूरा हो चुका है तीन का कार्य प्रगति पर है जबकि एक के लिए शासन को प्रस्ताव जा चुका है।  प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 20-25 लोगों को आवास दिलवाया। दैनिक जीवन की आवश्यकताओं व पीने के पानी के लिए 27 हैंडपंप लगवाए। दिलचस्प बात यह है कि पंचायत को शौचमुक्त बनाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र के अंर्तगत पंचायत में लड़कियों का एक समूह है जो खुले में शौच करने वाले लोगों पर 100 रूपये जुर्माना डालता है। इस समूह में पंचायत की छह लड़कियां हैं जो सुबह सात बजे से लेकर आठ बजे तक पंचायत में ऐसे लोगों पर निगरानी रखती हैं जो खुले में शौच करते हैं। इस समूह को गांव के लोग आरेंज कमांडो के नाम से जानते हैं। आरेंज कमांडों समूह में शामिल पूनम कहती हैं कि-‘‘ हमारे इस समूह में कुल छह लड़कियां हैं। हम खुले में शौच करने वाले लोगों पर सौ रूपये जुर्माना डालते हैं। इस कारण लोग हमसे डरते हैं। हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि हमारी पंचायत में अब खुले में शौच करने वाले लोग खत्म हो चुके हैं। इस दस्ते के लिए ज़्यादातर बोलने वाली लड़कियों का चयन आंगनबाड़ी केंद्र के ज़रिए किया जाता है। इसके अलावा पंचायत को शौच मुक्त बनाने में सरपंच का बड़ा योगदान रहा है। उनके ज़रिए पंचायत में अब तक 540 शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है।’’
           
अनिता सिंह ने अपने कार्यकाल में पंचायत के हाडूरपारा मोहल्ले में प्राईमरी स्कूल व मोहल्ला घुटरापार में मीडिल स्कूल बनवाया है। इसके अलावा साल 2016 में राशन की दुकान का निर्माण कराकर उसको चालू कराया। रजपुरीखुर्द के मीडिल स्कूल की चारदीवारी करवायी। नरेगा के तहत गांव में पानी की निकासी के लिए 5 नालियों व मेढ़बदी का निर्माण कराया। पंचायत फंड से हैंडपंप के पास स्नान घरों का निर्माण कराया ताकि लोग आसानी से स्नान कर सकें। शादी-ब्याह के मौके पर ज़्यादा लोग होने की वजह से पंचायत भवन के पास शौचालयों का निर्माण कराया। इसके अलावा वर्षा जल संरक्षण के लिए पंचायत में एक तालाब को गहरा कराया। आज कल तालाब के पानी का इस्तेमाल पशुओं के पीने व कपड़े धोेने में होता है। पंचायत में प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया। 127 लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रतिक्षा सूची में शामिल है जिसमें से 10 लोगों को आवास मिल चुका है। अनिता सिंह के कामों के बारे में पंचायत की एक एमए पास लड़की विध्यवाशनी यादव का कहना है कि-‘‘ अनिता सिंह ने पंचायत में विकास के बहुत सारे काम किए हैं। आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराने के साथ-साथ पंचायत में पानी की निकासी के लिए नालियों का निर्माण कराया। मनरेगा के तहत लोगों को रोज़गार से जोड़ा। इन्होंने महिला होते हुए भी पूर्व सरपंच के मुकाबले बहुत ज़्यादा काम किया है।’’

पारिवारिक ज़िम्मेदारी के बावजूद नीलू पैंकरा अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी अंजाम दे रही हैं। नीलू पैंकरा छत्तीसगढ़ के सरगुजा ज़िले के अम्बिकापुर ब्लाक के रनपुरखुर्द ग्राम पंचायत की सरपंच हैं। राज्य में 2015 के पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने की वजह से इन्हें सरपंच बनने का मौका मिला। परिवार व गांव वालों ने उन्हें सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। नीलू पैंकरा ने 5 महिला प्रतिद्वंदियों को हराकर सरपंच की सीट हासिल की। नीलू पैंकरा के कार्यकाल में पंचायत में एक 150 मीटी सीसी रोड का निर्माण मज़ार से लेकर मोहल्ला सरनापारा तक किया गया। पंचायत में पानी की भारी किल्लत थी । पंचायत में ज़्यादातर आबादी उंचाई पर स्थित होने की वजह से बोरिंग करने में बहुत दिक्कत होती है। लिहाज़ा निचले में बोरिंग कराकर पंचायत के लोगों को पानी की समस्या से निजात दिलाई। पीने के पानी के लिए दो हैंडपंप लगवाए। ग्राम पंचायत के मोहल्ला बेनीपुर से तकरीबन पूरे अंबिकापुर को बांक नदी पर बने प्लांट से पानी मिलता है। मगर रनपुरखुर्द ग्राम पंचायत को अभी तक इस प्लांट से पानी नसीब नहीं हुआ है। पंचायत में 3 आंगनबाड़ी बिल्डिंग का निर्माण हो चुका है जबकि एक अभी भी निर्माणाधीन अवस्था में हैं। तकरीबन पौने पांच सौ शौचालय का निर्माण कराकर पंचायत को शौचालय मुक्त बनाने के लिए लगातर प्रयासरत हैं।
         
एक बात सच है कि पंचायती राज व्यवस्था के चुनाव में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं की स्थानीय शासन में सहभागित ज़रूर बढ़ी है। बहुत सी महिलाएं इस आरक्षण का लाभ उठाकर स्थानीय शासन में काफी अच्छी भूमिका निभा रही हैं। वास्तव में कमला देवी, तारादेवी पूनिया, अनिता सिंह व नीलू पैंकरा स्थानीय शासन में अपनी सक्रिय भूमिका निभाकर वास्तव में आरक्षण उद्देश्य सार्थक कर रही हैं। 




(गौहर आसिफ)
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