बिहार : सांस्कृतिक पूंजी के अभाव में हाशिए के समुदाय का विकास अवरूद्ध - Live Aaryaavart

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रविवार, 31 मार्च 2019

बिहार : सांस्कृतिक पूंजी के अभाव में हाशिए के समुदाय का विकास अवरूद्ध

मिशनरी स्कूलों में महादलित मुसहर समुदाय के बच्चों को मिले दाखिले में प्राथमिकता
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पटना,30 मार्च। सांस्कृतिक पूंजी के अभाव में हाशिए के समुदाय का विकास अवरूद्ध। इन लोगों के सांस्कृतिक पूंजी को बहाल करके ही इनको विकास के डगर पर लाया जा सकता है। आखिर कौन हैं वह हाशिए पर रहने वाले समुदाय? जिनका आजादी के 72 सालों के बाद भी विकास के डगर पर नहीं लाया जा सका। वह है महादलित मुसहर समुदाय। सरकार और गैर सरकारी संस्थाओं की मनपंसदगी समुदाय है। नवज्योति निकेतन के मुख्य सभागार में जेवियर इंस्टीच्यूट आॅफ सोशल रिसर्च के द्वारा आयोजित 14 वें अरूपे मेमोरियल ऋंखला के तहत ‘सांस्कृतिक पूंजी के अभाव और विकासः बिहार राज्य एवं समाज क्या और क्यों करे ? विषयक पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। मौके पर दीप जलकर व्याख्यान माला का उद्घाटन किया गया। अपने व्याख्यान में बैकुण्ड मेहता नेशनल इंस्टीच्यूट आॅफ काॅपरेटिव मैनेजमेंट, पूणे के प्रोफसर अनिरूद्ध प्रसाद ने कहा कि बिहार के हाशिए के समुदाय के बेहतर विकास के लिए सरकार एवं समाज को ना केवल उनके आर्थिक विकास की आवश्यकता है बल्कि उनके सांस्कृतिक पूंजी के अभाव को भी समाप्त करने आश्वयकता है। आगे प्रो. प्रसाद ने कहा कि बिहार 6 तरह के महत्वपूर्ण अभावों की दौर से गुजर रहा है। अव्वल विकास का अभाव, प्रशासनिक अभाव, वैधानिकता का अभाव, लोकतांत्रिकता का अभाव, राष्ट्र निर्माण का अभाव और नागरिक निर्माण का अभाव। इस तरह के अभावों को हर तरह के आपसी विचार-विमर्श कर सरकार के सामने हाषिए पर रहने वाले समुदाय के सांस्कृतिक पूंजी को विकसित करने का उपाय रखना होगा। उनके समक्ष समुदाय प्रसंग को उठाते रहना चाहिए। ऐसा करने से हाषिए के समुदाय का विकास सुनिश्चित ही होगा। प्रजातंत्र के चारों स्तम्भों के सामने भी सांकृस्तिक पूंजी वाले लक्ष्यों को रखना चाहिए ताकि प्रजातंत्र के प्रहरी के रूप में संज्ञान ले सके। वहीं प्रो. प्रसाद ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने संविधान में प्रावधान निहित कर रखा है। संविधान ने राष्ट्र के संस्थापकों का अनुमानित लक्ष्य दे रखा है। सर्वविदित है कि हमारा संविधान स्वंत्रता, समानता और बंधुता पर आधारित समाज निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। बैकुण्ड मेहता नेशनल इंस्टीच्यूट आॅफ काॅपरेटिव मैनेजमेंट, पूणे के प्रोफसर अनिरूद्ध प्रसाद ने व्याख्यान में हाशिए पर मुसहर समुदाय को केन्द्र में रखकर खुलासा कर दिया। उन्होंने कहा कि यह समुदाय अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या में एक चैथाई वाली अनुसूचित जाति के जनसंख्या के लोग ही हाशिए पर हैं। यह वाकई में अन्तद्वद है, जो हिन्दू एवं दलित समाज के अंतिम पायदान पर विराजमान हैं। इनका लगातार होने वाले आर्थिक दोहन एवं सामाजिक -सांस्कृतिक उत्पीड़न होने के कारण मुसहरों को राजनीतिक में खामोशी में रहने के लिए विवश किया जाता है। इस हाशिए वाले समुदाय के बीच से गरीबी, अत्याचारी और अशिक्षा को समाप्त करवाना ही होगा ताकि इनका जीवन बेहतर हो सके। मुसहरों के आर्थिक विकास में भागीदारी को बढ़ाने के अतिरिक्त उनके शिक्षा,विशेषकर लड़कियों की शिक्षा को बढ़ाने में पहल करना ज्यादा प्रभावी होगा। ऐसा करने से इस समुदाय में शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। अंधविश्वास को दूर करने में सहायता भी मिलेगी। 

14 वें अरूपे मेमोरियल ऋंखला के तहत ‘सांस्कृतिक पूंजी के अभाव और विकासः बिहार राज्य एवं समाज क्या और क्यों करे ? विषयक पर प्रस्तुत व्याख्यान की अध्यक्षता कर रहे जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान के निदेशक श्रीकांत ने कहा कि सरकार का यह प्राथमिक काम है कि वह सभी नागरिकों का विकास करें और सभी के बीच समानता को सुनिश्चित करे जो संविधान में वर्णित है। हाशिए के लोगों को मुख्यधारा में लाना एक विशिष्ट कार्य है। जगजाहिर हैं कि श्रीकांत जी पत्रकार भी हैं। मौके पर एक्स आई एस आर के रेक्टर फादर जोसेफ थंडावल ने कहा कि गरीबों के प्रति येसु के सेवाभाव का उन्मुखीकरण करने में फादर पेडरो अरूपे का महान योगदान रहा है। फादर पेडरो अरूपे येसु समाजी के सुपेरियर जेनरल थे। अपने सुपेरियर जेनरल को स्मरण करने के हमलोग प्रयासरत हैं। संत माइकल हाई स्कूल में फादर पेडरो अरूपे के स्मरण में प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। इसके साथ एक्स आई एस आर के द्वारा प्रत्येक साल व्याख्यान माला आयोजित की जाती है। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक और गैर सरकारी संस्था जेसुइट रिफ्यूजी सर्विस स्थापित करना और एक्स आई एस आर जैसे संस्था के माध्यम से येसु समाज के नेतृत्व में बौद्धिक क्षमता का विकास किया जा रहा है।  इसके पूर्व एक्स आइ एस आर के निदेशक डाॅ. जोस कलापुरा ने सभी आगत अतिथियों का जोरदार ढंग से स्वागत किया। उन्होंने एक्स आई एस आर के द्वारा किए गए शोधों एवं प्रकाषित सामग्रियों पर विशेष प्रकाश डाला। इस व्याख्यान माला में लगभग 100 लोग उपस्थित हुए जिसमें प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सिसिल साह भी उपस्थित थे। अंत में एक्स आई एस आर के सहयोगी शोधार्थी प्रवीण कुमार मधु ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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