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बुधवार, 17 अप्रैल 2019

विचार : वायनाड से रिश्ता जोड़कर, क्या अमेठी से रिश्ता तोड़ेंगे राहुल ?

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केरल के वायनाड से नामांकन दाखिल करने के बाद राहुल गांधी  वायनाड के दौरे पर हैं। जहाँ उन्होंने कहा कि मैं यहाँ आप लोगों से उम्र भर का रिश्ता रखने के लिए आया हूँ। ऐसे में क्या अमेठी को छोड़ देंगें राहुल गांधी? उत्तर प्रदेश का जिला अमेठी जिसे राजनीति में कांग्रेस का गढ़ कहा जाता है। कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2004  में अपनी सियासी पारी की शुरुआत अमेठी से की और  अब तक यहाँ से जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। अमेठी की जनता ने भी खुद को साबित करते हुए ये बतला दिया था कि जैसे वह सिर्फ कांग्रेस के चुनाव चिन्ह को पहचानती हो। कुछ भी हो चौथी बार फिर से राहुल गांधी ने अमेठी से नामांकन कर दिया। लेकिन इस बार राहुल ने अमेठी के अलावा केरल की वायनाड सीट से भी अपना पर्चा दाखिल किया है। यानि राहुल गांधी दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ रहेंं हैं। ऐसे में कांग्रेस के अध्यक्ष के सामने यह चुनौती होगी की अगर वह दोनों सीटों से जीत हासिल करते हैं तो किस सीट को छोड़ेंगे? एक तरफ अमेठी की जनता जिसने वर्षों से कांग्रेस का साथ दिया तो दूसरी तरफ राहुल के लिए नई नवेली सीट वायनाड है। नामांकन दाखिल करने के बाद वायनाड दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने वहाँ कि जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि मैं( राहुल गांधी) यहाँ आप लोगों से उम्र भर का रिश्ता निभाने आया हूँ। इतना ही नहीं राहुल गांधी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री की तरह झूठ नहीं बोलता। मैं यहाँ जीवन भर का साथ निभाने के लिए आया हूँ।  ऐसे में राहुल गांधी के बयान के यह मायने निकल कर आतें हैं कि अगर दोनों सीट पर राहुल को जीत मिलती है तो राहुल क्या अमेठी को छोड़ देगें? क्या राहुल अमेठी की जनता का भरोसा तोड़ देगें? यह वही जनता है जिसने 2014 में मोदी लहर होने के बाद भी अमेठी से कांग्रेस की लाज बचाई थी। ऐसे में राहुल के पास क्या रास्ता बचेगा, वह या तो अमेठी की जनता का विश्वास तोड़ेंगे या फिर वायनाड को दिए हुए अपने वादे को बचाएंंगे। 

अमेठी में सिर्फ़ दो बार हारी कांग्रेस
अमेठी में चुनाव और उपचुनाव मिलाकर  18 बार लोकसभा का चुनाव हुआ है। जिसमें कांंग्रेेेस ने 16 बार जीत हासिल की। पहली बार  जनता पार्टी के राघवेंद्र प्रताप सिंह 1977 मेंं और दूसरी बार 1998 में बीजेपी के डॉ. संजय सिंह के हाथों कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा। जबकि  बाकी चुनावों में गांधी परिवार के सदस्य यहां रिकॉर्ड मतों से जीतकर संसद में पहुंचते रहेंं। 

वायनाड से भावनात्मक रिश्ते ?
वायनाड दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने रैली करने से पहले थिरूनेल्ली मंदिर में पूजा अर्चना की। इस दौरे में राहुल के राजनीतिक पहलू के अलावा भी भावनात्मक मायने भी हैं। 1991 में आत्मघाती हमले में राजीव गांधी की मृत्यु के बाद इसी मंदिर के निकट स्थित पापनाशिनी नदी में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अस्थियां विसर्जित की गई थी।

राहुल के सामने सीट चुनने में होगी चुनौती- अमेठी और वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ रहे राहुल के लिए अमेठी छोड़ना आसान नहीं होगा अगर दोनों सीटों से उनको जीत मिलती हैं तो। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने अपने बयान में साफ कहा था कि राहुल गांधी अमेठी नहीं छोड़ेंगे। ऐसे में वायनाड में जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने उम्र भर का रिश्ता निभाने की जो बात कही थी उसके क्या मायने निकाले जाए। 1980 में इंदिरा गांधी आंध्रप्रदेश के मेडक और रायबरेली से चुनाव लड़ी थी। दोनों सीट में जीत हासिल करने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कांग्रेस का गढ़ कही जाने वाली रायबरेली सीट को छोड़ दिया था।  ऐसे में राहुल गांधी के बयान के क्या यही मायने निकलते हैं।



रवि श्रीवास्तव

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