बिहार : अंजना हत्याकांड में गया पुलिस की भूमिका संदिग्ध, सीबीआई से जांच कराए सरकार : माले - Live Aaryaavart

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शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

बिहार : अंजना हत्याकांड में गया पुलिस की भूमिका संदिग्ध, सीबीआई से जांच कराए सरकार : माले

पीड़िता के परिजनों पर बनाया जा रहा है दबाव, भाकपा-माले की जांच टीम ने किया घटनास्थल का दौरा.
16 जनवरी को गया जिलाधिकारी के समक्ष माले-ऐपवा का प्रदर्शन.
आॅनर किलिंग की बात जांच की दिशा घुमाने के लिए, पटवा समुदाय के मजदूर परिवार से आती है अंजना.

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पटना 11 जनवरी 2019 गया के मानपुर के अंजना हत्याकांड के सिलसिले में भाकपा-माले-ऐपवा की जांच टीम ने विगत 10 जनवरी को मानपुर के पटवा टोले का दौरा किया और पूरे मामले की जांच की. इस जांच टीम में भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी की सदस्य व ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव, माले के गया जिला सचिव निरंजन कुमार, पार्टी की राज्य कमिटी के सदस्य रामबलि सिंह यादव व गया ऐपवा की सचिव रीता वर्णवाल शामिल थीं. गया पुलिस द्वारा इसे आॅनर किलिंग का मामला बताए जाने के बाद एक बार फिर से 11 जनवरी की सुबह में निरंजन कुमार व रीता वर्णवाल ने मानपुर के पटवा टोले का दौरा किया और गया जिला प्रशासन पर मामले को गलत दिशा में मोड़ने का आरोप लगाया. भाकपा-माले  - ऐपवा  की जांच टीम ने मृतक अंजना कुमारी के परिजनों व पटवा समुदाय के अन्य लोगों से बातें की. हालांकि अंजना के माता-पिता, दादा और घर के छोटे बच्चों तक को पुलिस अपराधियों की तरह पकड़ कर ले गई है और उन पर लगातार दबाव हुए है. उनसे जबरन आॅनर किलिंग की बात स्वीकार करने को कहा जा रहा है. गया जिला प्रशासन का यह रुख बेहद निंदनीय है, जो असली अपराधियों को बचाने की नियत से किया जा रहा है. हाल के दिनों में कई ऐसे मामले उजागर हुए हैं, जिसमें गया पुलिस अपराधियों को बचाने हेतु जांच की ही दिशा बदल देने पर आतुर है.

जांच टीम का कहना है कि अंजना जिस परिवार से आती है, वह बहुत ही गरीब परिवार है. पूरा परिवार मजदूरी पर निर्भर है. मानपुर में पटवा समुदाय के लोग मुख्यतः बुनकर का काम करते हैं और कुछेक ही बड़े पैमाने का कारोबार है. मजदूर परिवार में इस तरह की आॅनर किलिंग की बात पूरी तरह से बेबुनियाद है. 28 दिसंबर को अंजना के गुम हो जाने और एक दो दिन नजदीकी रिश्तेदारों व आस-पास उसकी खोज करने के उपरांत उसके परिजन थाने में रपट लिखाने गए. लेकिन स्थानीय बुनियादगंज थाने ने रिपोर्ट में नाम देने के नाम पर रिपोर्ट दर्ज नहीं किया. उसका रवैया टालमटोल का बना रहा. जब बात सोशल मीडिया और पिंट मीडिया में आनी शुरू हुई, तो 4 जनवरी को स्थानीय थाने ने अज्ञात के विरूद्ध केस दर्ज किया. 6 जनवरी को उसकी लाश मिली. गया-खिजरसराय रोड के किनारे पेहानी जोड़ मस्जिद के पास बकसरिया टोला की झाड़ी में लाश फेंकी हुई थी. यदि प्रशासन ने इस मामले में सतर्कता बरती होती और सही समय पर कदम उठाया होता तो अंजना की जिंदगी बचाई जा सकती थी. लेकिन जिला प्रशासन व स्थानीय थाना पूरी तरह लापरवाह बना रहा.

पुलिस अब पीड़िता के परिजनों के हवाले से कह रही है कि लड़की 31 दिसंबर को लौट कर आई थी और उसके बाद फिर से गायब हो गई. इसी आधार पर प्रशासन इसे आॅनर किलिंग का मामला बता रहा है. भाकपा-माले व ऐपवा की जांच दल का साफ मानना है कि पुलिस पीड़िता के परिजनों पर दबाव बना रही है. चूंकि वे सभी गरीब समुदाय से आने वाले मजदूर हैं, इसलिए प्रशासन के दबाव में आॅनर किलिंग की बात स्वीकार कर सकते हैं. यदि इस तरह की कोई बात होती तो घटना से आक्रोशित हजारों की संख्या में पटवा समुदाय के मजदूर, गया का नागरिक व सामाजिक समुदाय व संगठन न्याय व सीबीआई जांच के सवाल पर गया शहर में ऐतिहासिक मार्च नहीं किया होता. 9 जनवरी के कैंडल मार्च में मानपुर से गया टावर तक लंबा मार्च निकला था जिसमें हर समुदाय के लोग शामिल थे. ऐसी स्थिति में गया पुलिस की जांच प्रक्रिया पर पूरी तरह से संदेह के घेरे में है और इसलिए भाकपा-माले इस घटना की सीबीआई जांच की मांग करती है. भाकपा-माले व ऐपवा ने इस घटना और पुलिस ज्यादती के खिलाफ आगामी 16 जनवरी को गया में जिलाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन करने का फैसला किया है. साथ ही मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई तथा मृतक युवती के परिजनों को नौकरी व मुआवजा देने तथा परिजनों की सुरक्षा की मांग की है. घटना के विरोध में आज गया, जहानाबाद, अरवल व नवादा में विरोध भी हो रहा है.
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