दुमका : मधुबनी पेटिंग व सिक्की शिल्प की विशेषज्ञ विमला दत्त - Live Aaryaavart

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बुधवार, 20 फ़रवरी 2019

दुमका : मधुबनी पेटिंग व सिक्की शिल्प की विशेषज्ञ विमला दत्त

पूरे मनोयोग से किया गया काम कभी न कभी एक बड़े परिणाम को जन्म देता हैः

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दुमका (अमरेन्द्र सुमन) पर्यटन, कला, संस्कृति, खेलकूद व युवा कार्य विभाग, झारखण्ड, राँची के तत्वावाधन में सिदो कान्हू इंडोर स्टेडियम दुमका में ’’कला प्रेरणा 2019’’ के तहत 16 से  26 फरवरी तक 10 दिवसीय राष्ट्रीय शिल्पकला उत्सव का आयोजन किया गया है। इस दस दिवसीय कार्यशाला में मधुबनी पेटिंग व सिक्की शिल्प (मिथिला) सहित शोला शिल्प व टेराकोटा (शांति निकेतन) प्राकृतिक वस्तुओं से निर्मित हस्तकला (चैबीस परगना) पटचित्र (मिदनापुर) पश्चिमी आदिवासी कला (कोलकाता) सोहरा (कोडापुट) गांेड चित्रकला (भोपाल) पोथिचित्र (गुवाहाटी) जादूपाटिया व लोक चित्रकला (दुमका) इत्यादि विधाओं पर कलाकारों द्वारा अपनी-अपनी कलाओं से लोगों को अवगत करा रहे हैं। मधुबनी पेटिंग व सिक्की शिल्प (मिथिला) में ख्यातिप्राप्त विमला दत्त की पेंटिंग को इस स्थान पर खासा तरजीह दिया जा रहा है। इस पेंटिग के माध्यम से लम्बे समय तक लोगों की अब तक सेवा कर चुकीं विमला दत्त की कलाकृति का प्रदर्शन राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर होता रहा है।  विमला देवी का कहना है पूरे मनोयोग से किया गया काम कभी न कभी एक बड़े परिणाम को जन्म देता है। बाल्यकाल से उनकी अनवतर साधना ने उन्हें इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया कि अब वे किसी परिचय के मोहताज नहीं रहीं। कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय पदक, सम्मान से विभूषित विमला दत्त चाहती हैं कि अधिक से अधिक लोगों तक इस कला की पहुँच बने। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर मिथिलांचल से दुमका पहुँची विमला दत्त पूरे जोश के साथ अपनी कलाकारी का प्रदर्शन कर रही हैं। मिथिला चित्रकला की सशक्त हस्ताक्षर विमला दत्त का जन्म 26 जून 1941 ई0 को मधुबनी (बिहार) के काको ग्राम में हुआ था। बाल्यकाल से ही धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन व मिथिला चित्रकला में कुछ अलग करने की तमन्ना थी। धार्मिक पुस्तकां में बने चित्रों को देख-देख कर कागज पर उसे उकेरना इनकी आदत बन गई थी।   विवाहोपरांत ग्राम राँटी मंे इनकी कला खूब पल्लवित पुष्पित हुई। ग्राम राँटी से धीरे-धीरे इनकी कला भारत वर्ष के अलग-अलग प्रदेशों में पहुँचने लगी। सीसीआरटी के तत्वावधान में विमला दत्त की चित्रकला का देश भर में समय-असमय प्रशिक्षण शिविर लगता रहा। श्रीमती विमला दत्त के अनुसार हजारों शिक्षकों व बच्चों को अब तक वे प्रशिक्षित कर चुकी हैं। सबसे ज्यादा खुशी उन्हें तब लगती है जब किसी नेत्रहीन दिव्यांग बच्चों को ये प्रशिक्षित करती हैं। 

विमला दत्त के अनुसार पहली दफा जब उनकी पेंटिंग 20 रुपये में बिकी तो उनकी प्रसन्नता देखने लायक थी। इस पेंटिग के बाद उन्हें यह  अहसास हो गया कि इस कला के माध्यम से वे आत्मनिर्भर बन सकती हैं, फिर क्या था, इन्होंने इसे अपनी जीवनशैली में शामिल कर लिया। भारत सरकार द्वारा संचालित गुरु-शिष्य परंपरा के के तहत विमला दत्त ने अपने समाज की सैकड़ों दलित, निरक्षर, असहाय व दिव्यांग महिलाओं को प्रशिक्षण दिया तथा उनके जीविकोर्पाजन के मार्ग को प्रशस्त किया। प्रो0 डेविड द्वारा संचालित मिथिला आर्ट इन्स्टीटृयूट मे अपनी सेवा के बल पर श्रीमती विमला दत्त ने नयी पीढ़ी के युवाओ को परंपरागत कला में प्रशिक्षित करने का काम किया है। श्रीमती विमला दत्त के अनुसार अपनी बहु वीणा दत्त, चंदना दत्त, बंटियों- विभा दास, शारदा, बबली, नतिनी प्रियंका दास, मास्टर टेªनर  (सीसीआरटी) तूलिका दास, (आर्ट टिचर पूणे) पोते मोहनिश दत्त, शांतनु दत्त, मानस दत्त व पोती श्रेयसी दत्त तक को परंपरागत चित्रकला का ज्ञान देकर मधुवनी पेंटिग व सिक्की शिल्प को संरक्षित व सवंर्धित करने का काम किया है। विमला दत्त कहती है-’’ मुझे गर्व है कि ग्राम राँटी की महा संुदरी देवी व गोदावरी देवी मधुवनी पेंटिंग व सिक्की शिल्प में पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। विमला दत्त का मानना है कि कई नेशनल व स्टेट गर्वमेंट द्वारा पुरस्कार प्राप्त कलाकार प्रतिदिन पूरे मनोयोग के साथ मिथिला चित्रकला की साधना में लीन रहते है। इनका यह भी कहना है कि इस गाँव के एक-एक घर में प्रतिदिन भगवान अवतार लेते है। इस तरह हम इस कला के संरक्षण के साथ-साथ स्वरोजगार को भी लगातार बढ़ावा देते रहे हैं। 

विमला दत्त कहती हैं- मिथिला कला को नया आयाम देने वाले तथा विश्व स्तर पर इसकी प्रसिद्धि को पहुँचाने वाले अमेरिकन कला प्रेमी रेमण्ड का भरपूर प्रोत्साहन उन्हे प्राप्त होता रहा। मिथिला-9 के तहत मिथिला के लोक कलाकरों को अमेरिका ले जाने की उनकी योजना थी किन्तु किस्मत ने साथ नहीं दिया और असमय वे काल के गाल में समा गए। उनकी मौत के बाद यह योजना ठंडे बस्ते में बंद हो कर रह गई। श्रीमती दत्त के निश्चल प्रेम, स्वभाव व कला के प्रति उनकी दिली रुझान के बहुत बड़े प्रशंसक श्री होंसोगोवा (जापान) ने जापान में मिथिला म्यूजियम का निर्माण कर इस शिल्प को बड़े फलक पर लाने का प्रयास किया था। जापान के मिथिला म्यूजियम में वर्षों रह कर विमला दत्त ने कई-कई विशाल चित्रों का निर्माण किया  है। अमेरिका, जापान, फ्रांस, जर्मनी सहित कई देशों के प्रमुख संग्रहालयों में विमला दत्त की पेंटिेग्स काफी प्रसिद्धी पा चुकी है। भारत के भोपाल में इनकी एकल चित्रकला प्रदर्शनी की काफी सराहना हुई है। मालूम हो, वर्ष 2010 में बिहार सरकार के हस्तकला विभाग द्वारा राज्य पुरस्कार व चेतना समिति पटना ने ताम्रपत्र देकर इन्हें सम्मानित करने का काम किया है।  कर्ण सेवा दरभंगा द्वारा कर्ण विभूषण व अन्य कई पुरस्कार, सम्मान से अब तक विभूषित हो चुकी हैं विमला दत्त। अपनी कला यात्रा में 30 देशों के कलाकारों के बीच चयनित होकर 14 अक्टूबर 2017 को भारत की राजधानी दिल्ली में अन्तरराष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से भारत में पहली बार सम्मानित होने का गौरव भी विमला दत्त प्राप्त कर चुकी हैं।

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