असग़र वजाहत की चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 29 सितंबर 2018

असग़र वजाहत की चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन

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नई दिल्ली।  ये चित्र एक लेखक के बनाए हैं ऐसा नहीं लगता क्योंकि इनमे निहित विशेष ताज़गी बताती हैं कि इन्हें किसी सिद्धहस्त चित्रकार ने बनाया है। विख्यात कला समीक्षक और लेखक प्रयाग शुक्ल ने उक्त विचार सुप्रसिद्ध कथाकार - नाटककार असग़र वजाहत के चित्रों की प्रदर्शनी के उदघाटन समारोह में व्यक्त किये। शुक्ल ने कहा कि असग़र विनम्रता से कहते हैं कि मैं चित्रकार नहीं लेखक हूँ लेकिन उन्होंने रंगों के प्रयोग और प्रस्तुतीकरण की विविधता से चौंका दिया है। ऑल इंडिया फाइन आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स सोसायटी की कला वीथी में आयोजित इस प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में हिंदी के चार कवियों ने काव्य पाठ किया।  पंखुरी सिन्हा, सीरज सक्सेना, विष्णु नागर और मंगलेश डबराल के काव्य पाठ को कला वीथी में चित्रों के बीच सुनना दर्शकों के लिए नया और आह्लादकारी अनुभव था। प्रदर्शनी के क्यूरेटर तथा काव्य पाठ का संयोजन  कर रहे प्रयाग शुक्ल ने दिल्ली के सांस्कृतिक परिदृश्य में इसे यादगार अनुभव बताया।

काव्य पाठ में मंगलेश डबराल ने 'रात और दिन', 'मेरा दिल', 'सुनो शब्दार्थ' तथा 'भूत' कविताओं का पाठ किया वहीं विष्णु नागर ने अपने संग्रह 'घर के बाहर घर' से कुछ मर्मस्पर्शी कविताओं का पाठ किया। उदघाटन समारोह में असग़र वजाहत ने  प्रयाग शुक्ल को इस प्रदर्शनी का श्रेय देते हुए कहा कि उनके उत्साहवर्धन से ही यह सम्भव हुई है। ज्ञातव्य है कि भारत में असग़र वजाहत के चित्रों की प्रदर्शनी पहली बार लगी है यद्यपि पिछले माह ही  हंगरी के शहर बुदापेश्त में उनके चित्रों का प्रदर्शन हुआ था।    

आयोजन में नया पथ के सम्पादक मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, आलोचना के सम्पादक संजीव कुमार, आलोचक रेखा अवस्थी, कथाकार वंदना राग , कवि लीलाधर मंडलोई, कथाकार मधुसूदन आनंद, बनास जन के सम्पादक पल्लव, समीक्षक श्याम सुशील, लेखक मधुकर उपाध्याय, प्रकाशक मीरा जौहरी सहित बड़ी संख्या में साहित्य और कला प्रेमी उपस्थित थे। प्रदर्शनी 4 अक्टूबर तक चलेगी और समापन की पूर्व संध्या पर 3 अक्टूबर को 'कला और कविता में अमूर्तन' विषय पर एक परिसंवाद आयोजित किया जाएगा। 

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