बिहार : महिला अधिकारों को बचाने के लिए भाजपा को हराना पहला काम : कविता कृष्णन - Live Aaryaavart

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा I ह्रदय राखि कौसलपुर राजा II, हरिजन जानि प्रीति अति गाढ़ी। सजल नयन पुलकावलि बाढ़ी॥, मंगल भवन अमंगल हारी I द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी II, हरि अनंत हरि कथा अनंता I कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता II, दीन दयाल बिरिदु संभारी । हरहु नाथ मम संकट भारी।I, माता पिता की सेवा करें....बुजुर्गों का ख्याल रखें...अपनी प्रतिभा और आचरण से देश का नाम रौशन करें...

मंगलवार, 9 अप्रैल 2019

बिहार : महिला अधिकारों को बचाने के लिए भाजपा को हराना पहला काम : कविता कृष्णन

ऐपवा की ओर से ‘इस चुनाव में कहां है हम औरतों के सवाल’ विषय पर गोष्ठीप्रो. भारती एस कुमार ने कहा लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ व्यापक प्रचार चलायेंगोष्ठी में पटना विश्वविद्यालय की शिक्षिकाओं के अलावा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया
beat-bjp-kavita-krishnan
पटना,09 अप्रैल। भाकपा-माले की पोलित ब्यूरो सदस्य व ऐपवा की राष्ट्रीय सचिव कविता कृष्णन ने आज पटना विवि के दरभंगा हाउस में ऐपवा द्वारा ‘इस चुनाव में कहां हैं हम औरतों के सवाल’ विषय पर आयोजित गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि 2019 का चुनाव यदि भाजपा जीत जाती है तो महिलाओं के कोई भी अधिकार बचने वाले नहीं है. इसलिए हम महिलाओं की पहली प्राथमिकता लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा को हराने की है. ऐसी ताकतों को फिर से देश की जनता मौका नहीं देने वाली है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा देश के लोकतंत्र के लिए खतरा है. महिलाओं, दलितों, अकलियतों और समुदाय के कमजोर वर्ग को जो भी अधिकार व लोकतंत्र मिले हैं, उसे भाजपा खत्म करने में लगी हुई है. विगत 5 वर्षों के दौरान यही सब देखने सुनने को मिला है. आरएसएस का साफ मानना है कि महिलाओं को अधिकार देने वाले संविधान की कोई जरूरत नहीं है. वे देश को मनुस्मृति के अनुसार चलाना चाहते हैं, जिसके अनुसार महिलाओं व दलितों को किसी भी प्रकार के कोई अधिकार नहीं होने चाहिए. महिलाओं को किसी भी प्रकार की आजादी नहीं होनी चाहिए.  मनुस्मृति में महिलाओं व दलितों के लिए बर्बर किस्म की यातनाओं का प्रावधान है. भाजपा ऐसे ही दौर की उम्मीद रख रही है.

आगे कहा कि भाजपा अपने घोषणापत्र में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की बात करती है लेकिन उसके नेता व मंत्री कहीं से भी ेऐसा नहीं चाहते. यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुलेआम 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का विरोध करते हैं. महिला आरक्षण के खिलाफ उन्होंने कई लेख लिखे हैं जिसे आरएसएस की पत्रिकाओं में लगातार छापा गया है. यही कारण है कि 2014 के घोषणापत्र में जिक्र होने के बावजूद भाजपा महिला आरक्षण पर बिल नहीं ला सकी. उन्होंने कहा कि दरअसल जो समुदाय अपने हक-अधिकार की मांग करता है, भाजपा उसे निशाने पर ले लेती है. आरएसएस की पत्रिका पांचजन्य जेएनयू को दरार का गढ़ बताती है. वह कहती है कि इस विश्वविद्यालय में महिलाओं-दलितों-नार्थ इस्ट, कमजोर समुदाय आदि के लिए विशेष प्रावधान क्यों हैं? इन कैंपसों में महिला मुक्ति अथवा जाति प्रथा के खात्मे की बात क्यों की जाती है? इन नारों को भाजपा वाले देशद्रोही नारे बताते हैं. लेकिन हकीकत क्या है? हकीकत यह है कि भाजपा के लोग आज सबसे ज्यादा देश को विभाजित कर रहे हैं. पूरे देश में हिंदु-मुस्लिमों के बीच दरार पैदा कर रहे हैं. नफरत का माहौल खड़ा कर रहे हैं. मुस्लिमों की हत्या हो रही है, दलितों को मारा-पीटा जा रहा है, महिलाओं को अपमानित कर रहे हैं. 

भाजपा का बेटी बचाओ का नारा बलात्कारी बचाओ में तब्दील हो गया है. इस प्रोजेक्ट का 60 प्रतिशत से अधिक राशि बेटियों पर खर्च होने की बजाए प्रधानमंत्री के विज्ञापन पर खर्च हुआ. यह विज्ञापन प्रचार योजना बन गई है. उज्जवला योजना के तहत जिन लोगों को कनेक्शन मिला, उनमें 85 प्रतिशत लोग गैस की भारी कीमत के कारण उसका इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहे हैं. नोटबंदी के दौरान लाखों लोगों की नौकरियां गईं. महिलाओं पर इसकी सबसे ज्यादा मार पड़ी. तकरीबन 88 लाख महिलाओं को अपने रोजगार से हाथ धोना पड़ा. इसलिए ऐसी सरकार को सबक सिखाना ही होगा. 5 साल की सारी घोषणाएं पूरी तरह फेल साबित हो चुकी हैं. यह भी कहा कि यह सरकार महिलाओं के शरीर को महज मशीन समझती है और उसका केवल इस्तेमाल करना जानती है. केरल के मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भाजपा के लोग रजस्वला स्त्री को मंदिर में नहीं घुसने दे रहे हैं. इस पितृवादी-ब्राह्मणवादी मानिसकता को तोड़ना ही होगा.

प्रो. भारती एस कुमार ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि भाजपा व उसकी विचारधारा पूरी तरह महिला विरोधी है. ऐसी विचारधारा से हर कदम पर लड़ने की जरूरत है. हम महिलाएं अगले पांच साल के लिए ऐसी ही सरकार को बर्दाश्त नहीं कर सकते. इसलिए हमारा यह दायित्व है कि हम सभी इस पितृवादी विचार के खिलाफ महिलाओं की आजादी के सवाल पर मजबूत आवाज उठायें. इस मौके पर ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी, पटना विवि की शिक्षिका प्रो. सीमा प्रसाद, पटना वीमेंस काॅलेज में लेक्चरर रीचा, आइसा की प्रियंका प्रिदर्शिनी, मृणाल, प्राची वर्मा, इबराना, मधु, मंजू आदि लोगों ने भी गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त किए.  कार्यक्रम की शुरूआत में हिरावल की प्रीति प्रभा के नेतृत्व में गायन का आयोजन हुआ. उसके बाद ऐपवा की बिहार राज्य सचिव शशि यादव ने कार्यक्रम के मुख्य अतिथियों को मंच पर बुलाया और फिर उसके बाद कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत हुई. इन नेताओं के अलावा कार्यक्रम में ऐपवा की अनिता सिन्हा, कोरस की रिया व अन्य लड़कियां, नीतू, पटना विश्ववि़द्यालय की कांउसिलर जुलेखा, कोमल, पटना विवि के रिसर्चर, छात्र व छात्रायें आदि लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया.

कोई टिप्पणी नहीं:

Loading...