बेगूसराय : दिनकर कला भवन में नाटक "बेटियाँ" की सफल प्रस्तूति। - Live Aaryaavart

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शनिवार, 3 नवंबर 2018

बेगूसराय : दिनकर कला भवन में नाटक "बेटियाँ" की सफल प्रस्तूति।

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बेगूसराय (अरुण शाण्डिल्य) ईश्वर,अल्लाह का दिया हुआ मानव के लिये सबसे बड़ा उपहार है,"बेटी" प्रकृति का प्यार है और सृष्टि का श्रृंगार है बेटी धर्म मजहब की अमानत गीता और कुरान है बेटी ना हिन्दू न ही मुस्लिम बेटी तो इंसान है बेटी देती पुण्य प्रताप सभी को जैसे गंगा जल है बेटी क्यों डरते हो पैदा करने से आने वाला कल है बेटी। यह संदेशात्मक संवाद दिनकर भवन के मंच से शिवांशी शाण्डिल्य और श्रुति के द्वारा बोला गया तो पूरा हॉल तालियों से गुंजायमान हो गया मौका था आकाश गंगा रंग चौपाल असोसिएशन के द्वारा आयोजित एवं संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा प्रायोजित गणेश गौरव द्वारा लिखित एवं चाँदनी कुमारी द्वारा निर्देशित नाटक "बेटियां" का सफल मंचन कर समाज में बेटी के प्रति सकारात्मक सोच लाने के लिये,गर्भ में आने के बाद भ्रूण हत्या को रोकने के लिये एक सन्देशात्मक पहलुओं को नाटक बेटी के माध्यम से रखा  गया है।एक भोली भाली मासूम बच्ची के साथ सामुहिक बलात्कार कर सड़क पर फेंक दिया जाता है फिर किस तरह से समाज के कुछ नेता,समाज सुधारक आदि के कारणों से ही इन्ही लोगों के द्वारा इसे जातिय हिंसा दंगा फसाद के रूप देने की कोशिश की जाती है।जब पागल बाबा अमर जी के द्वारा संवाद बोला गया कि लगातर आग बस्ती में  रहनुमा बनाते हो सिर्फ अपने स्वार्थ के खातिर  भाई को भाई से लड़ाई करवाते हो फिर पूरा हॉल तालियों गूंज जाती है रोज व रोज लड़कियों,मासूम अबलाओं के साथ बढ़ती बलात्कार एवं हिंसात्मक घटना मानवता एवं  मानव पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर देता है क्या यह बेटी देश है जिसने कभी जय घोष किया था!यत्र नार्यस्तु पुज्यन्ते,रमन्ते तत्र देवता।और कथा नारियों की पूजा किस रूप में हो रही है किसी को बताने की जरूरत है क्या?अगर अब भी नहीं संभले तो बंजर और वीरान हो जाएगी यह खूबसूरत दुनियाँ संदेशों से भरा इस नाटक के माध्यम से गणेश गौरव ने बार-बार दर्शकों को सम्मोहित कर सोचने के लिए मजबूर कर दिया।संगीत परिकल्पना के साथ स्वयं अपनी दर्द भरी आवाज से नाटक को दर्शक के अंतर मनतक पहुंचाने में सफल रहे निर्देशन क्षेत्र में पहली बार कदम रख रही चांदनी की पहली प्रस्तुति ही इतनी शानदार और जानदार थी कि दर्शकों एवं अतिथियों और दर्शकों को ताली बजाकर प्रशंसा के साथ आशीर्वाद भी देने के लिये उत्सुक कर दिया। निर्देशिका चांदनी भी मंच पर स्वयं अभिनय भी कर रही थी यूं तो सभी कलाकारों ने अपने अपने चरित्र को जीने की भरपूर कोशिश की वहीं बलात्कार प्रीता लड़की की भूमिका में ईशा भारती ने अपनी दमदार और जोरदार अभिनय से दर्शकों को बार-बार ताली बजाने के लिए मजबूर किया नाटक में इन कलाकारों के साथ बेगूसराय आशीर्वाद रंग मंडल के वरिष्ठ रंगकर्मी और वॉलीवुड चरित्र अभिनेता धर्मवीर सिंह की भूमिका में अरुण शाण्डिल्य और इनके बराबरी के भूमिका में मंजूर खान के रोल में देवानंद पागल बाबा की भूमिका में वॉलीवुड कॉमेडी एवं चरित्र अभिनेता अमर जी,हीरा तंजीम, हरि किशोर, अंकुर,वॉलीवुड और मिस्टर पी के गिरपडे की भूमिका में मिथलेश,क्रांति,सिकंदर श्रुति,शिवांशी,टॉलीवुड की सह नायिका मोनिका क्रांति,अमन,शिवकांत,नंदन, सूरज,कुंदन,विकास,बालकलाकार के रूप में शिवम राज आदि ने अपने अभिनय से लोगों को मंत्र मुक्त किया प्रस्तुति व्यवस्थापक एवं संयोजन भूमिपाल रॉय एवं विशेष सहयोग रजनीकांत पाठक जी का था।मंच संचालन प्रफुल्ल चन्द्र मिश्रा ने किया,समीक्षक के रूप में श्री भगवान प्रसाद,अतिथि के रूप में डॉ सपना चौधरी (प्राचार्य महिला कॉलेज)श्री रजनीकान्त पाठक, वरिष्ठ रंगकर्मी,लेखक डॉ अनिल पतंग, उपमहापौर राजीव कुमार,विशिष्ट अतिथि नगर निगम महापौर श्री उपेन्द्र प्रसाद सिंह साथ मे उद्घाटन करता पुलिस महानिदेशक बी एम पी बिहार के श्री गुप्तेश्वर पाण्डे।सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो सम्पूर्ण नाटक को शांति पूर्वक देखा और अन्त में सभी दर्शकवृन्द ताली की गड़गड़ाहट से कलाकारों का हौसला बुलंद करते हुए सफल मंचन का आशीर्वाद दिया।
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