सिख दंगों के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने में जुटी है सरकार : मोदी - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

रविवार, 13 जनवरी 2019

सिख दंगों के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाने में जुटी है सरकार : मोदी

sikhs-disturbios-culpables-jueces-tribus-govt-modi
नयी दिल्ली 13 जनवरी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिख समुदाय को आज एक बार फिर आश्वस्त किया कि उनकी सरकार 1984 के सिख दंगों के दोषियों को न्याय के कठघरे में लाकर रहेगी और पीड़ितों को न्याय मिलेगा।  श्री मोदी ने यहां अपने निवास पर सिखों के दसवें गुरू गोबिंद सिंह की जयंती पर 350 रूपये का स्मारक सिक्का जारी किया। इस मौके पर वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने गुरू गोबिंद सिंह की मानवता की निस्वार्थ सेवा भावना, समर्पण, बहादुरी और बलिदान की सराहना की और उनके बताये हुए रास्ते पर चलने का आग्रह किया।  प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सिख दंगों के दोषियों को न्याय के दायरे में लाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा , “ गुरु गोबिंद सिंह जी हों या फिर गुरु नानक देव जी, हमारे हर गुरु ने न्याय के साथ खड़े होने का सबक दिया है। उनके बताए मार्ग पर चलते हुए आज केंद्र सरकार 1984 में शुरु हुए अन्याय के दौर को न्याय तक पहुंचाने में जुटी है। दशकों तक माताओं ने, बहनों ने, बेटे-बेटियों ने, जितने आंसू बहाए हैं, उन्हें पोंछने का काम, उन्हें न्याय दिलाने का काम अब कानून करेगा।”  उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से करतारपुर कॉरीडोर का काम शुरू हुआ है और अब श्रद्धालु गुरूद्धारा दरबार साहिक के दर्शन कर पायेंगे। उन्होंने कहा ,“ केंद्र सरकार के अथक और अभूतपूर्व प्रयास से करतारपुर कॉरीडोर बनने जा रहा है। अब गुरु नानक के बताए मार्ग पर चलने वाला हर भारतीय, हर सिख, दूरबीन के बजाय अपनी आंखों से नारोवाल जा पाएगा और बिना वीजा के गुरुद्वारा दरबार साहिब के दर्शन कर पाएगा।”  प्रधानमंत्री ने कहा, “ अगस्त 1947 में जो चूक हुई थी, यह काॅरिडोर उसका प्रायश्चित है। हमारे गुरु का सबसे महत्वपूर्ण स्थल सिर्फ कुछ ही किलोमीटर से दूर था, लेकिन उसे भी अपने साथ नहीं लिया गया। ये कॉरिडोर उस नुकसान को कम करने का एक प्रमाणिक प्रयास है।” 

कोई टिप्पणी नहीं:

Loading...