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मंगलवार, 7 अगस्त 2018

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी की पुस्तक का किया विमोचन

'टेन आइडियोलॉजीज'  द ग्रेट एसिमिट्री बिटवीन एग्रेरिएनिज्म एंड इंडस्ट्रिएलिज्म, ओरिएंट ब्लैकस्वन ने किया है प्रकाशन
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नई दिल्ली, 7 अगस्त, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कंस्टीट्यूशन क्लब में पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी की पुस्तक का विमोचन किया। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में अशोका युनिवर्सिटी के वीसी प्रो. प्रताप भानू मेहता, डीयू की प्रोफेसर रहीं डॉ. नीरा चंडोक समेत बड़ी संख्या में शिक्षाविद व शोधार्थी मौजूद थे। पुस्तक का नाम 'टेन आइडियोलॉजीज: द ग्रेट एसिमिट्री बिटवीन अग्रेरिएनिज्म एंड इंडस्ट्रिएलिज्म' है। इसका प्रकाशन ओरिएंट ब्लैकस्वन ने किया है। जयपाल रेड्डी मानते हैं कि विचारधाओं की भूमिका बेहद अहम रही है। अगर सामाजिक आदर्श खत्म होते हैं तो उसकी जगह धर्म, जाति व राष्ट्र जैसी रूढ़िवादी विचारधाएं दुबारा से उठ खड़ी होती हैं। यह आगे चलकर समाज में गहरी खाई पैदा करती हैं। जयपाल रेड्डी के मुताबिक, मौजूदा वक्त में मुझे विचारधाराओं के अहंकार व राजनीति से खत्म होती बौद्धिकता परेशान करती है। आज राजनैतिक परिदृश्य में वैचारिक विमर्श गायब से हो गए हैं, लोगों को भी इससे ज्यादा मतलब नहीं। इस दशक में मैं इस वजह से गहरे तक व्यथित हूं कि वैचारिक बहसें, बौद्धिक विमर्श के लिए आज कोई जगह ही नहीं बची है। इन्हीं हालातों में मेरे जेहन में यह पुस्तक आकार लेती है। जिसका आज विमोचन हो रहा है। कोशिश यही है कि राजनीतिक प्रक्रियाओं से जुड़े विमर्श वैचारिक धरातल पर हों। 'टेन आइडियोलॉजीज' में श्री रेड्डी ने वैश्विक इतिहास का खाका खींचा है। साथ ही चार एतिहासिक आंदोलनों का भी अध्ययन किया है; औद्योगिक क्रांति, पुनर्जागरण, मानववाद व प्रोटेस्टेंट सुधार और वैज्ञानिक क्रांति। श्री रेड्डी इसमें यह भी बताते हैं कि इन महान आंदोलनों ने किस तरह से भारत, चीन व पश्चिम एशिया पर अपना असर डाला।  पुस्तक में जिन दस विचारधाराओं पर चर्चा की गई है, वह हैं; राष्ट्रवाद, लोकतंत्र, उदारीकरण, पूंजीवाद, विकासमूलक समाजवाद, क्रांतिकारी समाजवाद, नारीवाद, पर्यावरणवाद, न्यूक्लियर शांतिवाद, भूमंडलीकरण।  श्री रेड्डी अपनी पुस्तक में दूसरी ऐसी कई समस्याओं का भी जिक्र करते हैं, जिसका आज हम सभी सामना कर रहे हैं और जो आधुनिकता का अनुषंगी परिणाम है। तकनीक के बेलगाम इस्तेमाल व जलवायु परिवर्तन के खतरे से भी पुस्तक पाठकों को आगाह करती है। इसके आलवा युद्धों से ध्वस्त दुनिया में यह पुस्तक न्यूक्लियर शांतिवाद की भी राह दिखाती है। इसमें पर्यावरण मित्र व समरसता पूर्ण विश्व की जोरदार ढंग से वकालत की गई है। 'टेन आइडियोलॉजीज' सिर्फ शोधार्थियों के लिए ही नहीं, वैश्विक बदलावों व उसके असर को जानने/समझने में दिलचस्पी रखने वाले आम पाठक लिए भी फायदेमंद होगी। 
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