झाबुआ (मध्यप्रदेश) की खबर 06 मार्च - Live Aaryaavart

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बुधवार, 6 मार्च 2019

झाबुआ (मध्यप्रदेश) की खबर 06 मार्च

पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण का प्रसाद एवं रंगो के साथ मन कामेष्वर महादेव ने होली खेली एवं प्रसाद भोग प्राप्त किया
षिवरात्री पर पूरातन काल से पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय मे चल रही परंपरा- दिव्येष कुमार जी महाराजकीर्तन करते हुए महिलाओं एवं श्रद्धालुजन गाजे बाजे के साथ पहूंचे षिवजी के दरबार में ।
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झाबुआ ।  श्री पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय की पुरातन पंरम्परानुसार नगर के मध्य स्थित श्री गोवर्धननाथ जी की हवेली मे विग्रह स्वरूप  में बिराजित  पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान श्री गोवर्धननाथ श्रीकृष्ण के प्रसाद का आग्रह भगवान शिवजी जो स्वयं भी परम वैष्णव माने गये है, को लेकर शिवरात्री के पावन अवसर पर सोमवार रात्री में हवेली से बडी संख्या में श्रद्धालुओं एवं जमुना महिला मंडल की सदस्याओं ने ढोल ढमाकों के साथ जुलुस के रूप  में मंदिर के पूजारी आचार्य दिलीप के नेतृत्व में हाथ मे मशाल लेकर छोटा तालाब स्थित श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर में जाकर पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान गोवर्धननाथ की प्रसादी उनके आग्रहानुसार अर्पित की तथा रंग, गुलाल,पुष्प एवं अबीर चढा कर भगवान भोलेनाथ के साथ होली खेलने की रश्म अदा की । इस पूरातन पंरपरा के बारे में जानकारी देते हुए श्री वल्लभ पुष्टीमार्गीय पीठ के पीठाधीश  गोस्वामी 108 श्री दिव्येश कुमार जी महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान शिवजी को परम वैष्णव के रूप मे माना जाता है और उनका भी आग्रह रहता है कि पूर्ण पुरूषोत्तम भगवान श्री कृष्ण का  महा प्रसाद उन्हे भी प्राप्त हो । शिवरात्री के अवसर पर पर परम वैष्णव होने के कारण भगवान गोवर्धननाथ जी के मंदिर से उनके लिये सम्मानपूर्वक प्रसादी श्रद्धालुजन हाथ मे मशाल लेकर बाजे गाजे के साथ जाते है और उन्हे प्रसादी अर्पित की जाती है ।  महाराजश्री के अनुसार यह परम्परा झाबुआ नगर मे पिछले 150 वर्षो से चल रही है । उन्होने यह भी जानकारी दी कि पूरे देश में जहां जहां गोवध्रननाथजी के मंदिर है वहां से भगवान भालेनाथ को शिवरात्री पर प्रसादी अर्पित की जाती है तथा उनके साथ फागोत्सव मनाकर रंग,गुलाल एवं अबीर आदि अर्पित किया जाता है।यह पूर्ण पुरूषोत्तम की प्रसादी का आग्रह होने से पर्व के रूप् मे मनाया जाता है । वल्लभ संप्रदाय के बारे में उन्होने जानकारी देते हुए बताया कि वल्लभ सम्प्रदाय भक्ति का एक संप्रदाय, जिसकी स्थापना महाप्रभु वल्लभाचार्य ने की थी। इसे ’वल्लभ संप्रदाय’ या ’वल्लभ मत’ भी कहते हैं। चैतन्य महाप्रभु से भी पहले ’पुष्टिमार्ग’ के संस्थापक वल्लभाचार्य राधा की पूजा करते थे, जहां कुछ संप्रदायों के अनुसार, भक्तों की पहचान राधा की सहेलियों (सखी) के रूप में होती है, जिन्हें राधाकृष्ण के लिए अंतरंग व्यवस्था करने के लिए विशेषाधिकार प्राप्त होता है। अपने वैष्णव सहधर्मियों के साथ राधावल्लभी, भागवतपुराण के प्रति अपार श्रद्धा रखते हैं, लेकिन कुछ अंतरंगता जो राधा और गोपियों के साथ रिश्तों की परिधि के बाहर है, वह इस सम्प्रदाय के दर्शन में शामिल नहीं है। उन्होने बताया कि भगवान के अनुग्रह से जो भक्ति उत्पन्न होती है, वह पुष्टिभक्ति कहलाती है। ऐसा भक्त भगवान के स्वरूप दर्शन के अतिरिक्त और किसी वस्तु के लिए प्रार्थना नहीं करता। वह अपने आराध्य के प्रति सम्पूर्ण आत्मसमर्पण करता है। इसको प्रेमलक्षणा भक्ति भी कहते हैं। नारद ने इस भक्ति को कर्म, ज्ञान और योग से भी श्रेष्ठ बतलाया है। उनके अनुसार यह भक्ति साधन नहीं, स्वतः फलरूपा है। पुष्टिमार्ग की प्राचीनता प्रमाणित करने के लिए श्रुति को उद्धृत किया जाता है, जिसमें आत्मा की उपलब्धि केवल कृपा के द्वारा बतायी गयी है। कठोपनिषद में भी भगवान के प्रसाद से ही आत्मदर्शन सम्भव बताया गया है। श्री गोवर्धननाथ मंदिर से रात्रीकाल में जुलुस के रूप  में श्रद्धालुजनों में मंदिर के दिलीप आचार्य, अधिकारी ब्रजबल्लभ त्रिवेदी रमेश त्रिवेदी, ट्रस्टी हरिश शाह, श्रीकिशन माहेश्वरी, जितेन्द्र शाह, गोकुलेश आचार्य, निरजंन चैहान, शेष नारायण मालवीय, दीपक, मोहन माहेश्वरी, जीएस देवहरे, सुमनकांत वाष्र्णेय, विजय अरोडास, राजेन्द्र अग्निहोत्री, राजेन्द्र सोनी, अंबरिश त्रिवेदी, रामकृष्ण चैहान श्रीमती वेणुकांता आचार्य, विणा पंवार, विणा कटलाना, शिवकुमारी सोनी, विजिया भट्ट, इन्दू अरोडा, मंजु अरोडा सहित बडी संख्या मे  श्रद्धालुजनों ने इसमे भागीदारी की । भगवान भोलेनाथ को पूर्ण पुरूषोत्तम श्रीकृष्ण की प्रसादी का उनके आग्रहानुसार अर्पित किया ।

उमापति के दरबार में देष प्रेम की भावना से आच्छादित झांकी को निहारने पूरा नगर उमडा
महा आरती के साथ फलाहारी खिचडी एवं ठंडाई की प्रसादी का हुआ वितरण
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झाबुआ । शिवरात्री के पावन अवसर पर विवेकानंद कालोनी स्थित भगवान श्री उमापति महादेव के मंदिर में रात्री  8 बजेे महाआरती एवं प्रसादी वितरण का भव्य आयोजन किया गया । भगवान भोलेनाथ के मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य को ध्यान मे रखते हुए सर्वोदय कला मंडल के मनोज भाटी, आशीष चतुर्वेदी, ओम प्रकाश शर्मा,जयेश पटेल, पियूष पटेल, मनीष वोरा, पण्डित प्रदीप भट्ट, मुकेश बैरागी, दर्शन शुक्ला, अभिजीत यादव, एवं सर्वोदय कला मंडल के सभी सदस्यों ने शिवरात्री पर देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत मंदिर की सजावट कर एवं तिरंगे पुष्पों की झांकी बनाई । भगवान उमापति महादेव को तिरंगें भारत के मानचित्र में प्रतिस्थापित किया गया तथा मंदिर की दीवारों पर आकर्षक तरिके से राष्ट्रीय ध्वज लगा कर सजाया गया । गुब्बारों के अलावा रंग बिरंगी विद्युत साज सज्जा से पूरा मंदिर दुल्हन की तरह दिखाई दिया और सायंकाल 8 बजे ढोल नगाडो एवं बेंड बाजों के साथ हुई महाआरती में पूरा मंदिर खचाखच भर गया । आरती के बाद उमापति महोदव मंदिर समिति की और से सवा क्विंटल साबुदाना खिचडी एवं सवा क्विंटल दुध एवं मेवा आदि से मिश्रित ठंडाई का वितरण किया । इस अवसर पर सैकडो लोगों ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन का लाभ उठाया । पूरा मंदिर ओम नमः शिवाय के गगनभेदी जयकारों से गुंज उठा । रात्री मे उमापति महिला मंडल की महिलाओं द्वारा संगीतमय भजनो के साथ महा जागरण का आयोजन किया ।
मंदिर  की झांकी को निहारने के लिये नगर से बडी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावडा हुआ तथा हर कोई झांकी को निहार कर देश प्रेम एवं शिवभक्ति की भावना से  सराबोर हो गया ।

आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट द्वारा पुरानी समर्पण भोजनषाला में ही रिपेयर कार्य कर प्रारंभ किया जाएगा, 1 महीने के भीतर फिर से शुरू होगी जिला चिकित्सालय के पीछे समर्पण भोजनषाला

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झाबुआ। आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट झाबुआ द्वारा पिछले कई वर्षों से जिला चिकित्सालय के पीछे समर्पण भोनजषाला का सफल संचालन किया जा रहा है, लेकिन गत महीनों में भोजनषाला के कक्ष के नीचले हिस्सों को चूहो द्वारा कूतरने से दीवार जर्जर होकर गिरने की कगार पर आने से आसरा ट्रस्ट को इस भोजनषाला को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था, लेकिन पैलेस गार्डन में आयोजित आसरा ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के पदाधिकारी-सदस्यों ने सामूहिक रूप से तय किया है कि पुरानी भोनजषाला का रिपेयरिंग कार्य पुनः इसे प्रारंभ किया जाएगा। 1 महीने के भीतर समर्पण भोजनषाला पुनः शुरू हो जाएगी। आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक गत 3 मार्च को रात्रि 8 बजे से स्थानीय पैलेस गार्डन पर रखी गई। जिसमें एक ही एजेंड़ा ट्रस्ट की समर्पण भोजनशाला शीघ्र किस तरह प्रारंभ की जाए, इस पर गहनता से विचार-मंथन हुआ। ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष राजेष नागर ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला चिकित्सालय के पीछे समर्पण भोजनषाला का आसरा ट्रस्ट द्वारा करीब 4-5 वर्षों तक सफल संचालन किया गया। इस दौरान जिला चिकित्सालय में आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों के साथ जररूतमंदों और वृद्धजनों को अत्यंत न्यूनतम दर पर स्वादिष्ट भोजन की सुविधा उपलब्ध करवाई गई, लेकिन गत महीनों में इस भोजनषाला के किचन शेड़ की दीवारों के निचले हिस्सों को चूहों द्वारा कतरने से दीवारों में दरारे पड़ने से एवं अन्य अपरिहार्य कारणों के चलते कुछ समय के लिए ट्रस्ट को यह भोजनषाला बंद रखना पड़ी।

आयुषविंग चिकित्सालय के समीप किया था भूमि का चयन
संस्थापक अध्यक्ष राजेष नागर ने बताया कि इस बीच आसरा ट्रस्ट द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. डीएस चैहान से चर्चा उपरांत जिला चिकित्सालय के समीप आयुषविंग चिकित्सालय के पास की रिक्त पड़ी जमीन, जो पूर्व कूड़ा-कचरा स्थल में तब्दील थी, का चयन किया गया। श्री नागर के अनुसार ज्योतिषाचार्यों एवं पंडितों से इस जमीन पर भोजनषाला बनाने के संबंध में चर्चा पर यह भूमि उक्त कार्य हेतु फलित नहीं होने बताया गया।

पुरानी भोजनषाला का होगा रिपेयरिंग कार्य
संस्थापक अध्यक्ष श्री नागर द्वारा यह बात बैठक में उपस्थित ट्रस्ट पदाधिकारी-सदस्यों के समक्ष रखने पर इस पर संस्थापक सचिव नीरजसिंह राठौर ने सभी से सहमति ली कि हम क्यो ना पुरानी भोजनषाला में ही रिपेयरिंग कार्य करवाकर उसे पुनः चालू करवाएं, क्योकि ट्रस्ट द्वारा यहां लंबे समय तक पूर्व में भोजनषाला का निर्बाध रूप से सफल संचालन किया जा चुका है। सभी द्वारा सहमति व्यक्त करने पर संस्थापक सचिव श्री राठौर ने बताया कि हमारे द्वारा ठेकेदार (इंजिनियर) को पुरानी भोजनषाला का सर्वे करवाया जा चुका है एवं उन्हें रिपेयरिंग कार्य अतिषीघ्र पूर्ण करने के लिए भी कहा गया है।

कम लागत पर होगा रिपेयरिंग कार्य
नीरजसिंह राठौर ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा रिपेयरिंग कार्य का ठेका जिस ठेकेदार केा दिया गया है। उसके द्वारा यह सामाजिक कार्य के दृष्टिगत कम लागत में यह भोजनषाला तैयार की जाएगी और करीब 1 महीने के अंदर कार्य पूर्ण होने के बाद संभवतः अप्रेल माह के प्रथम सप्ताह से पुरानी भोजनषाला का नए रूप में पुनः संचालन प्रारंभ हो जाएगा।

वरिष्ठ अधिकारियों को करवाया जाएगा अवगत
इस अवसर पर ट्रस्ट के मेनेजिंग ट्रस्टी यषवंत भंडारी ने कहा कि पुरानी भोजनषाला पुनः चालू होने के जानकारी से जिला कलेक्टर को अवगत करवाने के साथ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी अवगत करवाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी देने से पहले की तरह ही जिला चिकित्सालय में आने वाले रोगियों एवं परिजनों को सूचना मिलने पर वह भोजन सेवा का लाभ ले सके।

सभी ने सहयोग की घोषणा की
चूंकि आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट द्वारा कभी भी अपने प्रकल्पों या गतिविधियों के लिए बाहर से सहयोग राषि नहीं ली जाती है, इस हेतु बैठक में भोजनषाला के रिपेयरिंग कार्य में आने वाले व्यय हेतु ट्रस्ट के पदाधिकारी-सदस्यों ने ही अपनी-अपनी स्वेच्छानुसार पूर्व की तरह फिर सहयोग राषि देने की घोषणा की। बैठक में उपस्थित ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अषोक शर्मा, लीना राजेष नागर, ट्रस्ट की आजीवन अध्यक्ष श्रीमती वंदना व्यास, कुंता सोनी, यषवंत भंडारी, नीरजसिंह राठौर, प्रकाष जैन, रविराजसिंह राठौर, सुधीरसिंह कुषवाह, अतिषय देषनलहरा, श्री चक्रवर्ती, नटवर सोनी, भारती राठौर आदि ने अपने-अपने अनुसार सहयोग देने हेतु स्वीकृति प्रदान की।

एक घंटे चली बैठक
यह बैठक करीब एक घंटे तक चली। इस अवसर पर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्यों में अषोक शर्मा, इंदरसेन संघवी, सुधीरसिंह कुषवाह, नवटर सोनी, जयेन्द्र बैरागी, मीडिया प्रभारी दौलत गोलानी, अब्दुल रहीम अब्दु दादा, एचसी टेलर, अतिषय देष्लहरा, प्रकाषचन्द्र जैन, कमलेष सोनी, महिलाओं में श्रीमती कुंता सोनी, सीमा चैहान, भारती राठौर, आजीवन अध्यक्ष श्रीमती वंदना व्यास, राजकुमारी देषलहरा, अंबिका टवली, श्रीमती सोनी आदि उपस्थित थी। बैठक का संचालन ट्रस्ट के सेवा प्रकल्प अध्यक्ष रविराजसिंह राठौर ने किया एवं अंत में आभार सेवा प्रकल्प सचिव सुनील चैहान ने माना।

महाशिवरात्रि पर ब्रम्हकुमारी संस्था द्वारा षिव बाबा का 83वां महोत्सव मनाया गया, मुख्य बाजार में शोभायात्रा निकालकर किया ध्वज-वंदन, शांति के संदेष के ब्लूनस उड़ाएं गए

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झाबुआ। महाषिवरात्रि पर्व 4 मार्च को प्रजापिता ब्रम्हकुमारी ईष्वरीय विष्वविद्यालय संस्था गोपालपुरा द्वारा षिव बाबा के महोत्सव के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर सुबह गोपालपुरा केंद्र पर मेडिटेषन षिव बाबा को भोग लगाने के साथ दोपहर में शहर के राजवाड़ा से शोभायात्रा निकालकर आजाद चैक पर ध्वज वंदन किया गया। षिव शांति के ब्लूनस हवा में उड़ाएं गए। यह जानकारी देते हुए बीके ज्योति दीदी ने बताया कि महाषिवरात्रि पर 4 मार्च, सोमवार को अलसुबह 5 से 8 बजे तक सभी भ्राता-बहनों को बीके जयंती दीदी द्वारा मेडिटेषन (राजयोग) करवाया गया। बाद संस्था परिसर में ध्वज फहराया एवं षिव बाबा के चित्र के सम्मुख पुष्प अर्पण कर बाबा को भोग लगाया गया। इस दौश्रान षिवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व के बारे में सभी को जानकारी बीके जयंती दीदी ने दी। पश्चात् सभी को बाबा का भोग प्रसादी के रूप में वितरण किया गया।

शोभायात्रा निकाली गई
दोपहर 11.30 बजे शहर के ह्रदय स्थल राजवाड़ा से शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें आगे बेनर लेकर ब्रम्हकुमारी बहने चली। इसके पीछे षिव बाबा का ध्वज लेकर बड़ी संख्या में बहने शामिल। सबसे पीछे भ्राताजनों में वरिष्ठ समाजसेवी यषवंत भंडारी, सकल व्यापारी संघ अध्यक्ष नीरजसिंह राठौर, वरिष्ठ रोटेरियन जयेन्द्र बैरागी, अजय रामावत, आसरा पारमार्थिक ट्रस्ट से राजेष नागर, सुधीरसिंह कुषवाह, नवटर सोनी, महिलाओं में परहित जन सेवा संस्था से श्रीमती अर्चना राठौर, राजपूत महिला क्लब से सुश्री रूक्मणी वर्मा, अखिल भरतीय ब्राम्हण महासभा की संभागीय अध्यक्ष वीणा भार्गव आदि द्वारा सम्मिलित होकर षिव बाबा के जयकारे लगाए गए। यह शोभायात्रा नेहरू मार्ग से होते हुए आजाद चैक पर पहुंची।

षिव बाबा पूरे जगत के पालन हार
आजाद चैक पर संबोधित करते हुए सर्वप्रथम बीके जयंती दीदी ने बताया कि महाषिवरात्रि के पर्व का महत्व बताते हुए इसके आध्यत्मिक रहस्य पर भी प्रकाष डाला गया। वरिष्ठ समाजसेवी यषवंत भंडारी ने कहा कि आज षिव बाबा का ध्वज फहराते हुए गौरवान्वित महसूस कर रहे है। षिव बाबा पूरे जगत के पालन हार है। जयेन्द्र बैरागी ने आध्यात्म एवं मेडिटेषन के महत्व के बारे में जानकारी दी। श्रीमती अर्चना राठौर एवं सुश्री रूक्मणी वर्मा ने कहा कि हमे नियमित योग करने के साथ मेडिटेषन भी करना चाहिए। जिससे हमारा मन शांत और निर्मल रहता है। इस अवसर पर नीरजसिंह राठौर, अजय रामावत, वीणा भार्गव ने भी अपने-अपने विचार रखे।

ध्वज फहराया गया
बाद उपस्थित बच्चों में दिया, चित्रांक्षी, हर्षिता मुस्कान, हेतल आदि द्वारा अपने हाथों से ब्लूनस उड़ाए गए एवं सुंदर वातावरण के बीच षिव बाबा का ध्वज गीत गाकर सभी ने मिलकर ध्वज फहराया। अंत में सभी को प्रसादी का वितरण हुआ। पश्चात् यहां से रानू, रमिला, ममता, भावना बहन के साथ संतोष, सिद्धार्थ, रमेष, नारायण, दिलीपभाई द्वारा आॅफिसर्स काॅलोनी स्थित संस्था के केंद्र तक शोभायात्रा निकालकर यहां भी ध्वज फहराकर खुषियां मनाई गई।

महांकाल मित्र मंडल ने शहर के षिवालयों पर किया 13 क्विंटल फरियाली खिचड़ी का महावितरण, प्रतिवर्ष महाषिवरात्रि पर किया जाता रहेगा यह आयोजन

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झाबुआ। शहर में नवगठित महांकाल मित्र मंडल झाबुआ द्वारा महाषिवरात्रि के पावन पर्व पर 4 मार्च, सोमवार रात्रि शहर के षिवालयों पर महाप्रसादी के रूप में फरियाली खिंचड़ी का प्रसाद हजारों भक्तों को वितरित किया गया। उक्त आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में मित्र मंडल के संरक्षक डाॅ. विक्रांत भूरिया, आषीष भूरिया, गौरव सक्सेना, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती मन्नूबेन डोडियार के साथ पेटलावद विधायक वालसिंह मेड़ा ने भी शामिल कर श्रद्धालुओं को फरियाली का स्वादिष्ट प्रसाद वितरण किया। महांकाल मित्र मंडल के सक्रिय युवा सदस्य अंषुल (गटाक) महोदिया ने बताया कि मित्र मंडल द्वारा इस वर्ष से संकल्प लिया गया है कि महाषिवरात्रि के पावन पर प्रतिवर्ष मित्र मंडल द्वारा शहर के सभी षिवालयों पर रात्रि में फरियाली खिचड़ी का प्रसाद भक्तों को वितरित किया जाएगा। सोमवार को महाषिवरात्रि के उपलक्ष में मित्र मंडल द्वारा करीब 13 क्विंटल स्वादिष्ट खिचड़ी का प्रसाद तैयार किया गया। बाद रात्रि में शहर के सिद्धेष्वर काॅलोनी स्थित सिद्धेष्वर महादेव मंदिर, छोटे तालाब स्थित श्री मनकामेष्वर महादेव मंदिर एवं डीआरपी लाईन स्थित गोपेष्वर महादेव मंदिर, बसंत काॅलोनी में गायत्री शक्तिपीठ के समीप स्थित षिव मंदिर, नेहरू मार्ग स्थित कालिका माता मंदिर पर मित्र मंडल के सदस्यों में विषाल राठौर, राकेष सोनावा, अंषुल (गटाक) महोदिया, निलेष राठौर, विक्रमसिंह चैहान, कुलदीप राठौर, अजय राठौर, सौरभ कोठारी, उपेन्द्र आचार्य आदि द्वारा पहुंचकर स्टाॅल लगाकर भक्तजनों को यह स्वादिष्ट प्रसाद बांटा गया।

अतिथि के रूप में हुए ये हुए शामिल
यह प्रसादी वितरण कार्य रात्रि 8 से 10.30 बजे तक चला। छोटा तालाब स्थित श्री मनकामेष्वर महादेव मंदिर पर अतिथि के रूप में मुख्य रूप से सांसद प्रतिनिधि डाॅ. विक्रांत भूरिया, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती मन्नूबेन डोडियार, पेटलावद विधायक वालसिंह मेडा ने करीब आधा घंटा उपस्थित रहकर भक्तजनों को प्रसाद वितरित किया। साथ ही महांकाल मित्र मंडल के इस पुण्य कार्य की सराहना की।

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