बिहार : किसानों की कर्ज माफी व नए आवास कानून की मांग पर कल मजदूर-किसानों का विधानसभा मार्च - Live Aaryaavart

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रविवार, 17 फ़रवरी 2019

बिहार : किसानों की कर्ज माफी व नए आवास कानून की मांग पर कल मजदूर-किसानों का विधानसभा मार्च

अखिल भारतीय संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर हो रहा है विधानसभा मार्चगांधी मैदान के रामगुलाम चैक से दिन के 12 बजे आरंभ होगा मार्च.

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पटना 16 फरवरी 2019 किसानों के हर प्रकार के माफी व तथा नए आवास नीति की केंद्रीय मांगों के साथ अखिल भारतीय संघर्ष समन्वय समिति के बैनर से कल 18 फरवरी को राज्य के हजारों मजदूर-किसान पटना में विधानसभा मार्च करेंगे. खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव काॅ. धीरेन्द्र झा व अखिल भारतीय किसान महासभा के बिहार राज्य अध्यक्ष विशेश्वर प्रसाद यादव ने आज संयुक्त बयान जारी करके कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों की कारपोरेटपरस्त नीतियों के खिलाफ आज ग्रामीण व खेतिहर मजदूरों व किसानों के विभिन्न तबकों में गहरा आक्रोश है और कल इस विधानसभा मार्च में इस आक्रोश की अभिव्यक्ति होगी. आगे कहा कि बिहार सरकार बिहार में 11 प्रतिशत विकास का दावा करती है लेकिन कृषि में विकास दर लगभग शून्य है. जबकि हर कोई जानता है कि बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है. जब कृषि क्षेत्र में कोई विकास नहीं हो रहा है, तब बिहार में नीतीश सरकार किस विकास का दावा कर रही है? नेताओं ने कहा कि देशव्यापी किसान आंदोलन की मुख्य मांगें कर्ज माफी, फसल की लागत का डेढ़ गुना मूल्य तथा अनिवार्य फसल खरीद गारंटी की मांगों को मोदी सरकार ने ठुकरा दिया. 5 एकड़ तक के किसानों के मदद के लिए 6000 रु. सालाना की बेहद तुच्छ राशि की पेशकश बजट में की गई, लेकिन बटाईदारों के हिस्से कुछ भी नहीं है. प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना के नाम पर किसानों व आमजनों को ठगने का काम किया गया. बिहार की भाजपा-जदयू की सरकार भी किसानों के साथ लगातार विश्वासघात कर रही है. राज्य में कई वर्षों से धन-गेहूं-मक्का सहित किसी फसल की खरीद नहीं हो रही है. बाढ़-सुखाड़ से बर्बाद फसलों का मुआवजा नहीं मिल रहा है. राज्य में सिंचाई सुविधा बदहाल है, वहीं किसानों को अन्य राज्यों की भांति कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली नहीं मिल रही है. बटाईदारों-खेतिहरों व ग्रामीण मजदूरों के वास-आवास, मजदूरी और पेंशन के सवालों को हल करने के बदले सरकार दलित-गरीबों को उजाड़ने में लगी है. पर्चे की जमीन के लिए अनशनकारियों पर सीतामढ़ी के रून्नी सैदपुर में बम से हमला और बेगूसराय में सैंकड़ों दलित-गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों को जलाया जाना दिखलाता है कि बिहार में एक घोर मजदूर विरोध्ी सरकार काम कर रही है. लंबे संघर्ष के बाद बिहार सरकार ने वृद्धों के लिए 400 रु. की पेंशन राशि घोषित की है. यह बहुत तुच्छ राशि है. कम से कम 3 हजार पेंशन की राशि होनी चाहिए. मनरेगा में मजदूरी बहुत कम है. उसे कम से कम 600 रु. होना चाहिए. इन सवालों पर कल 18 फरवरी को विधानसभा मार्च होगा.

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