बिहार में रहने वाले आदिवासियों का जाति प्रमाण-पत्र बनाने का निर्देश जारी - Live Aaryaavart

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रविवार, 4 नवंबर 2018

बिहार में रहने वाले आदिवासियों का जाति प्रमाण-पत्र बनाने का निर्देश जारी

लालपाड़ की साड़ी पहनकर महिलाएं मांदर की थाप पर पुरोहितों को प्रघाते हुए बेदी तक लाएसभी प्रखंडों में मोडिफाइड ऐरिया डेंवलपमेंट अप्रोच माडा चलाया जाए, परम्परागत ढंग से धूमधाम से मना नवा खानी  
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पटना,4 नवम्बर। बिहार का विभाजन 15 नवम्बर, 2000 को हुआ.इस तरह झारखंड राज्य बिहार से विभक्त होकर अस्तित्व में आया. अब तो 17 साल के बाद अलग राज्य  के रूप में बेहतर पहचान बनाकर अन्य राज्य को चुनौती देने लायक बन गया है.दूसरी ओर जो बिहार में अनुसूचित जन जाति रह गए हैं वे अपनी पहचान बनाने के लिए तड़प रहे हैं.उनको यहां पर जाति प्रमाण-पत्र बनाने में दिक्कत है.सच कहे तो बिहार में अनुसूचित जन जाति का प्रमाण-पत्र बनता ही नहीं है.बिहार में रहकर बिहारी नहीं बन पाने का पीड़ा सता रह है. बहरहाल आदिवासी सांस्कृतिक एवं  सामाजिक कल्याण संघ, कुर्जी, पटना  के द्वारा कुर्जी चर्च में परम्परागत ढंग से नवा खानी पर्व मनाया गया.इसके मुख्य अतिथि संत जेवियर  कॉलेज ऑफ एजुकेशन के वाइस प्रिंसिपल इग्नासियुस टोपनो रहे. आदिवासी सांस्कृतिक एवं सामाजिक कल्याण संघ से जुड़ी महिलाओं ने लालपाड़ की साड़ी पहनकर और सिर पर जावा रखकर मांदर की थाप पर पुरोहितों को प्रघाते बलि बेदी तक ले लाए. गायन मंडली का नेतृत्व संतोष टुडू ने किया. बरा हे भाइरो बरा हे बहिनरो धर्मेसी ओहमन पाड़ोत रे धर्मेसी महिमन पाड़ोत...गीत प्रस्तुत किए.  दाउद हंसदा, जोसेफ हंसदा और दानिएल हंसदा मांदर पर संगत कर रहे थे. तब महिलाओं ने फादर इग्नासियुस और फादर सुशील बिलुंग के हाथ धोएं,टीका लगाएं और माला पहनाएं.

धूमधाम से मना नवा खानी पर्व
पटना धर्म प्रांत के दीघा स्थित कुर्जी पल्ली परिसर में 4 नवम्बर रविवार को नवाखानी पर्व धूमधाम से मनाया गया. इस अवसर पर धन्यवादी मिस्सा अनुष्ठान का आयोजन किया गया. मिस्सा अनुष्ठान में मुख्य अनुष्ठाता के रूप में फादर अगस्टीन टोपनो उपस्थित थे. इस मौके पर फादर टोपनो ने अपने संदेश में कहा कि नयी उपज ईश्वर को समर्पित करें यह सर्वोत्तम दान है. नवाखानी पर्व ईश्वर को धन्यवाद देने का दिन है. उन्होंने कहा कि मिशनरियों का आगमन हमारे लिये ईश्वरीय वरदान है. मिशनरियों ने आदिवासियों को सही मार्गदर्शन दिया.

हमलोग बिहार में बेगाने हो गए

आदिवासी सांस्कृतिक एवं सामाजिक कल्याण संघ के अध्यक्ष हबिल कुजूर ने कहा कि हमलोग मूल निवासी हैं.पहले से  आदिवासियों का मूल पैतृक निवास बिहार ही है.बिहार को बांटकर 15 नवम्बर,2000 को झारखंड राज्य बनाया गया.जो झारखंड में रहते हैं वहां का मूल निवासी हो गया.जो आदिवासी बिहार में रह गए वे बिहार के मूल निवासी नहीं हो सकें.यहां पर दोहरी नीति चल रही है.बिहार में रहकर हमलोग बेगाने हो गए.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह
आदिवासियों ने सीएम नीतीश कुमार से आग्रह है कि हमलोग कुर्जी पल्ली में पांच हजार परिवार हैं.पटना महानगर में बीस हजार परिवार हैं.हमलोग मूलत:बिहारी हैं.यहां जमीन खरीदकर मकान बनाकर रहते हैं.यहां का वोटर कार्ड है.यहां का आधार कार्ड भी है.पैन कार्ड भी है.मकान है बिजली बिल देने पर विघुत परिपत्र है.हमलोग होल्डिंग टेक्स भी देते हैं जिसका परिपत्र है.केवल बिहार से निर्गत जाति प्रमाण-पत्र नहीं है. इसके नहीं रहने से पहचानविहिन हो गए हैं.इसका दूर तक परिणाम भुगतना पड़ता है.सरकारी योजनाओं से महरूम हो जाते हैं. और तो और गंभीर बीमारियों पर मिलने वाली सहायता से वंचित हो जाते हैं.संघ के अध्यक्ष  हबिल कुजूर और सचिव आलोक बेसरा ने कहा कि सीएम नीतीश कुमार सीमा से ऊपर उठकर लोगों का विकास व कल्याण करते हैं.द्वय नेताओं ने सीएम से आग्रह किया गया है जमीन के कागजात को देखकर जाति प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाए.उन्होंने यह भी आग्रह किया कि सूबे के 38 जिले के प्रखंडों में मोडिफाइड ऐरिया डेंवलपमेंट अप्रोच (माडा) से आदिवासियों को आय संवर्धन  करने हेतु  ऋण दिया जाएं. आवासीय भूमिहीनों को दस डिसमिल जमीन दी जाएं.
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