दुमका : झारखण्ड-प0 बंगाल के बीच मसानजोर डैम विवाद - Live Aaryaavart

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बुधवार, 8 अगस्त 2018

दुमका : झारखण्ड-प0 बंगाल के बीच मसानजोर डैम विवाद

 मसानजोर डेम विवाद शीघ्र ही सुलझा लिया जाएगा- डीसी 
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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) वीरभूम प्रशासन के साथ प्रशासनिक बातचीत से मसानजोर डैम विवाद का हल शीघ्र ही ढ़ूढ़ लिया जाएगा। वीरभूम प्रशासन के साथ दुमका प्रशासन लगातार संपर्क बनाए हुए है। डीसी दुमका मुकेश कुमार ने दिन बुधवार को दुमका, सिउड़ी व बोलपुर के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में उपरोक्त बातें कही। मालूम हो वीरभूम जिला से एडीएम (विकास) रंजन कुमार झा व कार्यपालक अभियंता (मयूराक्षी डिविजन) किंगसुक मंडल ने डीसी दुमका से दोपहर मुलाकात कर मसानजोर मुद्दे पर तकरीबन एक घंटे की वार्ता की। वीरभूम के एडीएम (विकास) रंजन कुमार झा ने कहा डीसी दुमका के साथ हुई वार्ता को वे वीरभूम जिला प्रशासन के समक्ष रखेंगे। दोनों स्तर पर अगली मुलाकात में मुद्दे पर शेष वार्ताएँ होंगी। डीसी दुमका मुकेश कुमार ने कहा वीरभूम प्रशासन के प्रतिनिधियों के साथ पाॅजिटिव बातचीत हुई है। शीघ्र ही अगली बैठक पर मामले का निष्पादन कर लिया जाएगा। उन्हांेने कहा श्रावणी मेला में पूरी व्यस्तता की वजह से वार्ता अभी संभव नहीं है। श्रावणी मेला की समाप्ति के बाद इस मुद्दे पर बातचीत प्रारंभ कर दी जाएगी। उन्होंने कहा दिन बुधवार की बैठक में जेनरल बातें हुई है। उन्होंने कहा प. बंगाल व झारखण्ड के बीच तनाव की कोई स्थिति नहीं है। झारखण्ड-प. बंगाल सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिकांश लोग बंग्लाभाषी हैं जहाँ लाॅ एण्ड आॅर्डर की कोई समस्या नहीं है। डीसी श्री कुमार ने कहा कि मामले को तील का ताड़ न बनने दिया जाए। यह प्रशासनिक लड़ाई नहीं है। एक पार्टी विशेष के लोगांें ने मसानजोर डैम की दिवारों पर प. बंगाल सरकार द्वारा रंग-रोगन के मामले को उठाया गया था। मसानजोर डैम वर्ष 1956 में बना है। गायन्ट्री इश्यू पर एडीएम (वीरभूम) ने सारी बातें रखी है। बंगाल वर्सेस झारखण्ड वाली कोई स्थिति नहीं है। लाॅ एण्ड आॅर्डर की स्थिति पर अपनी भावनाओं से उन्हें अवगत करा दिया गया है। मसानजोर डैम से प. बंगाल को पानी रोक देने के सवाल पर डीसी मुकेश कुमार ने कहा ऐसी कोई बात नहीं है। सिनियर आॅफिसर्स के माध्यम से बंगाल के आॅफिसर्स को इसकी पूरी जानकारी से अवगत करा दिया गया है। अच्छे माहौल में बातचीत होगी। ऐसा न हो कि रानेश्वर-सिउड़ी के वाशिंदे आतंकित हों। डाॅक्यूमंेंट्स के आधार पर ही कोई फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा मसानजोर डैम विस्थापितों को अभी तक संपूर्ण मुआवजा प्राप्त नहीं हो सका है। डीसी ने कहा मीडिया में कई तरह की बातें पढ़ने को मिली है। मीडियाकर्मियों से आग्रह है कि वे पूरी वस्तुस्थिति का आकलन करते हुए मैसेज आगे बढ़ाऐं। विदित हो मसानजोर का विवाद अचानक सुर्खियों में तब आया जब प. बंगाल सरकार के सिचाई विभाग द्वार पौने दो करोड़ की लागत से मसानजोर डैम की दिवारों पर  प. बंगाल सरकार की पार्टी तृणमूल काॅग्रेस के पार्टी झडे के कलर पर रंगाई का कार्य चल रहा था। इस आशय की जानकारी के बाद भाजयुमांे ने कड़ा विरोध किया। जिलाध्यक्ष निवास मंडल के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओ ने इसका कड़ा विरोध किया था। भाजपा कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद रंगाई का काम स्थगित कर दिया गया किन्तु झारखण्ड की धरती पर प0 बंगाल सरकार आपका स्वागत करती है के लगे बोर्ड को  भाजपा कार्यकर्ताओं ने हटाकर झारखण्ड सरकार का बोर्ड लगा दिया था। बाद में प0 बंगाल सरकार के सरकारी कारिंदो ंने झारखण्ड सरकार के लगे बोर्ड को हटा कर पुनः प. बंगाल सरकार का बोर्ड लगा दिया था। दिन रविवार को दुमका की विधायक डाॅ0 लुईस मराण्डी ने मसानजोर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मसानजोर डैम की तरह जो भी आॅख उठाकर देखेगा, उसकी आँखें वे निकाल लेंगी। सूबे की समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री डाॅ. लुईस मराण्डी के इस बयान पर झारखण्ड मंे प्रतिप़क्ष के नेता हेमन्त सोरेन ने डाॅ. लुईस मराण्डी के बयान को तालीबानी शासन करार देते हुए कहा कि राज्य के डीजीपी जहाँ छः इंच छोटा करने की बातें करते हैं वहीं सूबे की महिला मंत्री आँखें निकाल लेने की। पूर्व मुख्यमंत्री व प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन के इस बयान का खंडन करते हुए डाॅ. लुईस मराण्डी ने कहा कि हेमन्त सोरेन दूसरे को सिखाया न करें। उन्होंने खुद तालीबानी फरमान जारी कर दुमका में कहा था कि झारखण्ड में खून की नदियाँ बह जाएगी। तालीबानी फरमान उनका था। डाॅ0 मराण्डी ने कहा राज्य के निवासियों की भलाई के लिये तथा दुमका की जनता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी बातें रखी थी। डाॅ. मराण्डी ने कहा हेमन्त सोरेन को अभी बहुत कुछ सीखना है। प0 बंगाल सरकार के पार्टी झंडा के कलर पर मसानजोर की दिवारों पर रंग-रोगन तथा झारखण्ड की धरती पर जबरन प0 बंगाल द्वारा वेलकम टू वेस्ट बंगाल गर्वमेंट के लगे बोर्ड पर संसद में भी काफी हंगामा हुआ। यह मुद्दा पूरी तरह राष्ट्रीय मुद्दा बन गया। गोड्डा के भाजपा संासद निशिकांत दूबे ने मामले को पूरी प्रमुखता के साथ उठाया तथा प. बंगाल सरकार की झारखण्ड पर दादागिरी से संसद को अवगत कराया। निशिकांत दूबे ने कहा प. बंगाल सरकार के साथ करार कब का पूरा हो चुका है। ऐसे मे प. बंगाल सरकार द्वारा झारखण्ड में दादागिरी का हल ढ़ूँढ़ा जाना चाहिए। बहरहाल मामले पर कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन दुमका व वीरभूम प्रशासन (प. बंगाल) इस मुद्दे पर समाधान क्या निकालते हैं। 
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