सम्पादकीय : प्रधानमंत्री जी आप चुप क्यों हैं ? - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

सम्पादकीय : प्रधानमंत्री जी आप चुप क्यों हैं ?

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विजय सिंह ,आर्यावर्त डेस्क ,28 सितम्बर,2018, राफेल  नाम उफान पर है. गली मोहल्ले चौक चौराहे तक में ज्ञानी अज्ञानी सब राफेल की चर्चा में व्यस्त हैं. पक्ष विपक्ष तर्क वितर्क में मशगूल है. राफेल नाम का ठीक से उच्चारण नहीं करने वाले भी डील का विवेचन कर रहे हैं. राफेल किस चिड़िया का नाम है,यह न जानने वाले भी ज्ञान का प्रदर्शन कर रहे हैं. देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष राहुल गाँधी  तो राफेल डील को 2019 के आसन्न लोकसभा चुनावों के मद्धेनजर महत्वपूर्ण मुद्धा बनाने का प्रयास करने के क्रम में सरकार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न सिर्फ व्यक्तिगत रूप से घेरने का कोई मौका छोड़ रहे हैं अपितु प्रधानमंत्री मोदी के लिए असंसदीय भाषा तक का प्रयोग करने में गुरेज नहीं किया. हालाँकि प्रत्युत्तर में सरकार के मंत्रियों और भाजपा टीम ने राहुल गाँधी और कांग्रेस को उन्हीं शब्दों में जवाब देकर हिसाब बराबर करने की कोशिश की,लेकिन देश के प्रधानमंत्री पर सीधे आरोप लगाते हुए विपक्ष हमलावर होते हुए अमर्यादित भाषा-शब्द का प्रयोग करे और प्रधानमंत्री चुप रहें तो यह जरूर देश के सवा सौ करोड़ देशवासियों के लिए चिंतनीय है. जिस देश के साथ राफेल की डील हुई ,उस देश का पूर्व राष्ट्रपति आरोप प्रत्यारोप की कड़ी में जुड़ा हो, प्रधानमंत्री पर खुद सरकारी रक्षा, विमान निर्माता कम्पनी की अनदेखी कर निजी गैरअनुभवी कम्पनी को ठेका दिलाने और फायदा पहुँचाने का सीधा आरोप लग रहा हो ,फिर भी प्रधानमंत्री चुप हैं. पेट्रोल डीजल की कीमतें हर रोज बढ़ रही हैं, गैस सिलिंडर की कीमतें बढ़ गयीं हैं,लोग परेशान हैं पर प्रधानमंत्री चुप हैं. बेरोजगारी के रोज नए आंकड़े गिनाये जा रहे हैं पर प्रधानमंत्री चुप हैं. सामाजिक सद्भाव की मूर्तरूप से परे अब दलित और सवर्ण की अवधारणा जोर पर हैं,बिखराव ,टकराव आशंकित हैं पर प्रधानमंत्री चुप हैं. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के बारे में सर्वविदित था कि वो कम बोलते हैं पर नरेंद्र मोदी तो बोलने वाले प्रधानमंत्री हैं. फिर बोलिये न,राफेल पर. देश की जनता सुनना चाहती है आपसे इस डील की हकीकत. जिस ईमानदार कर्मठ छवि की बदौलत देश की जनता ने आपको प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठाया,भरोसा जताया,वो आपकी तरफआशान्वित है.आपके बोलने का इंतजार कर रही है. आपको याद होगा संसद की सीढ़ियों को नमन करते हुए जब आपने कहा था कि सवा सौ करोड़ जनता मालिक है और आप प्रधान सेवक.आज उसी प्रधान सेवक से जनता पूछ रही है कि बताईये सच क्या है ? राफेल का हिंदी मतलब गोलाबाजी होता है, उम्मीद है देश की जनता को "गोला बाजी" से आत्मसात होने का अवसर नहीं मिलेगा.
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