बिहार : विस्थापन के 47 साल के बाद भी पुनर्वास नहीं - Live Aaryaavart

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सोमवार, 8 अप्रैल 2019

बिहार : विस्थापन के 47 साल के बाद भी पुनर्वास नहीं

अभिमंयू नगर में गड्ढे में जमीन देने के बाद भी महादलितों को जमीन पर कब्जा नहीं
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पटना,09 अप्रैल। बिहार सरकार ने 1972 में जे.डी.विमेंस कॉलेज को भवन व परिसर देने का निश्चय किया। इसका असर झोपड़ियों रहने वाले हजारों महादलित व पिछड़ी जातियों पर पड़ा। सबके सब एक ही झटके में आवासीय भूमिहीनों  हो गए।बताया जाता है कि इन विस्थापितों को पुनर्वासित करने का अधूरा प्रयास सरकार के द्वारा किया गया। इनको टेशलाल वर्मा नगर, शबरी कॉलोनी, अभिमंयु नगर आदि जगहों में पनाह दिया गया। केवल अभिमंयु नगर के महादलितों को 3 डिसमिल जमीन का पर्चा मिला। मगर जमीन पर कब्जा नहीं मिला। मरच्छिया देवी कहती हैं कि सरकार ने हम महादलित मुसहरों को जमीन सड़क के किनारे वाले गड्ढे में दे दी। उक्त जमीन का पर्चा हमलोगों के  हाथ में है और जमीन किसी और के साथ में है।शबरी कॉलोनी के महादलितों को सड़क अतिक्रमण करने के नाम पर खदेड़ दिया गया। विस्थापित इधर-उधर भटकने को बाध्य हैं। जे.डी.विमेंस कॉलेज निर्माण होने से विस्थापित हजारों परिवारों में 274 परिवार टेशलाल वर्मा नगर में झोपड़ी तान लिए।इस जगह में बाद में पाटलिपुत्र स्टेशन निर्माण करने हेतु पूर्व मध्य      रेलवे जमीन का अधिग्रहण कर ली।इस जमीन से तीन बार सरकाकर नहर किनारे कर दी। नहर के करीब ढकेलने के बाद रेलवे ने  दीवार बना दी है। इधर 2002 से रहते आ रहे हैं। यहां पर न्यूनतम जरूरी की सुविधा नहीं है। विस्थापितों के नेता सुनील कुमार कहते हैं कि हमलोग आवासीय भूमिहीन व विस्थापित परिवार के सदस्य हैं।हमलोग एकमत होकर जन संगठन एकता परिषद साथ हो गए। इस जन संगठन के संस्थापक पी.व्ही.राजगोपाल जी हैं। इनके नेतृत्व में जनादेश 2007, जन सत्याग्रह 2012 और जनांदोलन 2018 में ग्वालिया से सत्याग्रह पदयात्रा किए।उन्होंने कहा कि जन संगठन से जुड़े प्रदीप प्रियदर्शी के मार्गदर्शन में 2007 में 9 माह तक सत्याग्रह किया गया । इस सत्याग्रह के बाद भी 274 परिवार के लोगों को पुनर्वासित करने हेतु कदम नहीं उठाया गया। तब सामूहिक चन्दा करके माननीय पटना उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर किए। माननीय न्यायालय ने पुर्नवास करने की व्यवस्था करने का आदेश दिया गया। अब सीएम नीतीश कुमार से विस्थापित कहते हैं कि हमलोग नहर के चाट में रहते हैं। 47 सालों के बाद भी स्थायी ठौर नहीं मिला है। पूर्व मध्य रेलवे की सीमांकन दीवार से सटे रहते हैं। ऐलिवेटेड पुल के पिलर के पूरब में 274 परिवार झोपड़ी में नारकीय जीवन व्यक्तित कर रहे हैं। बिहार सरकार की 18 सौ स्कॉयर फीट जमीन है। जो नहर व पिलर से 35 फीट चौड़ी जमीन है। विस्थापित 20 फीट चौड़ी जमीन पर 274 परिवार झोपड़ी बना रखे हैं।इस समय लोग आवाजाही करने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं। सुनील कुमार कहते हैं कि नहर की सफाई जेसीबी से करा कीचड़ को खाली भूखंड पर डाल दें।ऐसा करने से 8-10 फीड की सड़क बन जाएगी। सुनील कुमार ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 274 परिवारों को पक्का मकान बना दें। कुछ दिन पूर्व 24 झोपड़ियों में आग लग गयी थी। इसके आलोक में पक्का मकान बने। इसके अलावे 7 निश्चय के तहत हर घर नल का जल, हर घर  बिजली लगातार ,घर तक पक्की गली- नालियां,  शौचालय निर्माण, घर का सम्मान,अवसर बढ़े, आगे पढ़े, आर्थिक हल,युवा बल, आरक्षित रोजगार,महिलाओं का अधिकार को लागू करने का आग्रह किया गया है।

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