बिहार : सूबे में बहुत बड़ी जनसंख्या रोजगार के लिए मछली उत्पादन पर निर्भर : कृष्ण कन्हैया - Live Aaryaavart

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बुधवार, 19 सितंबर 2018

बिहार : सूबे में बहुत बड़ी जनसंख्या रोजगार के लिए मछली उत्पादन पर निर्भर : कृष्ण कन्हैया

  • - राज्य में 3200 किमी नदी, 1 लाख हेक्टेयर चैर एवं आर्द्रभूमि, 9000 हेक्टेयर माॅन, 7200 हेक्टेयर जलाशय एवं 93296 हेक्टेयर तालाब मौजूद है
  • - बहुतायात में मात्स्यिकी संसाधन बिहार में रहते हुए भी यहां मांग से बेहद कम मछली उत्पादन होता है
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पूर्णिया (कुमार गौरव) :  भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय पूर्णिया के द्वारा आयोजित पांच दिवसीय आत्मा, दरभंगा बिहार द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम विषय : मखाना उत्पादन एवं प्रसंस्करण तकनीक के तकनीकी सत्र के तीसरे दिन मुख्य वक्ता डाॅ पारसनाथ, सह अधिष्ठाता सह प्राचार्य, भोला पासवान शास्त्री कृषि महाविद्यालय ने विगत तीन दिनों से चल रहे प्रशि़क्षण कार्यक्रम प्रशिक्षणर्थियों से फीडबैक लिया। उन्होंने मखाना फसल में कीट प्रबंधन के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि खेत पद्धति मखाना पौध की रोपाई से पूर्व इमिडाक्लोरपिड 70 या थायोमेथोक्सैम 25.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर उसके जड़ को आधा घंटा तक उस घोल में डुबोकर शोधित करना चाहिए। मखाना पौधे की रोपाई के 40 दिनों बाद 5 प्रतिशत नीम तेल का घोल 25 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए। तालाब पद्धति मखाना पौध की रोपाई के 40 दिनों बाद 5 प्रतिशत नीम तेल का घोल 25 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए।

...मांग के अनुपात में उत्पादन है कम : 
जिला मत्स्य पदाधिकारी, पूर्णिया कृष्ण कन्हैया ने मत्स्यपालन के लिए सरकारी की कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में किसानों को विस्तारपूर्वक बताया। साथ ही मत्स्यपालन की वैज्ञानिक विधि भी बताई। उन्होंने मखाना सह मत्स्यपालन की संभावना तथा मखाना के देसी मंागुर की खेती पर विशेष बल दिया। श्री कृष्ण ने बताया कि बिहार की अर्थव्यवस्था मुख्य रुप से कृषि, पशुपालन एवं मत्स्यपालन पर आधारित है। राज्य में मत्स्य पालन, पोषण सुरक्षा एवं रोजगार के लिए वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है। सूबे में बहुत बड़ी जनसंख्या रोजगार के लिए मछली उत्पादन पर निर्भर करती है। राज्य को गंगा नदी दो भागों में विभाजित करती है। उत्तर में नेपाल, पूरब में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तरप्रदेश एवं दक्षिण में झारखंड राज्यों से जुड़ा हुआ है। बिहार राज्य में 3200 किमी नदी, 1 लाख हेक्टेयर चैर एवं आर्द्रभूमि, 9000 हेक्टेयर माॅन, 7200 हेक्टेयर जलाशय एवं 93296 हेक्टेयर तालाब मौजूद है। बहुतायात में मात्स्यिकी संसाधन बिहार में रहते हुए भी यहां मांग से बेहद कम मछली उत्पादन होता है। बिहार राज्य में मत्स्य पालन के लिए जल संसाधन के रुप में 69000 हेक्टेयर तालाब, 9000 हेक्टेयर माॅन, 7276 हेक्टेयर जलाशय एवं 1 लाख हेक्टेयर चैर उपलब्ध है। वर्तमान में बिहार राज्य में 3.60 लाख टन मछली का उत्पादन प्रतिवर्ष होता है। 4.56 लाख टन मछली का प्रतिवर्ष बिहार राज्य में खपत होता है। मांग की अधिकता के कारण पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश, पश्चिम बंगाल से मछलियों कोे आयात किया जाता है। यही हाल इस राज्य में मत्स्य बीजों का भी है। 700 मिलियन फ्राई प्रतिवर्ष की जरुरत बिहार में है लेकिन सिर्फ 300 मिलियन फ्राई का उत्पादन राज्य में होता है।

...पौधशाला तैयार करना जरूरी : 
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मुख्य समन्वयक मखाना वैज्ञानिक डाॅ अनिल कुमार ने मखाना उत्पादन के लिए वैज्ञानिक विधि से पौधशाला तैयार करने की जानकारी देते हुए बताया कि बुआई का समय दिसंबर माह में पौधशाला में मखाना बीज की बुआई करें। मखाना बीज की बुआई प्रति हेक्टेयर 22-25 किलो है। बीज के शोधन के लिए इमिडाक्लोप्रीड 70 अथवा थायोमेथोक्सैम 70.5 ग्राम प्रति किलो की दर से उपचार करना चाहिए। पौधशाला में जल की गहराई खेत पद्धति में लगभग 6 इंच, तालाब पद्धति में लगभग 5-6 फीट होने चाहिए। मखाना बीज (गुर्री) की बुआई पौधशाला में मखाना बीज खेत/तालाब के निचली सतह पर करनी चाहिए। पांच दिवसीय प्रशि़क्षण कार्यक्रम के सह समन्वयक जयप्रकाश ने मखाना लावा एवं कच्चे फलों के उपयोग के बारे में विस्तरपूर्वक बताया। 

...इन किसानों ने लिया प्रशिक्षण में हिस्सा : 
दरभंगा के किसान सुनील कुमार सहनी, राजन कुमार झा, श्रवण कुमार, हरदेव मुखिया, बिल्टु मुखिया, बुधन मुखिया, दिनेश मुखिया, रौदी मुखिया, कमलेश मुखिया समेत कुल बीस मखाना उत्पादक कृषकों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। इस मौके पर महाविद्यालय के जयप्रकाश प्रसाद एवं कर्मचारियों ने अपना सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन मखाना वैज्ञानिक तथा प्रधान अन्वेषक डाॅ अनिल कुमार ने तथा धन्यवाद ज्ञापन जयप्रकाश प्रसाद द्वारा किया गया।
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