ग्रामरंग का दूसरा दिन, अलग अलग रंग में रंगा गाँधी भवन.... - Live Aaryaavart

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शनिवार, 12 जनवरी 2019

ग्रामरंग का दूसरा दिन, अलग अलग रंग में रंगा गाँधी भवन....

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भोपाल,12 जनवरी। युवा दिवस को मानते हुए ग्रामरंग के दूसरे दिन स्टोरी टेलिंग एकजुट संस्था के बच्चों ने माध्यम से अपनी बातों से व्यक्त किया। व्यक्ति के निर्माण में बचपन एक अहम भूमिका निभाता है। सत्य अहिंसा और न्याय से ओतप्रोत बचपन पूरे विश्व का बेहतर निर्माण कर सकता है। इन सभी विचारों को छोटे छोटे बच्चों ने रखा। बचपन संस्था की ओर से एक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया गया जिसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय सांस्कृति की झलक दिखी। कार्यक्रम के अगले चरण में लेबर मिनिस्टर श्री महेंद्र सिंह सिसोदिया प्रमुख अतिथि रहे एवं गाँव और पर्यावरण की चर्चा में वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान, रोशनी चतुर्वेदी, पूर्व विधायक के. के. सिंह जी, भोपाल के वरिष्ठ कलाकार और निर्देशक प्रेमगुप्ता जी, एकता परिषद के संस्थापक राजगोपाल पी व्ही ने सभी का मार्ग दर्शन किया। आदिवासी मंत्री मध्यप्रदेश ओमकार सिंह मरकाम जी ने गो रुर्बन के इस खूबसूरत पहल ग्रामरंग के लिए सभी को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि गाँव के उत्थान के लिए युवाओं की भागेदारी को  बढ़ावा के लिए प्रयास करने को कहा। ग्रामरंग के ओपन माइक में अलग अलग बोलियों में लोक कविता और लोकगीत का आयोजन सम्पन्न हुआ। बुंदेलखंडी में आशीष चैाहान ने,,,,, पुरैना कलां के दुर्गेश कुमार सराठे ने ‘कंडे ठंडे हो गए, चूल्हे‘ बिल्कुल सुन दोहा सुनाया। वहीं पवन ठाकुर ने ष्आओ हम बदलें देखो अपनो नजरिया, सबके गांवन की सुनलो हमसे खबरिया सुनाया ।  लोकगीतों की प्रस्तुति में युवराज पुरिया ने सखी सँइयाँ तो खूबै कमात हैं सुनाया।  ग्राम रंग के अगले दिन 13 जनवरी की सुबह 11 बजे से  देसी वेश भूषा को दिखाने के लिए फैशन शो होगा। साथ ही युवा की दृष्टि, गाँव की मिट्टी चित्र प्रदर्शनी और अलग अलग गाँव से आये स्टॉल मुख्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। जिनमें बाँस से बनी हुई कलाकृतियां, खादीजी, जोहरा आश्रम के शहद इनमें, सनी पिकल की मोमबतियां जिनमें प्रमुख हैं। ‘ गो रुर्बन‘ अंश हैप्पीनेस और एकता परिषद के द्वारा एक इनिसीएटिव है। जिसका प्रयास रहा है, शहरों और गाँवों के युवाओं को एक साथ जोड़ने का।  गो रुर्बन द्वारा आयोजित शिविर और कार्यक्रम प्रतिभागियों को ग्रामीण जीवन शैली का एक अंतर्दृष्टि और ग्रामीणों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास करता है। शहरी जीवन शैली में ग्रामीण योगदान को ध्यान में रखने और ग्रामीण और शहरी दोनों के संयोजन के रूप में श्रुर्बनश् का अर्थ पूर्ण करने का प्रयास करता रहा है। अंश हैप्पीनेस सोसाइटी युवाओं के नये विचारों का समर्थन और प्रचार करके  उनके विकास में मदद करता है। यह युवाओ को एक मंच प्रदान करता है। आज के हमारे आस-पास के लोगों के प्रति संवेदनशीलता की भावना को विकसित करने के बारे में शिक्षित करने का प्रयास करता है। अंश में होने वाले कार्यक्रम जीवन के सभी अन्य पहलुओं के संदर्भ में 360 डिग्री विचारों पर काम करता है जैसे ष्समुदाय, शिक्षा, कला आदिष्। इनमें से कुछ इनिशिएटिव जैसे काफिला थियेटर ग्रुप, महफिल कला प्रदर्शन करने के लिए, युथ फॉर चिल्ड्रेन बच्चों के अधिकारों का समर्थन करने के लिए काम कर रहे हैं।वर्तमान में, 500 से अधिक युवा स्वयंसेवक प्रत्यक्ष रूप से तथा अप्रत्यक्ष रूप से 2000 से भी अधिक स्वयंसेवक जुड़े हुए हैं। एकता परिषद वंचित समुदायों के अधिकारों के लिए  समर्पित  जनसंगठन है। यह 1989 के युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं को इकट्ठा कर गठित किया गया।सभी कार्यकर्ता राजगोपाल पी.वी. द्वारा प्रशिक्षित किये गये थे। एकता परिषद 11,000 से अधीक समुदायों पर आधारित संगठनों का गठबंधन है।यह भारत के 17 राज्यों में मौजूद है। यह वंचित समुदायों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर केंद्रित है। इन अधिकारों को केवल अहिंसा और शांति के मार्ग से ही प्राप्त किया जा सकता है।
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