भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर : मोदी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 25 जनवरी 2019

भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर : मोदी

indian-would-be-5th-economy-modi
नयी दिल्ली, 25 जनवरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि देश विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार देश में निवेश का माहौल सुधारने के लिये रोजाना आधार पर सुधार के कदम उठा रही है। उन्होंने यहां भारत-दक्षिण अफ्रीका कारोबार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से वृद्धि करती प्रमुख अर्थव्यवस्था है और सरकार नयी पीढ़ी की बुनियादी संरचना के साथ नया भारत बनाने के लिये प्रतिबद्ध है। भारत 2,600 अरब डालर के साथ अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन के बाद विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मोदी ने मेक इन इंडिया के जरिये घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और डिजिटल इंडिया के जरिये अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण समेत सरकार की विभिन्न मुहिमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम वैश्विक स्तर पर पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर हैं। हम अंकटाड की सूची में एफडीआई पाने वाले शीर्ष देशों में से एक हैं। लेकिन हम अभी संतुष्ट नहीं हैं। दैनिक आधार पर हम जरूरी बदलाव कर रहे हैं और अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार कर रहे हैं।’’ मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के और देश के कारोबारियों को बताया कि विश्वबैंक के नई कारोबार सुगमता रिपोर्ट में भारत छलांग लगाकर 77वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले चार साल में इस रैंकिंग में 65 स्थानों का सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘हम नयी पीढ़ी की बुनियादी संरचना के साथ तथा गति, कौशल एवं स्तर पर जोर देकर नया भारत बनाने के लिये प्रतिबद्ध हैं।’’  मोदी ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के बारे में कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापार बढ़ रहा है और 2017-18 में इसने 10 अरब डॉलर का स्तर पार कर लिया है। उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि अब भी अपार संभावनाएं हैं। मैं सभी भारतीय एवं दक्षिण अफ्रीकी एजेंसियों, निवेश संवर्धन संगठनों तथा दोनों देशों के कारोबारियों से आह्वान करता हूं कि वे इस संभावना को पाने के लिये सक्रियता से काम करें।’’  उन्होंने कहा, ‘‘एक दोस्त होने के नाते नीतिगत सुधारों और जमीनी स्तर की एजेंसियां बनाने में भारत अपना अनुभव साझा करने के लिये तैयार है। हम भारतीय कंपनियों द्वारा दक्षिण अफ्रीका में निवेश बढ़ाने को प्रोत्साहित करते हैं और हमें इस बात का भरोसा है कि अधिक दक्षिण अफ्रीकी कंपनियां भी यहां आएंगी।’’  प्रधानमंत्री ने यह भरोसा दिलाया कि नये भारत में खाद्य एवं कृषि प्रसंस्करण, गहरा उत्खनन, रक्षा, बीमा तथा बुनियादी संरचना जैसे क्षेत्रों में सभी उपलब्ध विकल्पों में दक्षिण अफ्रीका की कंपनियों का स्वागत होगा। मोदी ने कहा, ‘‘इसी तरह स्टार्टअप, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, दवा, बायोटेक, आईटी तथा इससे संबंधित क्षेत्रों में भारत भी दक्षिण अफ्रीका का भागीदार बन सकता है।’’  उन्होंने कहा कि रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ाने के अपार अवसर हैं। ‘‘दोनों देश हीरे की प्रत्यक्ष खरीद के नये आयाम तलाश सकते हैं। इससे अर्थव्यवस्था का विस्तार होगा और बिक्रेताओं तथा खरीदारों दोनों की लागत में कमी आएगी।’’  मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठजोड़ के जरिये दक्षिण अफ्रीका नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी भारत के साथ हाथ मिला सकता है। उन्होंने कहा कि कारोबारियों तथा पर्यटकों के लिये मौजूदा वीजा व्यवस्था को आसान बनाने से कंपनियों के लिये कारोबार सुगमता तथा लोगों से लोगों का संपर्क बढ़ाया जा सकता है। सीआईआई द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने कहा कि दोनों देशों की कंपनियों के लिये कृषि, आईसीटी, एयरोस्पेस तथा ऊर्जा क्षेत्र में अपार संभावनाएं निहित हैं। उन्होंने कहा कि टाटा, सिप्ला और महिंद्रा जैसी 150 से अधिक भारतीय कंपनियां दक्षिण अफ्रीका में कारोबार कर रही हैं। वेदांता के 1.6 अरब डालर के निवेश से दक्षिण अफ्रीका में आर्थिक विकास और औद्योगिकीकरण की एक नई लहर चली है। 

कोई टिप्पणी नहीं: