दरभंगा : नैक असेस्मेंट अवेयरनेस प्रोग्राम (नैप ) पर एक कार्यशाला - Live Aaryaavart

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शनिवार, 16 मार्च 2019

दरभंगा : नैक असेस्मेंट अवेयरनेस प्रोग्राम (नैप ) पर एक कार्यशाला

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दरभंगा (आर्यावर्त संवाददाता) आज दिनांक 16मार्च को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के जूबिली हॉल में नैक असेस्मेंट अवेयरनेस प्रोग्राम (नैप ) पर एक कार्यशाला आयोजित किया गया जिसका उदघाटन ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय के कुलपति के प्रभार में प्रतिकुलपति  प्रोफेसर जय गोपाल ने किया।  इस कार्यक्रम में मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा तथा भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, के सभी अंगीभूत तथा सम्बंध महाविद्यालयो के प्रधानाचार्यों ने भाग लिया। यह जागरूकता कार्यक्रम नैक बेंगलुरु द्वारा संपोषित था।  ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के आइ॰क्यू॰ए॰सी॰ कार्डिनेटर डाक्टर बी॰ बी॰ एल॰दास, ने सभी अथिथियों का स्वागत किया। प्रो॰ इंद्र नाथ मिश्रा ने पावर प्वाईन्ट  के माध्यम  से नैक के एसेसमेंट  और अक्रेडिटेशन प्रक्रिया के सभी स्तरों को विस्तार से बताया।  कार्यक्रम के दो मुख्य वक्ता डाक्टर प्रतिभा सिंह, सहायक सलाहकार नैक नई दिल्ली तथा नैक बैंगलोर के उप सलाहकार डाक्टर पी॰एस॰पौनमुदमुदिराज कार्यक्रम के मुख्य केंद्र विन्दू थे। प्रो॰जय गोपाल ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में बताया कि बिहार के उच्च शिक्षा अन्य राज्यों की तुलना में बहुत पीछे है जो नैक के रास्ते अक्रेडिटेशन के द्वारा अच्छा किया जा सकता है। इन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के स्तर को कोर्स की रूपरेखा तथा प्रोफेसनल पढ़ाई करके एवं प्लेस्मेंट प्रक्रिया को अच्छा करके ठीक किया जा सकता है। सभी प्रधानाचार्यों को इसकी महता को समझना चाहिए।   प्रथम तकनीकी सेशन में डाक्टर प्रतिभा सिंह जो नैक दिल्ली के इन-चार्ज भी है,  ने रेवायज़्ड अक्रेडिटेशन फ़्रेम्वर्क के वर्क फ़्लो को बहुत ही सरल तरीक़े से समझाया।  इन्होंने पुराने तथा नए प्रक्रिया पद्धति में अंतर को बताया।  बहुत ही छोटी छोटी बातों को सम्बंधित अंतरो को उदाहरण के साथ बताया।  उन्होंनें सभी सातों मापदंडों के विभिन्न अंकों एवम सभी प्रक्रियाओं को पावर प्वाईंट के माध्यम से समझाया।  डाक्टर पौनमुदीराज ने नैक के अक्रेडिटेशन प्रक्रिया के भूत, वर्तमान तथा भविष्य पर पूरी जानकारी रोचक ढंग से दी।  तीसरे सेशन प्रश्न काल का था जिसमें दोनो एक्स्पर्ट ने प्रतिभागियों द्वारा पूछे गये सभी प्रश्नो का उत्तर दिया। इस दौरान नैक कराने में हो रहे कठिनाई पर बृहत् चर्चा हुई। महाविद्यालयों  में शिक्षकों और शिक्षेत्तर कर्मचारियों की कमी, मूलभूत संसाधन आदि की कमी मुख्य रूप से उभर कर आया । डाक्टर के के साहु ने कार्यक्रम के सार को बताते हुए ये कहा की बिहार की परिस्थिति को देखते हुए नैक को चाहिए की इस प्रकिया को दो स्तर पर कराना चाहिए जिसमें पहले बग़ैर एस॰एस॰आर॰तैयार कर के महाविद्यालय में जा कर सारी कठिनाइयों को सामने लाए। कार्यक्रम का संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन सी॰ सी॰ डी॰ सी॰ प्रो॰ डाक्टर मुनेश्वर यादव ने किया।दो दो विश्वविद्यलयों के प्रतिभागी प्रधानाचार्यों की नैक पर कार्यशाला के आयोजन का अवसर प्राप्त होना विश्वविद्यालय के लिये गौरव की बात है ।

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