पूर्णिया : यह भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि हमारी मातृभूमि है : RSS - Live Aaryaavart

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रविवार, 7 अप्रैल 2019

पूर्णिया : यह भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि हमारी मातृभूमि है : RSS

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पूर्णिया : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्णिया के स्वयंसेवकों ने सरस्वती शिशु मंदिर में हिंदू नववर्ष मनाया। वर्ष प्रतिपदा के पावन अवसर पर सभी स्वयंसेवकों ने संघ की शाखा या किसी भी कार्यक्रम के प्रारंभ में अपने गुरु के स्थान पर लगने वाले भगवा ध्वज के स्थापित होने के पूर्व अपने आद्य सरसंघ चालक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार जी को आद्य सरसंघचालक प्रणाम निवेदित किया। जिसके उपरांत ध्वज स्थापित किया गया और तब ध्वज प्रणाम हुआ। ऐसा पूरे वर्ष में हिंदू नववर्ष के ही दिन संघ के स्वयंसेवकों द्वारा किया जाता है। हिंदू नववर्ष की महत्ता संपूर्ण विश्व के लिए है लेकिन स्वयंसेवकों के लिए उनके आद्य सरसंघचालक डॉ हेडगेवार का जन्मदिवस नववर्ष के दिन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वर्ष प्रतिपदा उत्सव को अपने छह उत्सव में प्रथम उत्सव मानता है। चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा विक्रम संवत 2076 कलियुगाब्द 5120 हिन्दू नववर्ष के दिन ही इस सृष्टि का निर्माण ब्रह्मा जी के द्वारा किया गया। भगवान श्रीरामचंद्र जी का राज्याभिषेक, धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक, भगवान झूलेलाल जी का जन्मदिवस, सिख परंपरा के द्वितीय गुरु अंगद देव जी का जन्मदिवस, आर्य समाज का स्थापना दिवस इस प्रकार और भी अनेक विषय इसी दिन घटित हुए। जो इस दिन को पावन बनाते हैं। यह नव वर्ष तो साक्षात प्रकृति भी बनाती है। इस उत्सव में बौद्धिककर्ता के रूप में पूर्णिया विभाग प्रचारक राकेश कुमार ने कहा कि संपूर्ण विश्व में जिस संस्कृति की पताका लहराती रही और आज पुनश्च उस संस्कृति का प्रभाव विश्व पटल पर दिख रहा है। क्योंकि जहां देश में अलग अलग कार्य पद्धति चल रही है वहीं 1925 से बीज रूप में स्थापित संघ जो आज बट वृक्ष बन चुका है। जिसकी कार्यपद्धति की देन है कि आज संघ के स्वयंसेवक राष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और इन सब का कारण कार्यपद्धति में निहित सर्वस्व अर्पण की भावना है। जहां एक ओर दुनिया में स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बढ़ जाने को प्रगति का मानक माना गया है वहीं अपने देश में सर्वस्व त्याग करने वाले संतो, जान न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों ने समाज सुधार में अपना सर्वस्व झोंक देने वाले महापुरुषों को भारत की जनता मानती और पूछती है। जिला संघचालक डॉ हरिनंदन राय ने कहा कि देश की जनता धन कुबेरों को नहीं पूछती। दुनिया में केवल यही एक देश है जहां हमारे लिए यह भूमि का टुकड़ा मात्र नहीं बल्कि यह हमारी मातृभूमि है और इस कार्यपद्धति के बढ़ने का कारण यह है कि हम अपने पूर्वजों के बताए मार्ग पर चलते हैं। हम महापुरुषों के विचारों को आत्मसात कर चलते हैं। संघ का स्पष्ट मत है राष्ट्र को परम वैभव के शिखर पर आसन्न करने के लिए भारत को त्याग और तपस्या के जीवन को याद करते हुए जन जन के बीच राष्ट्र प्रथम यह भाव भरना होगा। आज देशभर में 60 हजार से भी अधिक स्थानों पर लग रही संघ की शाखाएं और संघ परिवार के लाखों सेवा कार्य संघ की शक्ति है। संपूर्ण विश्व संघ को पढ़ना चाहता है सुनना चाहता है लेकिन जिस प्रकार गगन के समान दूसरा कोई गगन नहीं समुद्र के समान दूसरा कोई समुद्र नहीं और राम रावण के युद्ध के समान दूसरा कोई युद्ध नहीं हुआ ठीक उसी प्रकार से सुनकर पढ़कर संघ को नहीं समझा जा सकता। यदि सुनकर पढ़कर संघ को समझेंगे क्वेश्चन उत्पन्न होगा भ्रम की स्थिति स्थिति उत्पन्न होगी। सर्वोत्तम यही होगा कि संघ की शाखा में आइए और संघ को समझें प्रत्येक स्वयंसेवक का कर्तव्य बनता है संघ कार्य को अपना बल प्रदान करें। जिससे सीमांचल के क्षेत्र में उत्पन्न हो रही समस्याएं और राष्ट्रवादी गतिविधियों का निराकरण संघ शक्ति सरलतापूर्वक कर सके। अंत में विभाग प्रचारक ने कहा कि इस पावन अवसर पर प्रत्येक स्वयंसेवक को कुछ संकल्प लेना चाहिए। वह संकल्प विश्वास का होना चाहिए दृढ़ निश्चय का होना चाहिए। क्योंकि शुद्ध हृदय की प्याली में विश्वास दीप निष्कंप जलाकर, कोटि कोटि पग चरण बढ़ रहे निज जीवन तिल तिल गला गला कर जब तक ध्येय न पूरा होगा तब तक पग की गति न रुकेगी। आज कहे चाहे जो दुनिया कल को झुके बिना न रहेगी...। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्णिया के चिकित्सक जिला संघचालक डॉ हरिनंदन राय ने की। कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की प्रांत कार्यवाही का अमिता प्रियंवदा, नूपुर शुभांगी, पूजा कुमारी, विद्या भारती के सह प्रदेश सचिव अजय तिवारी प्रधानाचार्य बिरेंद्र मेहता, अशोक सिंह के अलावे अन्य की उपस्थिति रही तथा कार्यक्रम को व्यवस्थित संचालित करने में जिला कार्यवाह सुनील कुमार, विभाग प्रचार प्रमुख संजीत कुमार सह नगर कार्यवाह दीपक कुमार, राहुल राजदेव, शिवशंकर कुमार, आशीष कुमार, प्रभात कुमार, नंदन कुमार की मुख्य भूमिका रही। उत्सव स्थल के बाहर नववर्ष के बैनर स्टीकर झंडे पताके की बिक्री का स्टॉल भी लगा था।

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