हर व्यक्ति को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी : राष्ट्रपति - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

हर व्यक्ति को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी : राष्ट्रपति

every-person-should-get-all-the-facilities-president
नयी दिल्ली, 25 जनवरी, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने देशवासियों से 21वीं सदी को भारत की सदी बनाने का आह्वान करते हुए इसके लिए लक्ष्यों और उपलब्धियों के नये मानदंड तय करने तथा ऐसे समाज का निर्माण करने पर जोर दिया है जिसमें हर व्यक्ति के विकास के लिए सभी तरह की सुविधाएं उपलब्ध हों।  श्री कोविंद ने 70वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राष्ट्र के नाम संदेश में कहा कि देश इस समय एक महत्वपूर्ण मुकाम पर है और आज के निर्णय और कार्यकलाप, 21वीं सदी के भारत का स्वरूप निर्धारित करेंगे। उन्होंने कहा, “एकजुट होकर, अपने प्रयासों के बल पर, इस सदी को भारत की सदी बनाने का अवसर हम सबके सामने है। इसलिए, राष्ट्र निर्माण की दृष्टि से आज का यह समय हम सबके लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना हमारे देशवासियों के लिए स्वतंत्र भारत का शुरुआती दौर था।” भारत के गणतंत्र की लंबी यात्रा का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश को अभी बहुत आगे जाना है। उन्होंने कहा कि खासकर, जो लोग विकास की दौड़ में पीछे रह गये हैं, उन सबको साथ लेकर आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “इक्कीसवीं सदी के लिए, हमें अपने लक्ष्यों और उपलब्धियों के नये मानदंड निर्धारित करने हैं। अब हमें गुणवत्ता पर और अधिक ध्यान देना होगा। सभी वर्गों और सभी समुदायों को समुचित स्थान देने वाले राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ते हुए हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जिसमें हर बेटी-बेटे की विशेषता, क्षमता और प्रतिभा की पहचान हो और उसके विकास के लिए हर तरह की सुविधाएं और प्रोत्साहन उपलब्ध हों।”  पारस्परिक सहयोग और साझेदारी के आधार पर समाज के निर्माण की बात करते हुए राट्रपति ने कहा कि विचारों के सहज आदान-प्रदान, व्यापक संवाद और गहन संवेदनशीलता के माध्यम से साझेदारियां मजबूत होती हैं। उन्होंने कहा कि संवाद और संवेदनशीलता की उपयोगिता जिस तरह परिवार के स्तर पर सहयोग के लिए प्रभावी सिद्ध होती है, उसी तरह यह समाज के वंचित वर्गों की भागीदारी के लिए भी प्रासंगिक है। उन्होंने कहा, “हमें इन वर्गों की समस्याओं को सुनने–समझने तथा उनका समाधान करने की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखना चाहिए। सहयोग और साझेदारी की यह भावना ही, पूरे विश्व को एक ही परिवार मानने वाले ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के आदर्श का भी आधार है।”

कोई टिप्पणी नहीं: