बेगूसराय : नाट्य कार्यशाला की बढ़ी अवधि में आज के प्रशिक्षण पर एक नज़र। - Live Aaryaavart

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शनिवार, 5 जनवरी 2019

बेगूसराय : नाट्य कार्यशाला की बढ़ी अवधि में आज के प्रशिक्षण पर एक नज़र।

उमेश आदित्य संस्थापक सह संचालक नाट्य संस्था "भनक"द्वारा प्राप्त जानकारी के आलोक में आयोजित पूर्णियाँ में नाट्य कार्यशाला की विशेष कार्यक्रम आज की ताजा खबर।
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अरुण कुमार (बेगूसराय) भरत नाट्य कला केन्द्र भनक पूर्णिया द्वारा आयोजित नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला,'रंग दर्पण'में आज कलाकारों को अभिनय और नेपथ्य कर्म के विषय में जानकारी दी गई। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय,नयी दिल्ली के स्नातक श्री मिथिलेश राय ने बताया कि प्राचीनकाल में अभिनय का आदिम रूप था। वहां सब कुछ अनगढ़ और अव्यवस्थित होता था। वैसे अनुकृति करना मनुष्य की आदिम प्रवृत्ति है। बच्चों में यह प्रवृत्ति सहज ही झलकती है। अभिनेता को एक अच्छा आब्जर्वर होना चाहिए। बिना चरित्रों को देखे अच्छा अभिनय नहीं किया जा सकता है। अभिनेता अपने आस पास से ही सीखता है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में चयनित रंगकर्मियों को दो साल रंगमंच के विभिन्न आयामों को बताया जाता है। अंतिम एक वर्ष में उन्हें अभिनय, निर्देशन, रंग संगीत,मंच परिकल्पना इत्यादि में से किसी एक में विशेषज्ञता हासिल करनी होती है। कार्यशाला में कलाकारों को विशेषज्ञ नहीं बनाया जाता बल्कि रंगमंच का परिचय कराया जाता है। कार्यशाला में कलाकार रंगमंच की दुनिया से रूबरू होते हैं।श्री राय ने कहा कि शौकिया रंग मंच ने ही छोटे शहरों की कला संस्कृति को जीवित रखा है। तत्पश्चात वरिष्ठ रंगकर्मी श्री उमेश आदित्य ने रंग शिल्प पर काम किया। उन्होंने कहा कि रंग शिल्प आज नाट्य प्रस्तुति का मुख्य हिस्सा है। कुछ नाटक ऐसे भी हैं जिसमें अभिनेता गौण और शिल्प हावी रहता है। कलाकारों के अभिनय के अलावा मंच सज्जा,प्रकाश परिकल्पना, रूप सज्जा इत्यादि का प्रस्तुति पर गहरा प्रभाव पड़ता है। नाटक की मांग को देखते हुए मंच परिकल्पना की जाती है। प्रकाश परिकल्पना दृश्य के अनुसार होती है।मंच को अलग अलग हिस्सों में बांट दिया जाता है, कौन सा दृश्य मंच के किस हिस्से में होना है, उसके अनुसार प्रकाश योजना का निर्धारण होता है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय आजकल टेक्निकल वर्कशॉप करने लगी है।प्राय:हर कोई अभिनेता बनना चाहता है लेकिन नेपथ्यकर्मी कोई नहीं।जबकि एक दमदार प्रदर्शन के लिए सशक्त नेपथ्य कर्म की जरूरत होती है। उन्होंने कार्यशाला के बाद होने वाली प्रस्तुति पर चर्चा करते हुए कहा कि अलग अलग भावना को व्यक्त करने में कलाकारों को मेहनत करनी होगी। कार्यशाला में किशोर कुमार सिन्हा,प्रदीप कुमार गुप्ता, रामभजन, शशिकांत प्रसाद, अमित वर्मा, सुमित कुमार, तुषार आनंद, मनोरंजन झा,बादल कुमार झा, राहुल, पंकज जायसवाल, मनोरंजन कुमार, अर्जुन ठाकुर, ज्योत्स्ना कुमारी, रंजना शर्मा, आरज़ू प्रवीण, खुशी प्रवीण सहित अन्य कलाकार मौजूद थे। कलाकारों ने कहा कि इस कार्यशाला से उन्हें नयी दृष्टि मिली है। कार्यशाला की समाप्ति के बाद दो दिवसीय नाट्योत्सव का आयोजन किया जाएगा।

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