पटना (आर्यावर्त डेस्क) 1 अगस्त, वाम दलों द्वारा आहूत 2 अगस्त के बिहार बंद की पूर्व संध्या पर राजधानी पटना सहित राज्य के प्रमुख जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकाला गया. पटना में जीपीओ गोलंबर से मशाल जुलूस निकला और स्टेशन गोलंबर होते हुए बुद्धा स्मृति पार्क तक पहुंचा जहां एक सभा आयोजित हुई. सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कल के बिहार बंद को सफल बनोन की अपील की. मशाल जुलूस में भाकपा-माले, सीपीआई, सीपीआईएम, एसयूसीआईसी, आरएसपी और फारवर्ड ब्लाॅक के नेता कार्यकर्ता शामिल थे. मुख्य रूप से माले के पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा, सीपीआई के जानकी पासवान, सीपीआईएम के गणेश प्रसाद सिंह, ऐपवा की सरोज चैबे, बिहार महिला समाज की निवेदिता झा, रवीन्द्र नाथ राय, एसयूसीआईसी के सुमन कुमार, माले के अभ्युदय आदि नेता मशाल जुलूस में शामिल थे. इन नेताओं के अलावा आइसा-इनौस, एआइएसफ-एआईवाईएफ, एसएफआई-डीवाईएफआई, एआईडीएसओ-एआईडीवाईओ, आशाकर्मी, आंगनबाड़ी, टेंपो यूनियन के नेता, सांस्कृतिक संगठन कोरस आदि संगठनों के नेता कार्यकर्ता मशाल जुलूस में शािमल थे. संगठन के नेताओं ने कहा कि मुजफ्फरपुर की घटना से आज पूरा बिहार शर्मसार है. ऐपवा और अन्य महिला संगठनों ने इस विषय पर शुरूआती दिनों से ही पहलकदमी ले रखी है. उन संघर्षों का ही नतीजा है कि आज इस मामले की सीबीआई जांच के लिए तैयार हुई है. लेकिन इतना भर से काम नहीं चलने वाला है. हमारी मांग है कि पटना उच्च न्यायालय के निर्देशन में मुजफ्फरपुर सहित सभी अल्पावासों, रिमांड होमों की जांच कराई जाए, टाटा इंस्ट्च्यिूट आफ सोशल साइंस की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा व भाजपा कोटे से मंत्री सुरेश शर्मा को बर्खास्त किया जाए और चंद्रशेखर वर्मा को अविलंब गिरफ्तार किया जाए. नेताओं ने बिहार के छात्र-युवाओं, महिलाओं, दलित-गरीबों और न्यायप्रिय नागरिकों से बिहार बंद को सक्रिय समर्थन देने की अपील की है ताकि मुजफ्फरपुर यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और बिहार को शर्मसार होने से बचाया जा सके.
पटना (आर्यावर्त डेस्क) 1 अगस्त, वाम दलों द्वारा आहूत 2 अगस्त के बिहार बंद की पूर्व संध्या पर राजधानी पटना सहित राज्य के प्रमुख जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकाला गया. पटना में जीपीओ गोलंबर से मशाल जुलूस निकला और स्टेशन गोलंबर होते हुए बुद्धा स्मृति पार्क तक पहुंचा जहां एक सभा आयोजित हुई. सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कल के बिहार बंद को सफल बनोन की अपील की. मशाल जुलूस में भाकपा-माले, सीपीआई, सीपीआईएम, एसयूसीआईसी, आरएसपी और फारवर्ड ब्लाॅक के नेता कार्यकर्ता शामिल थे. मुख्य रूप से माले के पोलित ब्यूरो के सदस्य धीरेन्द्र झा, सीपीआई के जानकी पासवान, सीपीआईएम के गणेश प्रसाद सिंह, ऐपवा की सरोज चैबे, बिहार महिला समाज की निवेदिता झा, रवीन्द्र नाथ राय, एसयूसीआईसी के सुमन कुमार, माले के अभ्युदय आदि नेता मशाल जुलूस में शामिल थे. इन नेताओं के अलावा आइसा-इनौस, एआइएसफ-एआईवाईएफ, एसएफआई-डीवाईएफआई, एआईडीएसओ-एआईडीवाईओ, आशाकर्मी, आंगनबाड़ी, टेंपो यूनियन के नेता, सांस्कृतिक संगठन कोरस आदि संगठनों के नेता कार्यकर्ता मशाल जुलूस में शािमल थे. संगठन के नेताओं ने कहा कि मुजफ्फरपुर की घटना से आज पूरा बिहार शर्मसार है. ऐपवा और अन्य महिला संगठनों ने इस विषय पर शुरूआती दिनों से ही पहलकदमी ले रखी है. उन संघर्षों का ही नतीजा है कि आज इस मामले की सीबीआई जांच के लिए तैयार हुई है. लेकिन इतना भर से काम नहीं चलने वाला है. हमारी मांग है कि पटना उच्च न्यायालय के निर्देशन में मुजफ्फरपुर सहित सभी अल्पावासों, रिमांड होमों की जांच कराई जाए, टाटा इंस्ट्च्यिूट आफ सोशल साइंस की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा व भाजपा कोटे से मंत्री सुरेश शर्मा को बर्खास्त किया जाए और चंद्रशेखर वर्मा को अविलंब गिरफ्तार किया जाए. नेताओं ने बिहार के छात्र-युवाओं, महिलाओं, दलित-गरीबों और न्यायप्रिय नागरिकों से बिहार बंद को सक्रिय समर्थन देने की अपील की है ताकि मुजफ्फरपुर यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और बिहार को शर्मसार होने से बचाया जा सके.
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